Story detailsHeadline, summary, section, and byline.HeadlineSummaryसबलगढ़ में भाद्रपद पूर्णिमा से पितृ पक्षों की शुरुआत हो चुकी है। शनिवार से स्थानीय नागरिक नदियों व तालाबों के किनारे पहुंचकर पूर्वजों के निमित्त तर्पण कर रहे हैं।Categoryदुर्घटनाराजनीतिसमस्या/problemस्थानीयअपराधशिक्षाखेलमनोरंजनव्यापारस्थानीयDistrictNo districtग्वालियरदेशमुरैनाभिंडश्योपुरदतियाशिवपुरीगुनाअशोकनगरAuthorEditorial deskMushtaq Ahmad Khan - Editor In Chiefiuyiuhकृषि डेस्क - कृषि संवाददाताक्राइम डेस्क - अपराध संवाददाताधर्म डेस्क - धर्म संपादकपर्यटन डेस्क - पर्यटन संवाददाताराजनीति डेस्क - राजनीतिक विश्लेषकव्यापार डेस्क - व्यापार संवाददाताशिक्षा डेस्क - शिक्षा संवाददातासंपादकीय डेस्क - वरिष्ठ संपादकसांस्कृतिक डेस्क - सांस्कृतिक संपादकस्पोर्ट्स डेस्क - खेल संवाददाताPublish timeStory URLURL slug/article/morena-story-58fa5301
StoryWrite in reading order. Add images exactly where they should appear. Text block Image block01Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteअंचल में पितृ पक्ष का आरंभ भाद्रपद पूर्णिमा के साथ हो गया है। इस सोलह दिवसीय विशेष अवधि के दौरान सनातन परंपरा के अनुसार लोग अपने पूर्वजों को याद कर रहे हैं और उनकी आत्मा की शांति के लिए विभिन्न अनुष्ठान निभाए जा रहे हैं। Add text below Add image below02Heading Paragraph Heading Subheading Quoteतालाबों और नदियों के तट पर तर्पण की शुरुआत Add text below Add image below03Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteशनिवार से शहर और आसपास के इलाकों में परिवारों के मुखियाओं ने जल स्रोतों का रुख करना शुरू कर दिया है। इसी क्रम में पंडित लीलाकृष्ण शास्त्री के मार्गदर्शन में स्थानीय तालाब पर तर्पण अनुष्ठान संपन्न कराया गया, जहां परिजनों ने विधि-विधान के साथ अपने पितरों के नाम पर जल अर्पित किया। Add text below Add image below04Heading Paragraph Heading Subheading Quoteतिथि के अनुसार तय होते हैं श्राद्ध कर्म Add text below Add image below05Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteज्योतिषाचार्य पंडित कृष्णकांत शास्त्री के मुताबिक, पितृ पक्ष के दौरान श्राद्ध कर्म हमेशा पूर्वजों की मृत्यु तिथि के आधार पर ही तय किए जाते हैं। हालांकि, यदि किसी को अपने परिजन की सही मृत्यु तिथि ज्ञात न हो, तो वे आश्विन मास की अमावस्या के दिन सर्वपितृ श्राद्ध के रूप में यह अनुष्ठान पूरा कर सकते हैं। Add text below Add image below06Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteउन्होंने आगे जानकारी दी कि इस पखवाड़े में श्रीमद्भागवत गीता के सातवें अध्याय का पाठ करने की भी धार्मिक मान्यता है। इसके अलावा, परिवार में नाना-नानी का श्राद्ध आश्विन कृष्ण प्रतिपदा के दिन करना बेहद शुभ माना गया है। Add text below Add image below07Heading Paragraph Heading Subheading Quoteगयाजी में पिंडदान का विशेष धार्मिक महत्व Add text below Add image below08Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteअपने पितरों की मोक्ष प्राप्ति और शांति के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु बिहार के गया भी जाते हैं। हिंदू धर्म में गयाजी स्थित फल्गु नदी के तट, विष्णुपद मंदिर और पवित्र अक्षयवट को पिंडदान और श्राद्ध कर्म के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण तीर्थ स्थल माना गया है। Add text below Add image below