Story detailsHeadline, summary, section, and byline.HeadlineSummaryमुरैना जिले के सबलगढ़ क्षेत्र में इस बरसात के मौसम में नाममात्र की बारिश दर्ज की गई है, जिससे सूखे जैसे हालात बन गए हैं। किसान अपनी फसलों को बचाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं और भूमिगत जलस्तर भी तेजी से गिर रहा है।Categoryदुर्घटनाराजनीतिसमस्या/problemस्थानीयअपराधशिक्षाखेलमनोरंजनव्यापारस्थानीयDistrictNo districtग्वालियरदेशमुरैनाभिंडश्योपुरदतियाशिवपुरीगुनाअशोकनगरAuthorEditorial deskMushtaq Ahmad Khan - Editor In Chiefiuyiuhकृषि डेस्क - कृषि संवाददाताक्राइम डेस्क - अपराध संवाददाताधर्म डेस्क - धर्म संपादकपर्यटन डेस्क - पर्यटन संवाददाताराजनीति डेस्क - राजनीतिक विश्लेषकव्यापार डेस्क - व्यापार संवाददाताशिक्षा डेस्क - शिक्षा संवाददातासंपादकीय डेस्क - वरिष्ठ संपादकसांस्कृतिक डेस्क - सांस्कृतिक संपादकस्पोर्ट्स डेस्क - खेल संवाददाताPublish timeStory URLURL slug/article/morena-story-855c7f14
StoryWrite in reading order. Add images exactly where they should appear. Text block Image block01Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteमुरैना जिले के सबलगढ़ अंचल में इस वर्ष मानसून की बेरुखी साफ दिख रही है। वर्षा ऋतु में भी यहां बहुत कम बारिश हुई है, जिसके चलते पूरे इलाके में सूखे की स्थिति उत्पन्न हो गई है। किसान अपनी खड़ी फसलों को बचाने के लिए कड़ी मशक्कत कर रहे हैं, वहीं भूजल स्तर में भी लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है। Add text below Add image below02Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteमौसम विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, सबलगढ़ को सामान्य रूप से 200 मिलीमीटर वर्षा की आवश्यकता होती है। हालांकि, 14 जुलाई तक यहां केवल 82 मिलीमीटर बारिश ही रिकॉर्ड की जा सकी है, जो कि सामान्य से बहुत कम है। पिछले वर्ष इसी समय तक क्षेत्र में 376 मिलीमीटर वर्षा हो चुकी थी, जिससे मौजूदा स्थिति की गंभीरता का अंदाजा लगाया जा सकता है। Add text below Add image below03Heading Paragraph Heading Subheading Quoteतालाबों का सूखना और फसलों पर गहराता संकट Add text below Add image below04Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteबारिश की कमी के कारण सबलगढ़ का प्रमुख तालाब भी पूरी तरह सूख गया है। गौरतलब है कि इस तालाब को लगभग 12 साल पहले जलस्तर बनाए रखने के उद्देश्य से पुनर्जीवित किया गया था। अब किसान अपनी ज्वार-बाजरा और धान जैसी महत्वपूर्ण फसलों को सूखने से बचाने के लिए महंगे समरसिबल पंपों का उपयोग करने को विवश हैं। Add text below Add image below05Heading Paragraph Heading Subheading Quoteकिसानों की गुहार: नहरों से पानी और सूखाग्रस्त घोषित करने की मांग Add text below Add image below06Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteक्षेत्र के किसानों ने प्रशासन से धान की फसल के लिए तत्काल नहरों से पानी छोड़ने की अपील की है। विभिन्न किसान संगठनों ने मुरैना जिले को सूखाग्रस्त घोषित करने की मांग भी उठाई है। किसान छत्तू रजक ने अपनी व्यथा बताते हुए कहा कि जंगल में पानी की कमी के कारण उन्हें अपने पशुओं को दूर तालाबों तक ले जाना पड़ रहा है। वहीं, किसान विश्राम का कहना है कि जुलाई का महीना होने के बावजूद तालाब खाली पड़े हैं, फसलें मुरझाने लगी हैं और भूजल स्तर लगातार नीचे जा रहा है। Add text below Add image below07Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteपूरे जिले में अब तक सिर्फ 23 प्रतिशत ही बारिश दर्ज की गई है, जिसके परिणामस्वरूप पानी की 89 प्रतिशत कमी बनी हुई है। हालांकि, मौसम विभाग ने 15 अगस्त तक अच्छी बारिश की संभावना जताई है, जिससे उम्मीद है कि जलस्तर में कुछ सुधार हो सकता है और किसानों को थोड़ी राहत मिल सकती है। Add text below Add image below