ग्वालियर-चंबल अंचल के भिंड जिले के अंतर्गत आने वाले आलमपुर के खिरिया गांव में इन दिनों धार्मिक माहौल बना हुआ है। यहां पूर्व विधायक स्वर्गीय राघवराम चौधरी की 13वीं पुण्यतिथि के अवसर पर सवा लाख पार्थिव शिवलिंग निर्माण एवं शिवार्चन का आयोजन किया जा रहा है। आयोजन के दूसरे दिन बुधवार को इलाके के करीब दो सौ श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक भाग लेते हुए 51 हजार पार्थिव शिवलिंगों का निर्माण किया।

दंदरौआ धाम के महंत ने बताए सावन और शिव आराधना के मायने

इस धार्मिक अनुष्ठान में विशेष रूप से शामिल हुए दंदरौआ धाम के महंत रामदास महाराज ने इस अवसर पर उपस्थित श्रद्धालुओं को संबोधित किया। उन्होंने अपने प्रवचन में कहा कि सावन के पवित्र महीने में भगवान शिव की आराधना का विशेष महत्व होता है। गाय के गोबर, मिट्टी, चंदन और बेलपत्र जैसी पवित्र सामग्री से पार्थिव शिवलिंग तैयार कर उनकी पूजा-अर्चना करने से सभी प्रकार के पापों का नाश होता है। इससे भक्तों को जीवन में सुख-शांति, धन-धान्य और अंत में मोक्ष की प्राप्ति होती है।

समुद्र मंथन और महादेव के त्याग का प्रसंग

महंत रामदास महाराज ने श्रद्धालुओं को समुद्र मंथन की कथा का स्मरण कराते हुए कहा कि सावन मास का इस पौराणिक घटना से गहरा संबंध है। इसी माह के दौरान समुद्र मंथन से हलाहल विष निकला था, जिसे भगवान शिव ने स्वयं पीकर संपूर्ण संसार की रक्षा की थी। महादेव के इसी महान त्याग की स्मृति में ही भक्तगण सावन माह में व्रत रखते हैं और उनकी उपासना करते हैं। मिट्टी से पार्थिव शिवलिंग का निर्माण करना साधक की विनम्रता और भगवान के प्रति उसकी सच्ची निष्ठा का प्रतीक माना जाता है।

कार्यक्रम के निर्धारित क्रम के अनुसार, सभी उपस्थित भक्तों ने पूरे विधि-विधान और मंत्रोच्चार के साथ इन पार्थिव शिवलिंगों का अभिषेक किया। पूजन अनुष्ठान संपन्न होने के पश्चात सभी शिवलिंगों को आदर सहित सोनभद्रिका नदी में प्रवाहित कर उनका विसर्जन किया गया।

क्षेत्र के गणमान्य नागरिक रहे उपस्थित

इस अनुष्ठान के दौरान क्षेत्र के कई प्रमुख संत, राजनेता और स्थानीय नागरिक मौजूद रहे। कार्यक्रम में पं. अशोक स्वामी, रमाकांत खेमरिया, रामशरण राजौरिया, रामकुमार शास्त्री, रामजीशरण नायक, सुमित शास्त्री, पूर्व मंत्री रमाशंकर चौधरी, धीरज पटैल, रोहित मिश्रा, सत्यम खड्डर और शैलू कौरव सहित तमाम लोग शामिल होकर धर्म लाभ लिया।