Story detailsHeadline, summary, section, and byline.HeadlineSummaryमहर्षि वाल्मीकि जयंती के पावन अवसर पर अंबाह शहर में एक आकर्षक चल समारोह का आयोजन किया गया। इस दौरान विभिन्न मार्गों से गुजरी झांकियों और रथों के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में स्थानीय लोग मौजूद रहे।Categoryदुर्घटनाराजनीतिसमस्या/problemस्थानीयअपराधशिक्षाखेलमनोरंजनव्यापारस्थानीयDistrictNo districtग्वालियरदेशमुरैनाभिंडश्योपुरदतियाशिवपुरीगुनाअशोकनगरAuthorEditorial deskMushtaq Ahmad Khan - Editor In Chiefiuyiuhकृषि डेस्क - कृषि संवाददाताक्राइम डेस्क - अपराध संवाददाताधर्म डेस्क - धर्म संपादकपर्यटन डेस्क - पर्यटन संवाददाताराजनीति डेस्क - राजनीतिक विश्लेषकव्यापार डेस्क - व्यापार संवाददाताशिक्षा डेस्क - शिक्षा संवाददातासंपादकीय डेस्क - वरिष्ठ संपादकसांस्कृतिक डेस्क - सांस्कृतिक संपादकस्पोर्ट्स डेस्क - खेल संवाददाताPublish timeStory URLURL slug/article/morena-story-a7910326
StoryWrite in reading order. Add images exactly where they should appear. Text block Image block01Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteग्वालियर-चंबल अंचल के अंबाह कस्बे में महर्षि वाल्मीकि जयंती धूमधाम के साथ मनाई गई। इस विशेष अवसर पर शहर के भीतर एक भव्य चल समारोह का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने हिस्सा लिया। Add text below Add image below02Heading Paragraph Heading Subheading Quoteपुरानी बस्ती से हुई चल समारोह की शुरुआत Add text below Add image below03Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteइस धार्मिक आयोजन का आरंभ नगर की पुरानी बस्ती से किया गया। तय किए गए रूट के मुताबिक जुलूस शहर के कई मुख्य रास्तों और चौराहों से होता हुआ गुजरा, जहां स्थानीय नागरिकों ने इसका स्वागत किया। Add text below Add image below04Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteयात्रा का कारवां पुरानी बस्ती से आगे बढ़कर जयश्वर महादेव रोड, मंशापूर्ण क्षेत्र और परेड चौराहा पहुंचा। इसके पश्चात दाऊ की कोठी, टेक चंद स्कूल, उसेथ घाट रोड और पोरसा चौराहे से होते हुए यह जुलूस आगे बढ़ा। Add text below Add image below05Heading Paragraph Heading Subheading Quoteशहर का भ्रमण कर शाम को हुआ समापन Add text below Add image below06Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteपोरसा चौराहे के बाद चल समारोह पीपल चौराहा तथा नगर पालिका चौराहा से गुजरते हुए पुनः अपनी शुरुआती जगह यानी पुरानी बस्ती में जाकर संपन्न हुआ। यह पूरा मार्ग लगभग शाम 5:30 बजे तय किया गया। Add text below Add image below07Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteयात्रा के समापन स्थल पर महर्षि वाल्मीकि के स्वरूप की विधिवत आरती उतारी गई। इस दौरान रथ पर सजे महर्षि वाल्मीकि के साथ-साथ लव और कुश के स्वरूप आकर्षण का मुख्य केंद्र रहे। Add text below Add image below08Heading Paragraph Heading Subheading Quoteमहर्षि वाल्मीकि और रामायण का पौराणिक महत्व Add text below Add image below09Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteधार्मिक और पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, महर्षि वाल्मीकि ने ही भगवान श्रीराम के जीवन चरित्र, आदर्शों और इतिहास पर आधारित रामायण ग्रंथ की रचना की थी। Add text below Add image below10Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteऐसी मान्यता है कि माता सीता को जब वनवास मिला था, तब महर्षि वाल्मीकि ने उन्हें अपने आश्रम में शरण दी थी। उन्होंने ही भगवान श्रीराम के दोनों पुत्रों, लव और कुश को अपने आश्रम में रखकर शिक्षा-दीक्षा प्रदान की थी। Add text below Add image below