महोली गांव में तीन दिन बाद बनी सहमति
अशोकनगर जिले के चंदेरी अंतर्गत आने वाले महोली गांव में वीरांगना रानी अवंतीबाई लोधी की प्रतिमा को लेकर चल रहा गतिरोध आखिरकार समाप्त हो गया है। प्रशासन ने स्थानीय लोगों की मांग और बढ़ते विरोध को देखते हुए प्रतिमा को उसी स्थान पर दोबारा स्थापित कर दिया है, जहां से उसे हटाया गया था।
शुक्रवार सुबह सड़क पर जुटा भारी जनसैलाब
शुक्रवार सुबह से ही महोली चौराहे पर बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारियों की भीड़ जमा होनी शुरू हो गई थी। लोगों के सड़क पर उतरने से यातायात बाधित हो गया और जाम की स्थिति बन गई। कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए मौके पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया था।
इस प्रदर्शन में क्षेत्र के कई प्रमुख जनप्रतिनिधि और नेता शामिल हुए। इनमें उत्तर प्रदेश के पूर्व सांसद गंगाचरण सिंह राजपूत, पिछोर विधायक प्रीतम सिंह लोधी, चंदेरी विधायक जगन्नाथ सिंह रघुवंशी, मुंगावली विधायक बृजेंद्र सिंह यादव और भाजपा जिलाध्यक्ष आलोक तिवारी प्रमुख रूप से मौजूद रहे।
विधायकों और नेताओं की मौजूदगी में हुआ फैसला
आंदोलन के दौरान पिछोर विधायक प्रीतम सिंह लोधी ने स्पष्ट रूप से मांग उठाई थी कि रानी अवंतीबाई लोधी की प्रतिमा को उसी स्थान पर वापस लाया जाए। बढ़ते विरोध और जनप्रतिनिधियों के दबाव के चलते प्रशासन ने जनता की मांग को स्वीकार करते हुए प्रतिमा को पुनः स्थापित करने का निर्णय लिया।
प्रशासन ने आंदोलनकारियों को आश्वस्त किया कि प्रतिमा हटाने के मामले की पूरी जांच की जाएगी और इसके लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ उचित कार्रवाई की जाएगी।
10 अगस्त की रात से शुरू हुआ था पूरा घटनाक्रम
इस पूरे विवाद की शुरुआत 10 अगस्त की रात को हुई थी, जब कुछ स्थानीय लोगों ने महोली तिराहे पर वीरांगना रानी अवंतीबाई लोधी की प्रतिमा स्थापित की थी। हालांकि, जानकारी मिलते ही प्रशासनिक अमले ने कार्रवाई करते हुए प्रतिमा को वहां से जब्त कर लिया था।
प्रशासन की इस कार्रवाई के विरोध में 12 अगस्त से लगातार प्रदर्शन का दौर जारी था। आंदोलन के उग्र होने पर कुछ लोग विरोध स्वरूप मोबाइल टावर पर भी चढ़ गए थे। आखिरकार तीन दिन के संघर्ष और प्रशासनिक समझौते के बाद शुक्रवार को स्थिति सामान्य हो सकी।






टिप्पणियाँ 2
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। ग्वालियर चंबल टाइम्स पर भरोसा बना रहता है।
अंचल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!