Story detailsHeadline, summary, section, and byline.HeadlineSummaryमध्यप्रदेश उच्च न्यायालय की ग्वालियर खंडपीठ ने शिवपुरी के विजयाराजे सिंधिया मेडिकल कॉलेज में एक सहायक प्राध्यापक की नियुक्ति को नियमों के विपरीत मानते हुए खारिज कर दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि चयन के दौरान अनिवार्य अनुभव और अहर्ताओं को पूरा नहीं किया गया था।Categoryदुर्घटनाराजनीतिसमस्या/problemस्थानीयअपराधशिक्षाखेलमनोरंजनव्यापारस्थानीयDistrictNo districtग्वालियरदेशमुरैनाभिंडश्योपुरदतियाशिवपुरीगुनाअशोकनगरAuthorEditorial deskMushtaq Ahmad Khan - Editor In Chiefiuyiuhकृषि डेस्क - कृषि संवाददाताक्राइम डेस्क - अपराध संवाददाताधर्म डेस्क - धर्म संपादकपर्यटन डेस्क - पर्यटन संवाददाताराजनीति डेस्क - राजनीतिक विश्लेषकव्यापार डेस्क - व्यापार संवाददाताशिक्षा डेस्क - शिक्षा संवाददातासंपादकीय डेस्क - वरिष्ठ संपादकसांस्कृतिक डेस्क - सांस्कृतिक संपादकस्पोर्ट्स डेस्क - खेल संवाददाताPublish timeStory URLURL slug/article/shivpuri-story-0ff0af2d
StoryWrite in reading order. Add images exactly where they should appear. Text block Image block01Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteग्वालियर-चंबल अंचल के शिवपुरी जिले स्थित विजयाराजे सिंधिया मेडिकल कॉलेज में पदस्थ सामुदायिक औषधि विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ. छत्रपाल प्रजापति की नियुक्ति को मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने अवैध करार देते हुए निरस्त कर दिया है। अदालत ने अपने फैसले में माना है कि इस पद पर नियुक्ति के समय तय किए गए सेवा नियमों, योग्यताओं और अनुभव संबंधी मानकों की अनदेखी की गई थी। Add text below Add image below02Heading Paragraph Heading Subheading Quoteवर्ष 2023 में दायर की गई थी याचिका Add text below Add image below03Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteयह पूरा कानूनी विवाद कॉलेज में ही कार्यरत डॉ. मानबहादुर राजपूत की तरफ से साल 2023 में दायर की गई एक रिट याचिका के माध्यम से सामने आया था। याचिका में मुख्य रूप से यह चुनौती दी गई थी कि डॉ. प्रजापति का चयन और नियुक्ति पूरी तरह से निर्धारित प्रावधानों के विरुद्ध हुई है, क्योंकि उनके पास पद के लिए जरूरी अहर्ताएं उस समय नहीं थीं। Add text below Add image below04Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteयाचिकाकर्ता की ओर से नेशनल मेडिकल कमीशन (पूर्ववर्ती एमसीआई) के दिशा-निर्देशों का हवाला दिया गया था। इसके तहत सामुदायिक औषधि विभाग में सहायक प्राध्यापक के लिए एमडी या एमएस की डिग्री के साथ-साथ तीन साल की जूनियर रेजिडेंसी और एक साल की सीनियर रेजिडेंसी का तजुर्बा अनिवार्य होता है। Add text below Add image below05Heading Paragraph Heading Subheading Quoteअनुभव और डिग्री की तिथियों में मिला अंतर Add text below Add image below06Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteन्यायालय में पेश किए गए दस्तावेजों के अनुसार, डॉ. प्रजापति ने जून 2018 में अपनी एमडी की परीक्षा उत्तीर्ण की थी, जबकि उनकी नियुक्ति का आदेश 20 अगस्त 2017 का दिखाया गया था। याचिकाकर्ता ने दलील दी कि चयन के वक्त उनके पास अपेक्षित तीन वर्ष का अनुभव भी नहीं था और अन्य प्रशासनिक नियमों का भी उल्लंघन किया गया था। Add text below Add image below07Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteदोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट की डबल बेंच ने इस नियुक्ति को पूरी तरह खारिज कर दिया। अदालत ने डॉ. छत्रपाल प्रजापति को तत्काल प्रभाव से अपने पद से हटने और कामकाज बंद करने के स्पष्ट निर्देश दिए हैं। Add text below Add image below08Heading Paragraph Heading Subheading Quoteकॉलेज प्रबंधन और याचिकाकर्ता की प्रतिक्रिया Add text below Add image below09Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteशिवपुरी मेडिकल कॉलेज के अधीक्षक आशुतोष चौऋषी ने इस संबंध में बताया कि मामला उच्च न्यायालय में विचाराधीन था, हालांकि अभी तक कॉलेज प्रबंधन को आदेश की आधिकारिक और वैधानिक प्रति प्राप्त नहीं हुई है। प्रति मिलते ही अदालत के निर्देशों का पूरी तरह से पालन सुनिश्चित किया जाएगा। Add text below Add image below10Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteवहीं दूसरी ओर, याचिकाकर्ता डॉ. मानबहादुर राजपूत ने फैसले पर संतोष जताते हुए कहा कि यह सांठगांठ और नियमों को ताक पर रखकर की गई नियुक्तियों के खिलाफ एक बड़ा फैसला है। उन्होंने कहा कि लंबी कानूनी लड़ाई के बाद आखिरकार सच्चाई की जीत हुई है और अदालत ने न्याय किया है। Add text below Add image below