Story detailsHeadline, summary, section, and byline.HeadlineSummaryशिवपुरी जिले के नरवर कस्बे में रविवार रात एक दुर्लभ पैंगोलिन घर के अंदर आ गया। सूचना मिलने पर सर्पमित्र और वन विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर उसे सुरक्षित रेस्क्यू किया और जंगल में छोड़ दिया।Categoryदुर्घटनाराजनीतिसमस्या/problemस्थानीयअपराधशिक्षाखेलमनोरंजनव्यापारस्थानीयDistrictNo districtग्वालियरदेशमुरैनाभिंडश्योपुरदतियाशिवपुरीगुनाअशोकनगरAuthorEditorial deskMushtaq Ahmad Khan - Editor In Chiefiuyiuhकृषि डेस्क - कृषि संवाददाताक्राइम डेस्क - अपराध संवाददाताधर्म डेस्क - धर्म संपादकपर्यटन डेस्क - पर्यटन संवाददाताराजनीति डेस्क - राजनीतिक विश्लेषकव्यापार डेस्क - व्यापार संवाददाताशिक्षा डेस्क - शिक्षा संवाददातासंपादकीय डेस्क - वरिष्ठ संपादकसांस्कृतिक डेस्क - सांस्कृतिक संपादकस्पोर्ट्स डेस्क - खेल संवाददाताPublish timeStory URLURL slug/article/shivpuri-story-9c437e2a
StoryWrite in reading order. Add images exactly where they should appear. Text block Image block01Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteशिवपुरी जिले के अंतर्गत आने वाले नरवर कस्बे के कोटिया मोहल्ले में उस वक्त हलचल मच गई, जब एक दुर्लभ वन्यजीव पैंगोलिन अचानक एक घर के अंदर जा घुसा। यह घटना रविवार रात करीब 10 बजे की है, जिससे स्थानीय रहवासियों में थोड़ी देर के लिए असमंजस की स्थिति बन गई। Add text below Add image below02Heading Paragraph Heading Subheading Quoteसर्पमित्र और वन विभाग की त्वरित कार्रवाई Add text below Add image below03Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteघर में अजीबोगरीब जीव के घुसने की सूचना तुरंत स्थानीय सर्पमित्र सलमान पठान और वन विभाग को दी गई। जानकारी मिलते ही प्रशासनिक और बचाव दल तत्काल मौके पर पहुंचा। टीम ने सूझबूझ दिखाते हुए पैंगोलिन को बिना कोई नुकसान पहुंचाए सुरक्षित अपने कब्जे में ले लिया। Add text below Add image below04Heading Paragraph Heading Subheading Quoteखतरा भांपते ही गेंद की तरह गोल हो जाता है 'चींटीखोर' Add text below Add image below05Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteमौके पर मौजूद सर्पमित्र सलमान पठान ने बताया कि इस जीव को स्थानीय भाषा में 'चींटीखोर' भी कहा जाता है। इसके शरीर पर कड़े और धारदार शल्क होते हैं, जो इसकी रक्षा करते हैं। खास बात यह है कि किसी भी प्रकार का खतरा महसूस होते ही यह पैंगोलिन अपने शरीर को एक गेंद के आकार में पूरी तरह सिकोड़ लेता है। भारतीय पैंगोलिन मुख्य रूप से निशाचर होते हैं यानी रात में सक्रिय रहते हैं और इनका मुख्य आहार चींटियां तथा दीमक होते हैं। Add text below Add image below06Heading Paragraph Heading Subheading Quoteसंरक्षित श्रेणी का दुर्लभ वन्यजीव है पैंगोलिन Add text below Add image below07Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteविशेषज्ञों के अनुसार पैंगोलिन एक बेहद दुर्लभ और वन्यजीव संरक्षण कानूनों के तहत संरक्षित प्राणी है। दुनिया के कई हिस्सों में इसके शल्कों और अन्य अंगों की अवैध तस्करी के चलते इस प्रजाति का अस्तित्व खतरे में है, जो पर्यावरणविदों के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। Add text below Add image below08Heading Paragraph Heading Subheading Quoteग्रामीणों और रहवासियों से की गई अपील Add text below Add image below09Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteघटनास्थल पर पैंगोलिन को देखने के लिए स्थानीय लोगों की खासी भीड़ जमा हो गई थी। रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान सर्पमित्र और वन कर्मियों ने जनता से अपील की कि वे ऐसे बेजुबान और वन्य जीवों को किसी भी प्रकार की हानि न पहुंचाएं। अधिकारियों ने हिदायत दी कि यदि आबादी वाले क्षेत्र में कोई भी जंगली जानवर दिखाई दे, तो आम नागरिक खुद उसे पकड़ने का प्रयास न करें, बल्कि तुरंत वन विभाग या प्रशिक्षित रेस्क्यू टीम को इसकी सूचना दें। अंत में पकड़े गए पैंगोलिन को प्राकृतिक वास के अनुकूल सुरक्षित जंगल में छोड़ दिया गया। Add text below Add image below