अशोकनगर जिले के भौरा काछी गांव के अमाही तालाब किनारे स्थित बस्ती के रहवासी बिजली की समस्या से लंबे समय से जूझ रहे हैं। अपनी इसी परेशानी का समाधान कराने के लिए मंगलवार को बड़ी संख्या में ग्रामीण पुरुष, महिलाएं और बच्चे कलेक्ट्रेट पहुंचे और जिला प्रशासन के सामने अपनी बात रखी। ग्रामीणों ने बस्ती में जल्द से जल्द नया ट्रांसफार्मर लगवाने की मांग की है।
ढाई दशक से अंधेरे में गुजर रही है रातें
स्थानीय निवासियों ने बताया कि बस्ती में करीब 25 से 30 मकान बने हुए हैं, जिनमें लगभग 100 लोग निवास करते हैं। पिछले कई महीनों से उन्हें रात के वक्त बिजली नहीं मिल रही है। दिन के समय केवल पंप लाइन के जरिए कुछ ही घंटों बिजली आती है, लेकिन घरेलू उपयोग के लिए कोई नियमित आपूर्ति नहीं है। रात होते ही पूरा इलाका अंधेरे में डूब जाता है।
15 साल पहले हटाया गया था ट्रांसफार्मर
ग्रामीणों के अनुसार, उनकी इस बस्ती में करीब 15 वर्ष पूर्व सरकारी ट्रांसफार्मर स्थापित किया गया था। जिसे बाद में मेंटेनेंस के नाम पर हटा लिया गया था, लेकिन इसके पश्चात दोबारा ट्रांसफार्मर नहीं लगाया गया। मजबूरन लोग खेतों में लगे अन्य ट्रांसफार्मरों से तार डालकर किसी तरह काम चला रहे थे, जो अब बंद हो चुका है।
पिछले छह महीनों से हालात और भी बदतर हो गए हैं क्योंकि केवल दिन में ही पंप लाइन के जरिए बिजली मिल पा रही है। अंधेरे के कारण बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है, वहीं बुजुर्गों और बच्चों को मच्छरों तथा जहरीले जीव-जंतुओं के भय के साये में रहना पड़ रहा है।
बिना डीपी के आ रहे बिजली के बिल
प्रदर्शन कर रहे ग्रामीणों ने बिजली विभाग की कार्यप्रणाली पर गहरा रोष जताया। उनका आरोप है कि बस्ती में ट्रांसफार्मर या डीपी लगी ही नहीं है, इसके बावजूद उनके घरों पर नियमित रूप से बिजली के बिल भेजे जा रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि बस्ती तक बिजली के तार भी पहुंचे हुए हैं और डीपी रखने के लिए पोल व ढांचा भी तैयार है, केवल ट्रांसफार्मर रखा जाना शेष है।
ग्रामीणों ने अधिकारियों को स्पष्ट रूप से आश्वस्त किया है कि यदि उनकी बस्ती में नया ट्रांसफार्मर स्थापित कर दिया जाए, तो वे पूरी ईमानदारी से अपने बिजली के बिलों का भुगतान करेंगे।






टिप्पणियाँ 2
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। ग्वालियर चंबल टाइम्स पर भरोसा बना रहता है।
अंचल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!