अशोकनगर जिले में खाद की किल्लत और वितरण व्यवस्था की बदहाली का एक और मामला सामने आया है। यहां एक खाद वितरण केंद्र पर कतार में खड़े होने को लेकर अन्नदाताओं के बीच आपसी विवाद हो गया, जो देखते ही देखते मारपीट में तब्दील हो गया।

सुबह पांच बजे से लाइन में लग रहे थे किसान

प्राप्त जानकारी के अनुसार, डबल लॉक केंद्र पर खाद प्राप्त करने के लिए किसान सुबह करीब पांच बजे से ही जुटने लगे थे। कुछ ही समय में वहां किसानों की लंबी कतार लग गई। अत्यधिक भीड़ होने के कारण वितरण व्यवस्था चरमरा गई और लोग घंटों अपनी बारी का इंतजार करने को विवश दिखे।

पिपरी गांव के रहने वाले किसान राजेश सिंह ने अपनी परेशानी साझा करते हुए बताया कि वे अपने गांव के पांच अन्य साथियों के साथ सुबह लगभग छह बजे केंद्र पर पहुंच गए थे। उन्हें पहले एक कतार में खड़ा किया गया था, जिसे बाद में बदल दिया गया। दोपहर के करीब दो बजने के बाद भी उन्हें खाद नसीब नहीं हो पाई।

धक्का-मुक्की से बढ़ा तनाव और मारपीट

वितरण केंद्र पर उमड़ी भीड़ और लंबी लाइनों के बीच आगे लगने की होड़ में किसानों के बीच आपस में धक्का-मुक्की शुरू हो गई। यह मामूली विवाद इतना तूल पकड़ गया कि कुछ किसान आपस में उलझ पड़े और उनके बीच लात-घूंसें तक चल पड़े। इस अप्रत्याशित हंगामे से वहां भगदड़ जैसी स्थिति बन गई।

मौके पर मौजूद प्रबंधन द्वारा माइक के माध्यम से यह घोषणा की जा रही थी कि केवल सुबह से कतार में मौजूद लोगों को ही खाद दी जाएगी और बाद में आने वालों को मायूस लौटना होगा। इसके बावजूद भारी संख्या में लोग वहीं जमे रहे, जिससे हालात अनियंत्रित बने रहे।

निजी दुकानों पर महंगे दामों से बचने की मजबूरी

किसानों के बीच इस बात की भी चर्चा आम थी कि खुले बाजार और निजी विक्रेताओं के यहां तयशुदा दरों से अधिक दाम पर खाद बेची जा रही है। यही मुख्य वजह है कि स्थानीय किसान सरकारी डबल लॉक केंद्र पर ही खाद पाना सुरक्षित और किफायती समझकर भारी संख्या में पहुंच रहे हैं।