Story detailsHeadline, summary, section, and byline.HeadlineSummaryशिवपुरी जिले के प्राचीन नरवर किले से साढ़े तीन टन वजनी तोप चोरी होने के मामले में एक महीना पूरा हो चुका है। जांच के दौरान सामने आया है कि किले में दर्ज नंबरिंग के मुकाबले कई ऐतिहासिक तोपें गायब हैं।Categoryदुर्घटनाराजनीतिसमस्या/problemस्थानीयअपराधशिक्षाखेलमनोरंजनव्यापारस्थानीयDistrictNo districtग्वालियरदेशमुरैनाभिंडश्योपुरदतियाशिवपुरीगुनाअशोकनगरAuthorEditorial deskMushtaq Ahmad Khan - Editor In Chiefiuyiuhकृषि डेस्क - कृषि संवाददाताक्राइम डेस्क - अपराध संवाददाताधर्म डेस्क - धर्म संपादकपर्यटन डेस्क - पर्यटन संवाददाताराजनीति डेस्क - राजनीतिक विश्लेषकव्यापार डेस्क - व्यापार संवाददाताशिक्षा डेस्क - शिक्षा संवाददातासंपादकीय डेस्क - वरिष्ठ संपादकसांस्कृतिक डेस्क - सांस्कृतिक संपादकस्पोर्ट्स डेस्क - खेल संवाददाताPublish timeStory URLURL slug/article/shivpuri-story-b76ecc51
StoryWrite in reading order. Add images exactly where they should appear. Text block Image block01Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteशिवपुरी जिले के ऐतिहासिक नरवर किले की कचहरी से साढ़े तीन टन वजनी तोप चोरी हुए एक महीना बीत चुका है। इस हाई-प्रोफाइल मामले में पुलिस की जांच के तार राजस्थान तक जुड़ चुके हैं। कार्रवाई के दौरान पुलिस ने दो संदिग्धों को गिरफ्तार किया है, जिनसे पूछताछ की जा रही है और वारदात में इस्तेमाल किया गया वाहन भी जब्त किया गया है। Add text below Add image below02Heading Paragraph Heading Subheading Quoteकचहरी परिसर में कम मिलीं तोपें, नंबरिंग और गिनती में बड़ा अंतर Add text below Add image below03Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteघटनास्थल का जायजा लेने पर यह बात सामने आई कि मामला सिर्फ एक तोप चोरी होने तक सीमित नहीं है। किले की कचहरी परिसर में तोपों की नंबरिंग 26 तक दर्ज है, लेकिन वर्तमान में वहां केवल 13 तोपें ही मौजूद हैं। इसके अलावा वर्ष 2011 में चोरी हुई और बाद में बरामद की गई एक तोप फिलहाल नरवर थाने में सुरक्षित रखी हुई है। Add text below Add image below04Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteइस हिसाब से कुल 15 तोपों का ही पता चल पा रहा है, जबकि कागजों और नंबरिंग के अनुसार बाकी तोपों का कोई अता-पता नहीं है। वर्ष 2007 में भी एक तोप चोरी होने की बात सामने आई थी, जिसका स्पष्ट रिकॉर्ड नहीं मिलता है। ऐसे में यह सवाल खड़ा होता है कि वर्षों से गायब अन्य ऐतिहासिक तोपें आखिरकार कहां गईं। Add text below Add image below05Heading Paragraph Heading Subheading Quoteशोधकर्ताओं के आंकड़ों और इतिहास में विरोधाभास Add text below Add image below06Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteनरवर किले पर शोध करने वाले डॉ. मनोज माहेश्वरी ने वर्ष 1998 में अपनी पीएचडी के दौरान करीब 1985 में किले का मुआयना किया था। उनके मुताबिक उस समय उन्होंने किले में 18 तोपें देखी थीं, जो बाद के दस्तावेजीकरण में घटकर 14 रह गईं। वहीं, स्थानीय इतिहास के जानकार बसर अली का कहना है कि राजा-महाराजाओं के शासनकाल में यहां करीब 26 तोपें मौजूद रही होंगी। Add text below Add image below07Heading Paragraph Heading Subheading Quoteलोह अयस्क और प्राचीन तोप निर्माण का केंद्र रहा है नरवर Add text below Add image below08Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteइतिहासकारों के अनुसार नरवर के आसपास के क्षेत्रों जैसे मगरौनी, करई और सीहोर में प्रचुर मात्रा में लोह अयस्क उपलब्ध था। इसी वजह से मुगल काल से लेकर सिंधिया रियासत के समय तक यहां तोपों के निर्माण का कार्य किया जाता था। यहां बनने वाली तोपें तत्कालीन समय में जयपुर और ग्वालियर तक आपूर्ति की जाती थीं। Add text below Add image below09Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteफिलहाल पुलिस गिरफ्तार किए गए संदिग्धों से पूछताछ के जरिए चोरी हुई भारी-भरकम तोप और इस गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश में जुटी हुई है। इस घटना के बाद पुरातत्व संपदा की सुरक्षा और उनके संपूर्ण दस्तावेजी ऑडिट की मांग भी जोर पकड़ने लगी है। Add text below Add image below