भिंड जिले में खाद और उर्वरक वितरण व्यवस्था को पूरी तरह से पारदर्शी बनाने के लिए ई-विकास 2.0 (वितरण एवं कृषि उर्वरक आपूर्ति समाधान) प्रणाली शुरू कर दी गई है। इस नई व्यवस्था के लागू होने के बाद अब किसानों को खाद प्राप्त करने के लिए लंबी लाइनों में लगकर मैन्युअल टोकन लेने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। कृषि उपज मंडी प्रांगण से अब पूरी प्रक्रिया ई-टोकन के आधार पर संचालित होगी।

किसानों को मिलेगी पसंद के उर्वरक की सुविधा

किसानों, निजी विक्रेताओं और अन्य हितधारकों के सुझावों को ध्यान में रखते हुए ई-विकास 2.0 पोर्टल को बेहद सरल और प्रभावी बनाया गया है। अब अन्नदाता अपनी जमीन की पात्रता के अनुसार पहली बार में ही अपनी जरूरत का कोई भी एक उर्वरक आसानी से खरीद सकेंगे। इसके अलावा, फसलवार आईसीएआर की अनुशंसा के अनुसार या उससे अधिक मात्रा में खाद लेने की सुविधा भी इसमें जोड़ी गई है।

अतिरिक्त उर्वरक की आवश्यकता होने पर किसानों को अब 50 शब्दों में लिखित कारण देने से राहत दे दी गई है। पोर्टल पर अब केवल एक ड्रॉपडाउन विकल्प के जरिए कारण का चयन करना होगा। खाद की गणना प्रति हेक्टेयर बैग के हिसाब से की जाएगी और किसान पोर्टल पर उपलब्ध जानकारी देखकर अपनी पसंद का उर्वरक चुन सकेंगे।

टोकन निरस्त करने और शिकायत दर्ज कराने की व्यवस्था

नई प्रणाली के तहत यदि किसी किसान का टोकन जनरेट हो जाता है, तो उसे 24 घंटे के भीतर निरस्त करने का विकल्प भी उपलब्ध कराया गया है। फसल खराब होने जैसी विशेष परिस्थितियों में दोबारा खाद की मांग के लिए एक्सेप्शनल हैंडलिंग का प्रावधान है, जिसके मामलों का अनुमोदन तहसीलदार या एसडीएम स्तर से 48 घंटे के भीतर किया जाएगा।

मार्कफेड के डबल लॉक केंद्रों पर मांग के आधार पर प्रतिदिन 300 से अधिक टोकन जनरेट करने की क्षमता होगी और वहां पर्याप्त खाद का भंडारण भी सुनिश्चित किया जा रहा है।

हेल्पलाइन नंबर पर करें संपर्क

भिंड के उपसंचालक कृषि ने स्पष्ट किया है कि 20 अगस्त से मैन्युअल खाद वितरण पूरी तरह बंद कर दिया गया है। किसानों को किसी भी प्रकार की तकनीकी समस्या का सामना न करना पड़े, इसके लिए हेल्पलाइन नंबर 7880223344 जारी किया गया है। शासकीय कार्य दिवसों में सुबह 10 बजे से शाम 6 बजे के बीच इस नंबर पर कॉल करके अपनी शिकायत दर्ज कराई जा सकती है।