Story detailsHeadline, summary, section, and byline.HeadlineSummaryश्योपुर जिले में सोमवार को भाद्रपद शुक्ल दशमी पर लोकदेवता वीर तेजाजी महाराज की जयंती धूमधाम से मनाई गई। इस अवसर पर विभिन्न ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में दो दर्जन से अधिक स्थानों पर धार्मिक मेलों का आयोजन हुआ और महाराज की सवारियां निकाली गईं।Categoryदुर्घटनाराजनीतिसमस्या/problemस्थानीयअपराधशिक्षाखेलमनोरंजनव्यापारस्थानीयDistrictNo districtग्वालियरदेशमुरैनाभिंडश्योपुरदतियाशिवपुरीगुनाअशोकनगरAuthorEditorial deskMushtaq Ahmad Khan - Editor In Chiefiuyiuhकृषि डेस्क - कृषि संवाददाताक्राइम डेस्क - अपराध संवाददाताधर्म डेस्क - धर्म संपादकपर्यटन डेस्क - पर्यटन संवाददाताराजनीति डेस्क - राजनीतिक विश्लेषकव्यापार डेस्क - व्यापार संवाददाताशिक्षा डेस्क - शिक्षा संवाददातासंपादकीय डेस्क - वरिष्ठ संपादकसांस्कृतिक डेस्क - सांस्कृतिक संपादकस्पोर्ट्स डेस्क - खेल संवाददाताPublish timeStory URLURL slug/article/sheopur-story-ba557054
StoryWrite in reading order. Add images exactly where they should appear. Text block Image block01Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteश्योपुर जिले में सोमवार को भाद्रपद शुक्ल दशमी यानी तेजा दशमी का पर्व पूरी आस्था और हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। इस विशेष दिन पर लोकदेवता वीर तेजाजी महाराज की जयंती के उपलक्ष्य में जिलेभर में धार्मिक कार्यक्रमों और मेलों का सिलसिला पूरे दिन चलता रहा। Add text below Add image below02Heading Paragraph Heading Subheading Quoteविभिन्न ग्रामीण इलाकों में निकलीं सवारियां और उमड़ी भीड़ Add text below Add image below03Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteजिले के शहरी और ग्रामीण इलाकों में तेजाजी महाराज की सवारियां निकाली गईं। इस दौरान कई प्रमुख स्थानों पर सर्पदंश या अन्य जहरीले जीवों के काटने से पीड़ित लोगों के बंध खोलने की पारंपरिक रस्में भी पूरी की गईं। ग्राम सामरसा में आयोजित मुख्य कार्यक्रम में हजारों की संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। Add text below Add image below04Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteसामरसा में आयोजित कार्यक्रम के दौरान काली माता मंदिर के भगत काडूराम मीणा लाल चुनरी ओढ़कर जुलूस के साथ चंबल नदी तक पहुंचे और गहरे पानी में डुबकी लगाई। स्थानीय लोगों के अनुसार, इस बार उनके गले में नाग नहीं आ पाया, जिसे लेकर चर्चा रही। नदी किनारे इस नजारे को देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे। Add text below Add image below05Heading Paragraph Heading Subheading Quoteदशकों पुरानी परंपरा और अन्य गांवों के आयोजन Add text below Add image below06Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteस्थानीय ग्रामीणों के मुताबिक सामरसा की यह परंपरा करीब 50 साल पुरानी है, जिसकी शुरुआत मंदिर के पुजारी कृष्णा महाराज ने की थी। बाद में इसे अन्य पुजारियों ने आगे बढ़ाया और पिछले 13 सालों से काडूराम मीणा इस परंपरा का निर्वहन कर रहे हैं। इसी प्रकार छोटाखेड़ा गांव में मावदा से झंडा लेकर पहुंचे लोगों ने तेजाजी महाराज के थानक पर परंपरा का पालन किया। Add text below Add image below07Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteइकलौद गांव में आयोजित मेले में तेजाजी महाराज की स्मृति में निकाली गई सजी-धजी घोड़ी मुख्य आकर्षण का केंद्र रही। दोपहर के समय दीक्षित निवास से पारंपरिक रूप से घोड़ी की सवारी निकाली गई, जिसे आकर्षक वस्त्रों और आभूषणों से सजाया गया था। Add text below Add image below08Heading Paragraph Heading Subheading Quoteदो दर्जन से अधिक स्थानों पर सजे मेले Add text below Add image below09Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteतेजा दशमी के अवसर पर श्योपुर शहर के हजारेश्वर उद्यान और गिर्राज घाट के अलावा बड़ौदा, कराहल, मानपुर, इकलौद, रतोदन, मालीपुरा, सोईकलां, दांतरदा, बालापुरा, पांडोला, आवदा, राडेप, प्रेमसर, जावदेश्वर, ढोढर, रघुनाथपुर, गोरस, हीरापुर, लाडपुरा और गोठरा समेत आदिवासी अंचल के कई गांवों में मेले लगे। Add text below Add image below10Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteइन सभी स्थानों पर आयोजित मेलों और धार्मिक आयोजनों में बड़ी संख्या में पहुंचे श्रद्धालुओं ने तेजाजी महाराज के दर्शन कर पूजा-अर्चन की और मन्नतें मांगी। Add text below Add image below