ऐतिहासिक नगरी चंदेरी में रक्षाबंधन के पावन पर्व को लेकर बाजारों में रौनक तो बढ़ गई है, लेकिन इस बार खरीदारी का मिजाज काफी बदला हुआ नजर आ रहा है। बढ़ती महंगाई का असर हर वर्ग की जेब पर पड़ रहा है, जिसका सीधा प्रभाव स्थानीय बाजारों और सर्राफा दुकानों के कारोबार पर देखने को मिल रहा है।

चांदी के ऊंचे दामों से सर्राफा बाजार में छाई मायूसी

स्थानीय सराफा व्यापारियों सौरभ सोनी और संतोष सोनी ने जानकारी दी कि मौजूदा समय में चांदी के भाव बढ़कर करीब 2.46 लाख रुपए प्रति किलोग्राम के स्तर पर पहुंच गए हैं। कीमतों में आए इस भारी उछाल के कारण इस बार चांदी की राखियों का बजट पूरी तरह गड़बड़ा गया है। पिछले साल जो फैंसी चांदी की राखियां 200 से 300 रुपए में आसानी से मिल जाती थीं, वे अब वजन और बारीक नक्काशी के चलते 700 से 1000 रुपए तक बिक रही हैं। दाम अधिक होने के कारण कई ग्राहक बिना खरीदारी किए ही लौटने को मजबूर हैं, जिससे सराफा दुकानों पर ग्राहकों की आवाजाही कम हो गई है।

बाजार में हैंडमेड और कार्टून राखियों की धूम

एक तरफ जहां सर्राफा बाजार सुस्त है, वहीं शहर के मुख्य मार्गों जैसे डोलिया गेट, दिल्ली दरवाजा, सदर बाजार, जनपद चौक और शनिचरा बाजार में सजी दुकानों पर रौनक बनी हुई है। दुकानदारों राकेश कोली, भूपेंद्र, शिव साहू और मनीष जोशी ने बताया कि इस बार ग्राहकों की मांग को देखते हुए नागपुर, भोपाल, इंदौर, दिल्ली और बैतूल से विशेष डिजाइन की राखियां मंगवाई गई हैं। बाजार में 5 रुपए से लेकर 200 रुपए तक की आकर्षक हैंडमेड राखियां उपलब्ध हैं।

बच्चों की पसंद बने कार्टून कैरेक्टर और बढ़ गई लागत

विक्रेताओं के अनुसार रंगीन धागों, मोतियों और धार्मिक प्रतीकों से सजी हाथ की बनी राखियां बहनों को खूब भा रही हैं। इसके अलावा छोटे बच्चों के लिए डोरेमोन और छोटा भीम जैसे कार्टून कैरेक्टर वाली राखियां भी आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं। हालांकि धागे, मोती, मजदूरी और परिवहन खर्च बढ़ने से हैंडमेड राखियों के दाम भी 20 से 25 प्रतिशत तक महंगे हुए हैं, जो पिछले साल 15-20 रुपए में मिलती थीं वे अब 25-30 रुपए तक बिक रही हैं। इसके बावजूद चांदी के मुकाबले बेहद सस्ती होने के कारण लोग इन्हें जमकर खरीद रहे हैं और साथ ही भाइयों के लिए सूती रुमाल तथा टॉवल की भी खरीदारी हो रही है।