Story detailsHeadline, summary, section, and byline.HeadlineSummaryविजयपुर क्षेत्र के प्राचीन पार्वती माता मंदिर में भाद्रपद अमावस्या के बाद पहले सोमवार को वार्षिक मेला आयोजित किया गया। श्योपुर और राजस्थान से पहुंचे हजारों श्रद्धालुओं ने दर्शन कर मन्नतें मांगीं।Categoryदुर्घटनाराजनीतिसमस्या/problemस्थानीयअपराधशिक्षाखेलमनोरंजनव्यापारस्थानीयDistrictNo districtग्वालियरदेशमुरैनाभिंडश्योपुरदतियाशिवपुरीगुनाअशोकनगरAuthorEditorial deskMushtaq Ahmad Khan - Editor In Chiefiuyiuhकृषि डेस्क - कृषि संवाददाताक्राइम डेस्क - अपराध संवाददाताधर्म डेस्क - धर्म संपादकपर्यटन डेस्क - पर्यटन संवाददाताराजनीति डेस्क - राजनीतिक विश्लेषकव्यापार डेस्क - व्यापार संवाददाताशिक्षा डेस्क - शिक्षा संवाददातासंपादकीय डेस्क - वरिष्ठ संपादकसांस्कृतिक डेस्क - सांस्कृतिक संपादकस्पोर्ट्स डेस्क - खेल संवाददाताPublish timeStory URLURL slug/article/sheopur-50-cc6a8658
StoryWrite in reading order. Add images exactly where they should appear. Text block Image block01Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteश्योपुर जिले के विजयपुर इलाके में स्थित घने जंगलों के बीच बसे जमूर्दी गांव के प्राचीन पार्वती माता मंदिर में सोमवार को एक दिवसीय वार्षिक मेले का भव्य आयोजन किया गया। इस धार्मिक अनुष्ठान में भाग लेने के लिए श्योपुर के अलावा आसपास के विभिन्न ग्रामीण क्षेत्रों और पड़ोसी राज्य राजस्थान से भी भारी संख्या में लोग पहुंचे। Add text below Add image below02Heading Paragraph Heading Subheading Quoteहजारों की संख्या में पहुंचे श्रद्धालु Add text below Add image below03Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteसोमवार की सुबह से ही मंदिर परिसर में भक्तों की लंबी कतारें लगनी शुरू हो गई थीं। एक अनुमान के मुताबिक मेले में 50 हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने शिरकत की। दर्शनार्थियों ने माता के दरबार में पहुंचकर चुनरी, घंटे और नेजे अर्पित किए तथा अपने परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की। मेले की शुरुआत से पहले रविवार की रात को मंदिर परिसर में भव्य जागरण का आयोजन किया गया था, जिसमें विभिन्न भजन मंडलियों ने देवी के गीत प्रस्तुत किए और भक्त पूरी रात वहीं जमे रहे। Add text below Add image below04Heading Paragraph Heading Subheading Quoteविशेष परंपरा और सुरक्षा के कड़े प्रबंध Add text below Add image below05Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteइस प्राचीन मेले की एक खास मान्यता के तहत सर्प दंश या अन्य जहरीले जीवों के काटने से पीड़ित सैकड़ों लोगों के बंध काटे गए। स्थानीय लोगों का विश्वास है कि माता के दरबार में यह प्रक्रिया विष के प्रभाव को कम करती है, हालांकि स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार ऐसी स्थिति में चिकित्सीय सहायता लेना भी आवश्यक माना जाता है। Add text below Add image below06Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteभीड़ और सुरक्षा व्यवस्था को नियंत्रित करने के लिए प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद नजर आया। मेला स्थल और मुख्य मार्गों पर आधा दर्जन से ज्यादा थाना प्रभारियों के नेतृत्व में 100 से अधिक पुलिस बल तैनात किया गया था। ग्राम पंचायत जमूर्दी और मेला समिति के पदाधिकारी भी व्यवस्थाओं को सुचारू बनाए रखने में जुटे रहे। Add text below Add image below07Heading Paragraph Heading Subheading Quoteसूर्यास्त से पहले खाली हो जाता है परिसर Add text below Add image below08Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteमंदिर के पुजारी कृष्ण गोपाल शर्मा ने बताया कि इस स्थान की एक अनूठी परंपरा है जिसके तहत सभी दुकानदार और श्रद्धालु सूर्यास्त होने से पहले ही मंदिर परिसर छोड़कर वापस लौट जाते हैं। पीढ़ियों से चली आ रही इस स्थानीय मान्यता के अनुसार रात के समय यहां भूत-प्रेतों का वास होता है, जिसके चलते शाम ढलने के बाद कोई भी व्यक्ति मंदिर क्षेत्र में नहीं रुकता है। Add text below Add image below