अशोकनगर जिले के मुंगावली न्यायालय ने न्याय का एक लंबा सफर तय करते हुए 17 साल पुराने हत्या और लूट से जुड़े एक सनसनीखेज मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। अदालत ने इस मामले में दोष सिद्ध होने पर आरोपी को उम्रकैद की सजा से दंडित किया है। खास बात यह है कि यह आरोपी वारदात के बाद से ही लंबे समय तक कानून की पकड़ से दूर रहा था।

क्या था 2009 का पूरा मामला

यह पूरी घटना 14 मार्च 2009 की है, जब मुंगावली थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले तारई चक्क स्थित पिपरई रोड घाटी पुलिया के समीप एक व्यापारी को निशाना बनाया गया था। यहां अज्ञात बदमाशों ने कारोबारी सुधीर सर्राफ की गोली मारकर निर्मम हत्या कर दी थी। अपराधियों का मकसद केवल कत्ल करना नहीं था, बल्कि वे उनके पास मौजूद नकदी से भरा बैग भी लूटकर फरार हो गए थे।

घटना की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय पुलिस ने तुरंत हरकत में आते हुए अज्ञात हमलावरों के खिलाफ हत्या, लूट और आर्म्स एक्ट के तहत गंभीर धाराओं में प्रकरण दर्ज किया था। इसके बाद मामले की तफ्तीश शुरू की गई और सबूत जुटाए गए।

मार्च 2024 में पुलिस के हत्थे चढ़ा था आरोपी

इस वारदात को अंजाम देने के बाद शिवपुरी जिले के पिछोर थाना क्षेत्र के ग्राम गढ़रौली निवासी रामपाल पुत्र ओमनरेश भदौरिया पुलिस की गिरफ्त से बचकर भूमिगत हो गया था। पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक वह लगभग 15 साल तक फरार रहा। न्यायालय द्वारा उसके नाम स्थायी वारंट जारी किया गया था, जिसके आधार पर पुलिस ने घेराबंदी कर उसे 19 मार्च 2024 को धर दबोचा और अदालत में पेश किया था।

अदालत ने सुनाई अलग-अलग धाराओं में सजा

गिरफ्तारी के बाद अदालत में चली लंबी सुनवाई के दौरान पेश किए गए सबूतों और गवाहों के आधार पर न्यायाधीश ने फैसला सुनाया। मुख्य आरोपी रामपाल को हत्या के जुर्म में उसके शेष प्राकृतिक जीवनकाल तक आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है और उस पर पांच हजार रुपये का आर्थिक जुर्माना भी लगाया गया है।

इसके अतिरिक्त, लूट के मामले में उसे 10 वर्ष का सश्रम कारावास और दो हजार रुपये जुर्माने की सजा दी गई है। वहीं, आर्म्स एक्ट के तहत दर्ज तीन अलग-अलग प्रकरणों में भी उसे तीन-तीन साल के सश्रम कारावास और जुर्माने से दंडित किया गया है।