Story detailsHeadline, summary, section, and byline.HeadlineSummaryशिवपुरी के झांसी तिराहा स्थित बहुमूल्य गांधी पेट्रोल पंप की जमीन खाली कराने के मामले में नगर पालिका अध्यक्ष ने प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने सीएमओ पर जानबूझकर विलंब करने और पालिका को वित्तीय क्षति पहुंचाने का दावा किया है।Categoryदुर्घटनाराजनीतिसमस्या/problemस्थानीयअपराधशिक्षाखेलमनोरंजनव्यापारस्थानीयDistrictNo districtग्वालियरदेशमुरैनाभिंडश्योपुरदतियाशिवपुरीगुनाअशोकनगरAuthorEditorial deskMushtaq Ahmad Khan - Editor In Chiefiuyiuhकृषि डेस्क - कृषि संवाददाताक्राइम डेस्क - अपराध संवाददाताधर्म डेस्क - धर्म संपादकपर्यटन डेस्क - पर्यटन संवाददाताराजनीति डेस्क - राजनीतिक विश्लेषकव्यापार डेस्क - व्यापार संवाददाताशिक्षा डेस्क - शिक्षा संवाददातासंपादकीय डेस्क - वरिष्ठ संपादकसांस्कृतिक डेस्क - सांस्कृतिक संपादकस्पोर्ट्स डेस्क - खेल संवाददाताPublish timeStory URLURL slug/article/shivpuri-story-9737ddf6
StoryWrite in reading order. Add images exactly where they should appear. Text block Image block01Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteशिवपुरी शहर के व्यस्त झांसी तिराहे पर स्थित गांधी पेट्रोल पंप और नगर पालिका के बीच भूमि स्वामित्व को लेकर चल रहा पुराना विवाद एक बार फिर गरमा गया है। उच्च न्यायालय से मुकदमा जीतने के बावजूद निर्धारित समय सीमा में जमीन खाली न कराए जाने पर स्थानीय राजनीति और प्रशासनिक गलियारों में सुगबुगाहट तेज हो गई है। Add text below Add image below02Heading Paragraph Heading Subheading Quoteक्या है 1960 की लीज और कानूनी लड़ाई का इतिहास Add text below Add image below03Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteइस विवाद की शुरुआत वर्ष 1960 में हुई थी, जब नगर पालिका ने मैसर्स जय भारत ऑटोमोबाइल्स के पक्ष में झांसी तिराहे के पास की इस जमीन की 25 साल की लीज तय की थी। उस समय इसके लिए 4472 रुपये प्रीमियम और 279.50 रुपये सालाना किराया तय किया गया था। इसी स्थल पर बाद में पेट्रोल पंप स्थापित किया गया, जिसका संचालन वर्तमान में समीर गांधी द्वारा किया जा रहा है। लीज की मियाद पूरी होने और उसका नवीनीकरण न कराए जाने के बावजूद इस बेशकीमती जमीन पर कब्जा बरकरार रहा, जिसके बाद नगर पालिका ने कानूनी रास्ता अपनाया। Add text below Add image below04Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteपिछले महीने उच्च न्यायालय का फैसला नगर पालिका के पक्ष में आने के बाद कार्रवाई की उम्मीद जगी थी। इसके तहत नगर पालिका द्वारा गत 22 सितंबर को एक अंतिम नोटिस जारी किया गया था। इस नोटिस में 10 दिन के भीतर यानी 2 अक्टूबर तक जमीन खाली करके पालिका को सौंपने के सख्त निर्देश दिए गए थे। साथ ही तय अवधि में कब्जा नहीं हटाने पर बलपूर्वक बेदखली और हर्जाना वसूलने की चेतावनी भी दी गई थी, मगर डेडलाइन गुजर जाने के बाद भी जमीन खाली नहीं कराई जा सकी। Add text below Add image below05Heading Paragraph Heading Subheading Quoteनपा अध्यक्ष ने सीएमओ पर लगाए गंभीर आरोप Add text below Add image below06Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteमामले को लेकर नगर पालिका अध्यक्ष गायत्री शर्मा ने प्रेसवार्ता कर मुख्य नगर पालिका अधिकारी (सीएमओ) यशवंत राठौड़ की भूमिका पर कड़े सवाल उठाए हैं। उन्होंने सीधे तौर पर सीएमओ पर पेट्रोल पंप संचालक से मिलीभगत होने और नगर पालिका के राजस्व को नुकसान पहुंचाने का आरोप मढ़ा है। अध्यक्ष का कहना है कि कौड़ियों के भाव लीज पर दी गई इस भूमि की आज बाजार में कीमत करोड़ों रुपये में आंकी जा रही है। Add text below Add image below07Quote Paragraph Heading Subheading Quoteअध्यक्ष गायत्री शर्मा ने दावा किया कि यदि किराए और कानूनी खर्च समेत पूरा हिसाब लगाया जाए, तो नगर पालिका को करीब 2 करोड़ रुपये मिल सकते हैं, जिससे संस्था की आर्थिक स्थिति मजबूत होती। Add text below Add image below08Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteअध्यक्ष ने यह भी आरोप लगाया कि उन्होंने इस विषय में सीएमओ से पत्राचार करने का प्रयास किया, लेकिन उनके द्वारा फोन तक रिसीव नहीं किया जा रहा है। उनका तर्क है कि जानबूझकर देरी की जा रही है ताकि संचालक को सर्वोच्च न्यायालय से स्थगन आदेश प्राप्त करने का अवसर मिल सके। उन्होंने जोर देकर कहा कि यदि प्रशासन चाहे तो 5 अक्टूबर तक हर हाल में जमीन का आधिपत्य वापस लिया जा सकता है। Add text below Add image below09Heading Paragraph Heading Subheading Quoteपेट्रोल पंप संचालक का पक्ष और आगे की कानूनी स्थिति Add text below Add image below10Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteनपा अध्यक्ष के इन तमाम आरोपों के संबंध में जब सीएमओ यशवंत राठौड़ से उनका पक्ष जानने के लिए संपर्क किया गया, तो उनकी ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिल सकी। वहीं दूसरी तरफ, पेट्रोल पंप संचालक समीर गांधी ने स्पष्ट किया है कि यह कानूनी मामला अब सर्वोच्च न्यायालय के विचाराधीन पहुंच चुका है। Add text below Add image below11Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteसंचालक समीर गांधी ने जानकारी दी कि नगर पालिका की ओर से इस प्रकरण में पूर्व में ही केविएट दाखिल की जा चुकी है और मामले की अगली सुनवाई आगामी 6 अक्टूबर को नियत है। उनका कहना है कि चूंकि मामला शीर्ष अदालत में पहुंच चुका है, इसलिए सभी संबंधित पक्षों को कानून की मर्यादा के भीतर रहकर ही आगे की प्रक्रिया पूरी करनी चाहिए। Add text below Add image below