Story detailsHeadline, summary, section, and byline.HeadlineSummaryश्योपुर जिले में जीवनयापन के लिए आवंटित सरकारी पट्टे की बेशकीमती जमीनों को बेचने का मामला सामने आया है। कागजों में बंजर और असंचित बताई गई इन जमीनों पर मौके पर धान की फसल लहलहाती मिली है।Categoryदुर्घटनाराजनीतिसमस्या/problemस्थानीयअपराधशिक्षाखेलमनोरंजनव्यापारस्थानीयDistrictNo districtग्वालियरदेशमुरैनाभिंडश्योपुरदतियाशिवपुरीगुनाअशोकनगरAuthorEditorial deskMushtaq Ahmad Khan - Editor In Chiefiuyiuhकृषि डेस्क - कृषि संवाददाताक्राइम डेस्क - अपराध संवाददाताधर्म डेस्क - धर्म संपादकपर्यटन डेस्क - पर्यटन संवाददाताराजनीति डेस्क - राजनीतिक विश्लेषकव्यापार डेस्क - व्यापार संवाददाताशिक्षा डेस्क - शिक्षा संवाददातासंपादकीय डेस्क - वरिष्ठ संपादकसांस्कृतिक डेस्क - सांस्कृतिक संपादकस्पोर्ट्स डेस्क - खेल संवाददाताPublish timeStory URLURL slug/article/sheopur-story-c6cd9012
StoryWrite in reading order. Add images exactly where they should appear. Text block Image block01Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteश्योपुर जिले में प्रशासनिक व्यवस्था की एक बड़ी गड़बड़ी सामने आई है, जहां जीवनयापन के लिए बांटी गई सरकारी पट्टे की जमीनों को बेचने के नाम पर करोड़ों रुपये का फर्जीवाड़ा किया गया है। कलेक्टोरेट के पास और मुख्य हाईवे से सटी चार बेशकीमती जमीनों के सौदे को लेकर राजस्व महकमे में हड़कंप मचा हुआ है। इन जमीनों को बेचने के लिए स्थानीय स्तर पर रोक लगाई गई थी, लेकिन उच्च स्तर से अनुमति मिलने के बाद इनकी रजिस्ट्रियां भी पूरी कर ली गईं। Add text below Add image below02Heading Paragraph Heading Subheading Quoteकागजों में बंजर और मौके पर लहलहाती धान की फसल Add text below Add image below03Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteपड़ताल में इस बात का खुलासा हुआ है कि जिन जमीनों को सरकारी दस्तावेजों में 'असिंचित और कमजोर पैदावार' वाली बताकर बेचने की मजबूरी दिखाई गई थी, असलियत में वहां मौके पर धान की फसल खड़ी हुई है। बाजार में चार करोड़ रुपये से अधिक की कीमत वाली इन जमीनों का सौदा कागजों में बेहद कम दामों में तय कर दिया गया। पट्टाधारकों और खरीदारों ने मिलकर इस खेल को अंजाम दिया है। Add text below Add image below04Heading Paragraph Heading Subheading Quoteकलेक्टर के आदेशों को पलटकर दी गई बिक्री की अनुमति Add text below Add image below05Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteविभिन्न मामलों में जिला कलेक्टर शीला दाहिमा ने पट्टे के वैध दस्तावेज या पर्याप्त आवश्यकता न होने के कारण आवेदन खारिज कर दिए थे। इनमें बगवाज, चोंडपुर, सोईकलां और प्रेमपुरा की जमीनें शामिल थीं। हालांकि, बाद में कमिश्नर कार्यालय ने पुराने रिकॉर्ड, लंबे कब्जे या नए शपथ-पत्रों को आधार बनाते हुए इन सभी चारों मामलों में जमीन बेचने की अनुमति प्रदान कर दी। Add text below Add image below06Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteअनुमति आदेश जारी होने के बाद और मूल फाइल जिले में पहुंचने से पहले ही महज 12 दिनों के भीतर जमीनों की रजिस्ट्री भी करा ली गई। उदाहरण के तौर पर, प्रेमपुरा और चोंडपुर की जमीन बेचने के लिए मुर्तजा नाम के व्यक्ति ने आवेदन किए थे। तहसीलदार और एसडीएम स्तर से अनुशंसा मिलने के बाद कलेक्टर ने इन्हें खारिज कर दिया था, लेकिन कमिश्नर कार्यालय से आदेश होने के बाद इनकी रजिस्ट्री संपन्न हो गई। Add text below Add image below07Heading Paragraph Heading Subheading Quoteअधिकारियों की प्रतिक्रियाएं Add text below Add image below08Quote Paragraph Heading Subheading Quoteयह मामला वरिष्ठ न्यायालय का है। उन्होंने अपने क्षेत्राधिकार का उपयोग कर आदेश दिए हैं, इसलिए मैं इस पर टिप्पणी नहीं कर सकती। - शीला दाहिमा, कलेक्टर, श्योपुर Add text below Add image below09Quote Paragraph Heading Subheading Quoteमैं अभी बाहर हूं। सात सितंबर तक अवकाश पर हूं। - सुरेश कुमार, कमिश्नर, चंबल संभाग Add text below Add image below