पिपरई नगर में एक भव्य धार्मिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने हिस्सा लिया। इस दौरान संत समागम और प्रवचन का विशेष कार्यक्रम संपन्न हुआ।
मित्रता में स्वार्थ का कोई स्थान नहीं
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुनिश्री दुर्लभ सागर जी महाराज ने अपने ओजस्वी वचनों से उपस्थित जनों को मानवता और सच्चे संबंधों का पाठ पढ़ाया। उन्होंने कहा कि दोस्ती करो तो वजह मत खोजना, यदि वजह खोजी तो वह व्यापार बन जाएगा।
उन्होंने आगे स्पष्ट किया कि सच्ची मित्रता कभी भी किसी प्रकार के स्वार्थ, लाभ या भौतिक अपेक्षा के तराजू पर नहीं तौली जा सकती है। जब रिश्तों में लेन-देन की भावना आ जाती है, तब आत्मीयता खत्म हो जाती है।
व्यावहारिक लेन-देन बनकर रह जाते हैं ऐसे रिश्ते
मुनिश्री ने आज के दौर में बदलते सामाजिक संबंधों पर चिंता जताते हुए कहा कि जहाँ रिश्तों में व्यक्तिगत लाभ और हानि का हिसाब-किताब शुरू हो जाता है, वहाँ से प्रेम और पवित्रता हमेशा के लिए समाप्त हो जाती है।
ऐसे रिश्ते केवल एक व्यावहारिक सौदा या व्यापार बनकर रह जाते हैं। जीवन में संबंधों की वास्तविक सुंदरता और गहराई केवल और केवल निस्वार्थ भाव में ही निहित होती है।
प्राणियों के प्रति करुणा और सहयोग का संदेश
अपने संदेश के अंत में मुनिश्री ने बल देते हुए कहा कि प्रत्येक मनुष्य को जीवन में हर प्राणी के प्रति करुणा, प्रेम और सहयोग की भावना रखनी चाहिए।
बिना किसी स्वार्थ और बदले में कुछ पाने की अपेक्षा के किया गया जनसहयोग ही मनुष्य के जीवन को वास्तव में सार्थक और महान बनाता है।






टिप्पणियाँ 2
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। ग्वालियर चंबल टाइम्स पर भरोसा बना रहता है।
अंचल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!