भिंड जिले के पुलिस महकमे में उस समय खलबली मच गई जब मिहोना थाने में चालक के तौर पर तैनात आरक्षक आलोक राठौड़ की सोशल मीडिया पोस्ट सामने आई। आरक्षक ने कुछ दिन पहले लहार विधायक को चेतावनी देते हुए सोशल मीडिया पर एक पोस्ट साझा की थी, जो तेजी से वायरल हो गई।

एसपी ने लिया कड़ा एक्शन, आरक्षक निलंबित

मामला तूल पकड़ने के बाद भिंड पुलिस अधीक्षक सूरज कुमार वर्मा ने सख्त कदम उठाते हुए बुधवार शाम को आरक्षक आलोक राठौड़ को निलंबित कर दिया। हालांकि, कार्रवाई के कुछ ही घंटे बाद बुधवार रात करीब 9 बजे आरक्षक ने फिर से एक पोस्ट डाली और अपने निलंबन के पीछे लहार एसडीओपी प्रवीण त्रिपाठी का हाथ बताते हुए उन पर भ्रष्टाचार के आरोप मढ़ दिए।

पहले से मिल रही थीं अनुशासनहीनता की शिकायतें

पुलिस विभाग के अनुसार, इस आरक्षक के खिलाफ काफी समय से ड्यूटी के दौरान शराब पीने और आम नागरिकों के साथ दुर्व्यवहार करने की शिकायतें आ रही थीं। लहार विधायक अंबरीश शर्मा समेत मिहोना क्षेत्र के कई लोगों ने इसकी शिकायत वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंचाई थी, जिसके आधार पर 14 अगस्त को इसे लाइन अटैच किया गया था। लाइन अटैचमेंट से नाराज होकर ही उसने विधायक के खिलाफ आपत्तिजनक पोस्ट शेयर की थी।

एसडीओपी और टीआई ने आरोपों को बताया बेबुनियाद

आरक्षक द्वारा लगाए गए आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए लहार एसडीओपी प्रवीण त्रिपाठी ने कहा कि ये सारे आरोप निराधार हैं और सिपाही अक्सर नशे की हालत में ऐसी हरकतें करता है। एसडीओपी ने यह भी दावा किया कि आरक्षक किसी विशेष राजनीतिक दल के इशारे पर इस तरह के बयान दे रहा है।

वहीं, पोस्ट में 10 हजार रुपए के लेन-देन का स्क्रीनशॉट शेयर करने वाले लहार टीआई शिवसिंह यादव ने स्पष्ट किया कि वर्ष 2022 में लहार पदस्थापना के दौरान आरक्षक दीपक यादव ने पारिवारिक काम के लिए उनसे पैसे उधार लिए थे, जिसे बाद में फोन-पे के जरिए लौटाया गया था। टीआई ने पुराने निजी लेन-देन को गलत तरीके से पेश करने की बात कही और इस मामले में न्यायालय जाने की बात कही है।