चंबल अंचल की माटी में प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है, और यहां के युवा हर क्षेत्र में अपनी योग्यता का लोहा मनवा रहे हैं। भिंड में आयोजित एक मेधावी छात्र सम्मान समारोह के दौरान यह बात प्रमुखता से सामने आई। अधिकारियों और बुद्धिजीवियों का मानना है कि यहां के छात्र बोर्ड परीक्षाओं से लेकर अन्य क्षेत्रों में लगातार उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रहे हैं।

युवाओं में जज्बे की कमी नहीं

समारोह को संबोधित करते हुए कमिश्नर ने कहा कि चंबल क्षेत्र को लेकर कई बार लोगों की धारणाएं अलग होती हैं, जबकि सच्चाई यह है कि यहां के युवाओं में असीम जज्बा और कुछ कर दिखाने का जुनून है। जो युवा किसी लक्ष्य को ठान लेते हैं, उसे हासिल करके ही रहते हैं। नई पीढ़ी को इसी सकारात्मक ऊर्जा और लगन के साथ आगे बढ़ने की आवश्यकता है।

इस अवसर पर उन्होंने बाबा जनक राम ट्रस्ट द्वारा किए जा रहे सेवा कार्यों की भी जमकर सराहना की। उन्होंने कहा कि समाज के उत्थान के लिए ऐसी संस्थाओं का होना बेहद जरूरी है जो शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में निरंतर सक्रिय रूप से कार्य कर रही हैं।

भिंड में आरोग्यधाम जैसा प्रकल्प बनाने की आवश्यकता

स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार पर जोर देते हुए कमिश्नर ने कहा कि भिंड में भी ग्वालियर के आरोग्यधाम की तर्ज पर एक बड़ा स्वास्थ्य प्रकल्प विकसित किया जाना चाहिए। उन्होंने शहर के चिकित्सकों, समाजसेवियों और सक्षम नागरिकों से इस नेक काम में आगे आने की अपील की। उन्होंने आश्वस्त किया कि इस प्रकार के किसी भी प्रयास के लिए प्रशासन की तरफ से जमीन और अन्य जरूरी मदद पूरी तरह से मुहैया कराई जाएगी।

उन्होंने अपने प्रशासनिक अनुभवों का जिक्र करते हुए कहा कि भिंड के डॉक्टरों में विशेष सेवा भाव देखने को मिलता है। हालांकि, स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करने का दायित्व अकेले चिकित्सा विभाग का नहीं है, बल्कि इसके लिए प्रशासन, डॉक्टरों और पूरे समाज को मिलकर सामूहिक प्रयास करने होंगे।

चिकित्सा व्यवस्था और संवाद कार्यक्रम

कार्यक्रम के दौरान मेधावी छात्रों के सम्मान के साथ ही वरिष्ठ चिकित्सकों के लिए ‘चिकित्सकों के मन की बात’ संवाद सत्र का भी आयोजन हुआ। इसमें जिले के कई अनुभवी डॉक्टरों ने स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े अपने अनुभव और जमीनी परेशानियां सबके सामने रखीं।

पूर्व कमिश्नर राजीव शर्मा ने ट्रस्ट के सामाजिक कार्यों का विवरण देते हुए कहा कि डॉक्टरों को किसी भी प्रकार के दबाव में रखकर काम नहीं करवाना चाहिए। उनका मानना था कि अनावश्यक प्रशासनिक दबाव, सिफारिशों और राजनीतिक दखलअंदाजी का बुरा प्रभाव पूरी चिकित्सा व्यवस्था पर पड़ता है, जिसका खामियाजा अंततः इलाज कराने वाले मरीजों को भुगतना पड़ता है।

इस दौरान भिंड सीएमएचओ डॉ. जीएस यादव ने अपने विचार रखते हुए कहा कि कोई भी चिकित्सक कभी नहीं चाहता कि उसके इलाज में किसी प्रकार की लापरवाही हो। डॉक्टर हमेशा पूरी ईमानदारी से सेवा देते हैं, बशर्ते उन्हें उचित सहयोग मिले। मरीजों और उनके तीमारदारों को भी सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाकर डॉक्टरों का साथ देना चाहिए। वहीं डॉ. हिमांशु बंसल ने बताया कि इलाज से पहले राजनीतिक सिफारिशों के फोन आने से डॉक्टरों पर अनुचित दबाव बनता है, जिससे गंभीर मामलों में कई बार स्थितियां जटिल हो जाती हैं।