Story detailsHeadline, summary, section, and byline.HeadlineSummaryमुरैना जिले के अंबाह में आर्यिका सम्पर्कमति माताजी ने बुधवार शाम को णमोकार महामंत्र के जाप के बीच समाधि ले ली। वे पिछले तीन दिनों से लगातार अन्न और जल का त्याग कर साधना में लीन थीं।Categoryदुर्घटनाराजनीतिसमस्या/problemस्थानीयअपराधशिक्षाखेलमनोरंजनव्यापारस्थानीयDistrictNo districtग्वालियरदेशमुरैनाभिंडश्योपुरदतियाशिवपुरीगुनाअशोकनगरAuthorEditorial deskMushtaq Ahmad Khan - Editor In Chiefiuyiuhकृषि डेस्क - कृषि संवाददाताक्राइम डेस्क - अपराध संवाददाताधर्म डेस्क - धर्म संपादकपर्यटन डेस्क - पर्यटन संवाददाताराजनीति डेस्क - राजनीतिक विश्लेषकव्यापार डेस्क - व्यापार संवाददाताशिक्षा डेस्क - शिक्षा संवाददातासंपादकीय डेस्क - वरिष्ठ संपादकसांस्कृतिक डेस्क - सांस्कृतिक संपादकस्पोर्ट्स डेस्क - खेल संवाददाताPublish timeStory URLURL slug/article/morena-story-6e831df0
StoryWrite in reading order. Add images exactly where they should appear. Text block Image block01Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteमुरैना जिले के अंबाह कस्बे में जैन संत आर्यिका सम्पर्कमति माताजी ने बुधवार शाम करीब छह बजे अपनी देह त्याग दी। उनके महाप्रयाण के समय आसपास मौजूद श्रद्धालु लगातार णमोकार महामंत्र का जाप कर रहे थे, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया। Add text below Add image below02Heading Paragraph Heading Subheading Quoteतीन दिन से चल रही थी कठोर साधना Add text below Add image below03Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteस्थानीय जैन समाज के प्रतिनिधियों ने जानकारी दी कि माताजी पिछले तीन दिनों से पूरी तरह से अन्न और जल का त्याग कर आत्म साधना में जुटी हुई थीं। जीवन के अंतिम क्षणों तक उनकी साधना और ध्यान पूरी निष्ठा के साथ जारी रहे। Add text below Add image below04Heading Paragraph Heading Subheading Quote2016 में ग्रहण की थी जैन दीक्षा Add text below Add image below05Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteमूलरूप से गुजरात के हिम्मतनगर की रहने वाली आर्यिका सम्पर्कमति माताजी ने वर्ष 2016 में राजस्थान के बारां शहर में जैन दीक्षा स्वीकार की थी। वे गणिनी आर्यिका रत्न 105 श्री संगममति माताजी की प्रमुख शिष्याओं में शामिल थीं। Add text below Add image below06Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteवर्तमान2 वर्ष उनका चातुर्मास अंबाह में ही संपन्न हो रहा था। उनकी समाधि लेने की दुखद सूचना मिलते ही अंबाह क्षेत्र के जैन समाज और श्रद्धालुओं में शोक की लहर दौड़ गई और बड़ी संख्या में लोग उनके दर्शन के लिए पहुंचने लगे। Add text below Add image below07Heading Paragraph Heading Subheading Quoteजैन परंपरा में आत्मसाधना की प्रक्रिया Add text below Add image below08Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteगुरु संगममति माताजी ने जैन परंपरा के इस मार्ग पर प्रकाश डालते हुए बताया कि समाधिमरण या संथारा जीवन के अंतिम पड़ाव पर राग और द्वेष भाव को समाप्त करते हुए अपनी आत्मा को शुद्ध करने की एक सर्वोच्च प्रक्रिया है। इसमें क्षमा, विनय और वैराग्य के साथ णमोकार महामंत्र का स्मरण किया जाता है। Add text below Add image below09Heading Paragraph Heading Subheading Quoteअंतिम यात्रा और संस्कार Add text below Add image below10Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteजैन समाज के जिनेश जैन ने बताया कि गुरुवार सुबह 10 बजे श्रद्धालुओं द्वारा नगर में डोला निकाला जाएगा। इसके बाद अंबाह स्थित जैन बगीची में उनकी अंतिम क्रियाएं पूरी विधि-विधान के साथ संपन्न की जाएंगी। Add text below Add image below