Story detailsHeadline, summary, section, and byline.HeadlineSummaryश्योपुर जिले में मुझरी बांध के निर्माण को लेकर किसानों का गुस्सा सामने आया है। लगभग 40 साल से लंबित इस योजना को लेकर संघर्ष समिति ने बुधवार को कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा और कार्य शीघ्र शुरू करने की मांग की।Categoryदुर्घटनाराजनीतिसमस्या/problemस्थानीयअपराधशिक्षाखेलमनोरंजनव्यापारस्थानीयDistrictNo districtग्वालियरदेशमुरैनाभिंडश्योपुरदतियाशिवपुरीगुनाअशोकनगरAuthorEditorial deskMushtaq Ahmad Khan - Editor In Chiefiuyiuhकृषि डेस्क - कृषि संवाददाताक्राइम डेस्क - अपराध संवाददाताधर्म डेस्क - धर्म संपादकपर्यटन डेस्क - पर्यटन संवाददाताराजनीति डेस्क - राजनीतिक विश्लेषकव्यापार डेस्क - व्यापार संवाददाताशिक्षा डेस्क - शिक्षा संवाददातासंपादकीय डेस्क - वरिष्ठ संपादकसांस्कृतिक डेस्क - सांस्कृतिक संपादकस्पोर्ट्स डेस्क - खेल संवाददाताPublish timeStory URLURL slug/article/sheopur-story-77edad4a
StoryWrite in reading order. Add images exactly where they should appear. Text block Image block01Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteश्योपुर जिले में किसानों और मुझरी बांध संघर्ष समिति के सदस्यों ने बुधवार को जिला कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर एक ज्ञापन प्रेषित किया। इस दौरान किसानों ने चार दशक पुरानी इस सिंचाई परियोजना का निर्माण कार्य अविलंब शुरू कराने और स्टेज-2 की अड़चनों को दूर करने की पुरजोर मांग उठाई। Add text below Add image below02Heading Paragraph Heading Subheading Quoteवर्ष 2018 में मिली थी स्वीकृति, 2022 में हुआ था शिलान्यास Add text below Add image below03Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteकिसानों ने अपनी बात रखते हुए बताया कि यह महत्वाकांक्षी योजना लगभग चालीस वर्षों से लंबित चली आ रही है। हालांकि वर्ष 2018 में इस परियोजना के लिए करीब 415 करोड़ रुपये मंजूर किए गए थे, जिससे अंचल के अन्नदाताओं में उम्मीद जगी थी। इसके बाद वर्ष 2022 में तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इसका शिलान्यास भी किया था, लेकिन इसके बावजूद धरातल पर काम शुरू नहीं हो सका। Add text below Add image below04Heading Paragraph Heading Subheading Quoteहजारों हेक्टेयर भूमि होगी सिंचित, दो सौ गांवों को मिलेगा पानी Add text below Add image below05Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteप्रस्तावित योजना के पूरा होने से क्षेत्र की लगभग 11,575 हेक्टेयर उपजाऊ कृषि भूमि को सिंचाई के लिए पानी मिलने की संभावना है। इसके साथ ही करीब 200 गांवों के लोगों को पेयजल की सुविधा भी मिल सकेगी। परियोजना के रास्ते में आ रही वन एवं पर्यावरणीय स्वीकृतियों को लेकर अब कुछ सकारात्मक प्रगति देखी जा रही है, जिसके तहत लगभग 740.159 हेक्टेयर वन भूमि के प्रभावित होने की बात सामने आई है। Add text below Add image below06Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteज्ञापन सौंपने पहुंचे किसानों ने मांग की है कि प्रशासनिक स्तर पर स्टेज-2 की अनुमति से जुड़ी कागजी कार्रवाई को बिना किसी और विलंब के पूरा किया जाए। साथ ही, निर्माण कार्य के प्रारंभ होने की एक निश्चित समय-सीमा तय करते हुए किसानों को इसकी आधिकारिक जानकारी दी जाए। Add text below Add image below07Heading Paragraph Heading Subheading Quoteआंदोलन की चेतावनी और पारदर्शी कार्यप्रणाली की मांग Add text below Add image below08Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteसमिति के सदस्यों ने स्पष्ट किया कि उनका यह कदम किसी प्रशासन विरोधी मंशा से नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक अधिकार के तहत अपनी वर्षों पुरानी मांग को सामने रखने के लिए है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि तय समय के भीतर कार्य प्रारंभ नहीं किया गया, तो किसान शांतिपूर्ण और चरणबद्ध तरीके से बड़ा आंदोलन करने को विवश होंगे। Add text below Add image below