सावन सोमवार पर गूंजा शिवमय वातावरण

भिंड जिले के अंतर्गत आने वाले आलमपुर कस्बे के प्रसिद्ध हरिहरेश्वर मंदिर में सावन माह के दूसरे सोमवार को भारी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। सुबह होते ही मंदिर परिसर 'ॐ नमः शिवाय' और 'बम बम भोले' के गूंजते जयकारों से पूरी तरह भक्तिमय हो गया।

पवित्र दिन पर भक्तों ने भगवान शिव के दर्शन कर उनका जलाभिषेक और दुग्धाभिषेक किया। इसके साथ ही पूजन सामग्री में बेलपत्र, धतूरा और पुष्प अर्पित कर सुख-समृद्धि की कामना की गई।

देवी अहिल्याबाई होलकर से जुड़ा है इतिहास

यह धार्मिक स्थल अपने गौरवशाली इतिहास के लिए जाना जाता है। इतिहास के अनुसार, वर्ष 1766 में देवी अहिल्याबाई होलकर ने अपने ससुर मल्हारराव होलकर की याद में इस मंदिर का निर्माण करवाया था, क्योंकि मल्हारराव होलकर का देहांत इसी क्षेत्र के समीप हुआ था।

निर्माण कार्य पूरा होने के पश्चात अहिल्याबाई ने यहां शिव परिवार की स्थापना की और बाद में आदिशक्ति माता की प्रतिमा भी स्थापित करवाई थी, जो आज भी क्षेत्र की आस्था का बड़ा केंद्र है।

बिना नंदी के विराजे हैं भोलेनाथ

हरिहरेश्वर मंदिर की एक खास विशेषता यह है कि यहां भगवान शिव के सामने नंदी महाराज की प्रतिमा स्थापित नहीं है। ऐसी गहरी मान्यता है कि इस मंदिर में देवाधिदेव महादेव अपने भक्तों की अरदास सीधे और बिना किसी माध्यम के सुनते हैं।

न सिर्फ सावन बल्कि नवरात्रि के पावन दिनों में भी यहां विशेष धार्मिक आयोजनों और अनुष्ठानों का सिलसिला चलता रहता है, जिसमें बड़ी संख्या में स्थानीय लोग हिस्सा लेते हैं।

अंचल के अन्य शिव धामों में भी रही खासी चहल-पहल

सोमवार के इस पावन अवसर पर भिंड अंचल के बाकी प्रमुख शिवालयों में भी आस्था का सैलाब देखने को मिला। लहार स्थित वनखण्डेश्वर महादेव मंदिर, सौंसरा के प्राचीन शिव मंदिर और रावतपुरा धाम में मौजूद 85 फीट ऊंची विशाल शिव प्रतिमा के दर्शन के लिए भी बड़ी संख्या में लोग पहुंचे।