स्थानीय पुलिस ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए लगभग दो दशक से फरार चल रहे एक स्थायी वारंटी को शिकंजे में ले लिया है। पुलिस रिकॉर्ड में आरोपी लंबे समय से फरार दर्ज था, लेकिन वह अपने पैतृक आवास पर ही निवास कर रहा था।
साल 2000 में दर्ज हुआ था आर्म्स एक्ट का प्रकरण
पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, यह पूरा मामला वर्ष 2000 का है। बिचपुरी निवासी प्रीतम भदौरिया पुत्र बलवीर सिंह भदौरिया के खिलाफ थाना देहात में अपराध क्रमांक 177/2000 पंजीबद्ध किया गया था। आरोपी पर अवैध हथियार रखने के आरोप में आर्म्स एक्ट की धारा 25 और 27 के तहत कार्रवाई की गई थी। अदालत द्वारा स्थायी वारंट जारी किए जाने के बाद से ही वह पुलिस की गिरफ्त से दूर था।
थाने से नौ किलोमीटर की दूरी पर काट रहा था दिन
फरार रहने के दौरान पुलिस ने उसकी तलाश में कई बार दबिश दी और मुखबिरों को भी सक्रिय किया, मगर उसका कोई सुराग नहीं मिला। आरोपी की लगातार अनुपस्थिति को देखते हुए भिंड पुलिस अधीक्षक की तरफ से उसकी गिरफ्तारी पर 10 हजार रुपए का इनाम घोषित किया गया था। चौंकाने वाली बात यह है कि पुलिस जिस व्यक्ति को पिछले 18 साल से तलाशने का दावा कर रही थी, वह थाने से महज नौ किलोमीटर की दूरी पर अपने घर में ही रह रहा था।
फाइलें खुलीं तो सामने आया सच, फोन पर दी गई हिदायत
हाल ही में थाना प्रभारी निरीक्षक शिवप्रताप सिंह राजावत ने इलाके के पुराने लंबित मामलों की फाइलों को दोबारा खंगालना शुरू किया। इसी छानबीन के दौरान प्रीतम भदौरिया का यह पुराना मामला सामने आया। पुलिस टीम ने जब नए सिरे से पड़ताल की, तो पता चला कि आरोपी आसपास ही मौजूद है।
इसके बाद पुलिस ने तकनीकी माध्यमों और फोन के जरिए उससे संपर्क साधा और उसे थाने में हाजिर होने के लिए कहा। पुलिस के बुलावे पर आरोपी अगले ही दिन स्वयं थाने पहुंच गया।
न्यायालय के आदेश पर भेजा गया जेल
थाना प्रभारी शिवप्रताप सिंह राजावत ने इस संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि 10 हजार रुपए के इनामी और 18 साल से फरार चल रहे स्थायी वारंटी प्रीतम भदौरिया को औपचारिक गिरफ्तारी के बाद अदालत में पेश किया गया। न्यायालय के निर्देशानुसार आरोपी को फिलहाल जेल भेज दिया गया है।






टिप्पणियाँ 2
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। ग्वालियर चंबल टाइम्स पर भरोसा बना रहता है।
अंचल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!