Story detailsHeadline, summary, section, and byline.HeadlineSummary280 करोड़ रुपए की लागत से बने श्योपुर मेडिकल कॉलेज का भवन पहली ही बारिश में धंसने लगा है और दीवारों में दरारें आ गई हैं। गड़बड़ियों की पोल खोलने और कॉलेज का हैंडओवर लेने से इनकार करने वाले तत्कालीन डीन को पद से हटा दिया गया है।Categoryदुर्घटनाराजनीतिसमस्या/problemस्थानीयअपराधशिक्षाखेलमनोरंजनव्यापारस्थानीयDistrictNo districtग्वालियरदेशमुरैनाभिंडश्योपुरदतियाशिवपुरीगुनाअशोकनगरAuthorEditorial deskMushtaq Ahmad Khan - Editor In Chiefiuyiuhकृषि डेस्क - कृषि संवाददाताक्राइम डेस्क - अपराध संवाददाताधर्म डेस्क - धर्म संपादकपर्यटन डेस्क - पर्यटन संवाददाताराजनीति डेस्क - राजनीतिक विश्लेषकव्यापार डेस्क - व्यापार संवाददाताशिक्षा डेस्क - शिक्षा संवाददातासंपादकीय डेस्क - वरिष्ठ संपादकसांस्कृतिक डेस्क - सांस्कृतिक संपादकस्पोर्ट्स डेस्क - खेल संवाददाताPublish timeStory URLURL slug/article/sheopur-20-709f77d1
StoryWrite in reading order. Add images exactly where they should appear. Text block Image block01Heading Paragraph Heading Subheading Quote280 करोड़ की लागत पर उठे सवाल, पहली बारिश में खुली पोल Add text below Add image below02Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteश्योपुर में 280 करोड़ रुपए की लागत से तैयार मेडिकल कॉलेज का नया भवन निर्माण एजेंसी 'ब्रिज एंड रूफ' की लापरवाही के चलते भ्रष्टाचार का अखाड़ा बनता नजर आ रहा है। कागजों में प्रोजेक्ट को पूरा दिखाकर एजेंसी ने करीब 20 करोड़ रुपए का काम अधूरा छोड़ दिया है। स्थिति यह है कि मानसून की पहली ही बारिश में घटिया निर्माण की पोल खुल गई है, जिससे इमारत जमीन में धंसने लगी है, दीवारों में बड़ी दरारें आ चुकी हैं और छतें टपकने लगी हैं। Add text below Add image below03Heading Paragraph Heading Subheading Quoteकमियां उजागर करने पर तत्कालीन डीन पर गिरी गाज Add text below Add image below04Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteइस पूरे मामले में हैरानी की बात यह है कि जब तत्कालीन डीन डॉ. अनिल अग्रवाल ने कॉलेज भवन की 14 प्रमुख कमियों की जांच रिपोर्ट तैयार कर इसका हैंडओवर लेने से साफ इनकार कर दिया, तो शासन स्तर पर दोषियों पर कार्रवाई करने के बजाय डीन को ही उनके पद से हटा दिया गया। इसके तुरंत बाद आनन-फानन में नए डीन की नियुक्ति की गई और बिना किसी सुधार कार्य के इस अधूरे भवन का हैंडओवर भी ले लिया गया। Add text below Add image below05Heading Paragraph Heading Subheading Quoteजांच में गायब मिले हॉस्टल और जरूरी उपकरण Add text below Add image below06Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteप्रोजेक्ट की डीपीआर और जांच समिति की रिपोर्ट के अनुसार, निर्माण कार्य में भारी अनियमितताएं बरती गई हैं। तय योजना के मुताबिक दो पूरे हॉस्टल का निर्माण किया ही नहीं गया, जबकि सीनियर रेजिडेंट्स और नर्सिंग स्टाफ के आवासों को केवल नींव यानी प्लिंथ स्तर तक बनाकर छोड़ दिया गया। इसके अलावा क्लासरूम में एसी और माइक खराब पड़े मिले। मौके पर 50 सीमेंट बेंच, तीन डीजी सेट की जगह सिर्फ दो और छह बोरिंग की जगह महज तीन बोरिंग ही पाए गए, जिनमें से एक में मोटर तक नहीं डाली गई है। Add text below Add image below07Quote Paragraph Heading Subheading Quoteकॉलेज भवन में दो हॉस्टल नहीं बने हैं। मैंने वरिष्ठों को जानकारी भेज दी थी। करीब 20 करोड़ के काम नहीं हुए थे। जिनको डीन का प्रभार सौंपा गया, वह काफी जूनियर हैं। - डॉ. अनिल अग्रवाल, पूर्व डीन Add text below Add image below08Heading Paragraph Heading Subheading Quoteनए डीन ने दी सफाई, मंत्रालय को भेजे गए पत्र Add text below Add image below09Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteपूर्व डीन डॉ. अनिल अग्रवाल का कहना है कि उन्होंने अधूरा काम देखकर चार्ज लेने से मना किया था, जिसके बाद उनका ट्रांसफर कर दिया गया। वहीं, वर्तमान डीन डॉ. विपेंद्र भदकारिया का कहना है कि उन्हें पुराने डीन को हटाने के कारणों की जानकारी नहीं है, लेकिन छात्रों की कक्षाएं शुरू कराने के लिए पीआईयू और बिजली विभाग की अनुशंसा पर भवन का हैंडओवर लेना पड़ा। उन्होंने दावा किया कि पुरानी समिति की सभी आपत्तियों को लेकर डीएमई और मंत्रालय को पत्र भेजे जा चुके हैं। Add text below Add image below