ग्रामीण अंचल में शिक्षा व्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए शासन स्तर पर तमाम दावे किए जाते हैं, किंतु मैदानी स्तर पर इनकी पोल खुलती नजर आ रही है। नगर मुख्यालय से लगभग दो किलोमीटर की दूरी पर स्थित ग्राम महुआखेड़ी के प्राथमिक विद्यालय का एक ऐसा ही हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जहां व्यवस्थाओं की स्थिति काफी दयनीय मिली।

सुबह साढ़े ग्यारह बजे स्कूल परिसर में पसरा मिला सन्नाटा

सोमवार को सुबह करीब साढ़े ग्यारह बजे जब विद्यालय परिसर की पड़ताल की गई, तो वहां पूरी तरह से सन्नाटा छाया हुआ था। स्कूल में कुल 18 बच्चों का नामांकन दर्ज है, लेकिन उस समय एक भी छात्र कक्षा में उपस्थित नहीं था। परिसर में केवल जिम्मेदार शिक्षक ही मौजूद मिले।

मौके पर मिले दो शिक्षक, शून्य उपस्थिति पर दिया अजीब तर्क

जांच के दौरान स्कूल में प्रधानाध्यापक मनमोहन अहिरवार सहित दो शिक्षक उपस्थित पाए गए। जब उनसे स्कूल में बच्चों की संख्या शून्य होने के बारे में सवाल किया गया, तो उन्होंने सहजता से जवाब देते हुए कहा कि उनके यहां विद्यार्थियों की संख्या वैसे भी कम रहती है और कांवड़ यात्रा होने की वजह से आज कोई भी बच्चा विद्यालय नहीं पहुंच पाया है।

शिक्षिका के न होने के बावजूद रजिस्टर में मिले दस्तखत

निरीक्षण के दौरान सबसे बड़ा और चौंकाने वाला वाकया उपस्थिति रजिस्टर की जांच में सामने आया। विद्यालय में पदस्थ तीसरी शिक्षिका माया देवी राय मौके पर मौजूद नहीं थीं, इसके बावजूद रजिस्टर में उनकी उपस्थिति दर्ज थी और पहले से ही हस्ताक्षर भी किए जा चुके थे।

जब प्रधानाध्यापक से इस फर्जीवाड़े के बारे में पूछा गया कि बिना स्कूल आए शिक्षिका के हस्ताक्षर कैसे हो गए, तो वे कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे पाए और असमंजस में पड़ते हुए बोले कि शिक्षिका कब हस्ताक्षर कर गईं, इस बारे में उन्हें कोई जानकारी नहीं है।

शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने दिए सख्त कार्रवाई के निर्देश

शिक्षिका माया देवी राय पूर्व से ही अनुपस्थित चल रही हैं, जिन पर पहले भी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा चुकी है। इस पूरे प्रकरण की जांच कराई जाएगी और शिक्षिका पर नियमानुसार सख्त कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। साथ ही, फर्जी तरीके से ऑफलाइन हाजिरी दर्ज किए जाने के मामले में प्रधानाध्यापक से भी स्पष्टीकरण तलब किया जाएगा। - श्याम बिहारी शर्मा, बीईओ, मुंगावली