Story detailsHeadline, summary, section, and byline.HeadlineSummaryग्वालियर-चंबल संभाग के मुरैना जिले स्थित काजी बसई गांव देशभक्ति और बलिदान की अनूठी मिसाल पेश करता है। प्रथम विश्व युद्ध से लेकर आधुनिक सैन्य अभियानों तक इस गांव के वीरों ने सीमाओं की रक्षा में अमूल्य योगदान दिया है।Categoryदुर्घटनाराजनीतिसमस्या/problemस्थानीयअपराधशिक्षाखेलमनोरंजनव्यापारस्थानीयDistrictNo districtग्वालियरदेशमुरैनाभिंडश्योपुरदतियाशिवपुरीगुनाअशोकनगरAuthorEditorial deskMushtaq Ahmad Khan - Editor In Chiefiuyiuhकृषि डेस्क - कृषि संवाददाताक्राइम डेस्क - अपराध संवाददाताधर्म डेस्क - धर्म संपादकपर्यटन डेस्क - पर्यटन संवाददाताराजनीति डेस्क - राजनीतिक विश्लेषकव्यापार डेस्क - व्यापार संवाददाताशिक्षा डेस्क - शिक्षा संवाददातासंपादकीय डेस्क - वरिष्ठ संपादकसांस्कृतिक डेस्क - सांस्कृतिक संपादकस्पोर्ट्स डेस्क - खेल संवाददाताPublish timeStory URLURL slug/article/morena-11-d7f0d5ac
StoryWrite in reading order. Add images exactly where they should appear. Text block Image block01Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteग्वालियर-चंबल अंचल के मुरैना जिले में एक ऐसा गांव बसा है, जहां देशभक्ति महज नारों और उत्सवों तक सीमित नहीं है। इस गांव की हर गली और हर घर का नाता सीधे तौर पर देश की रक्षा सेनाओं से जुड़ा हुआ है। काजी बसई नाम के इस गांव में शायद ही कोई ऐसा परिवार मिलेगा, जिसके सदस्य ने सेना, सीमा सुरक्षा बल या अन्य सुरक्षा एजेंसियों में अपनी सेवाएं न दी हों। Add text below Add image below02Heading Paragraph Heading Subheading Quoteपीढ़ियों से चली आ रही है सैन्य सेवा की परंपरा Add text below Add image below03Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteयहाँ के निवासियों के लिए फौज में जाना केवल आजीविका का साधन नहीं, बल्कि परिवार और देश के प्रति एक पवित्र कर्तव्य माना जाता है। बुजुर्गों से लेकर युवाओं तक, हर पीढ़ी ने सरहद पर पहरा देकर देश की सुरक्षा को सर्वोपरि रखा है। आज भी इस गांव के कई जवान देश के विभिन्न हिस्सों में मुस्तैदी से अपनी ड्यूटी निभा रहे हैं। Add text below Add image below04Heading Paragraph Heading Subheading Quoteविश्व युद्ध से लेकर कारगिल और ऑपरेशन तक भागीदारी Add text below Add image below05Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteकाजी बसई के वीरों का इतिहास बहुत पुराना और गौरवशाली है। इस गांव के जवानों ने प्रथम और द्वितीय विश्व युद्ध के अलावा साल 1962 के चीन युद्ध, 1965 एवं 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध, श्रीलंका में शांति सेना अभियान, पंजाब के आतंकवाद विरोधी मोर्चे, नक्सल प्रभावित क्षेत्रों और कारगिल की जंग में अदम्य साहस का परिचय दिया है। Add text below Add image below06Quote Paragraph Heading Subheading Quoteदेश की हिफाजत के लिए इस माटी के 11 वीर सपूतों ने अपना सर्वोच्च बलिदान दिया है, जिनमें विभिन्न समुदायों के जवान शामिल रहे हैं। Add text below Add image below07Heading Paragraph Heading Subheading Quoteजर्मनी तक गूंजी गांव के सैनिक की शहादत की गूंज Add text below Add image below08Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteपूर्व सैनिकों और स्थानीय बुजुर्गों के संस्मरणों के अनुसार, प्रथम विश्व युद्ध के दौरान सिंधिया स्टेट की सेना से जुड़े अब्दुल वासिद ने जर्मनी में लड़ते हुए शहादत दी थी, जिनकी यादें आज भी वहां संजोई हुई हैं। इसके बाद द्वितीय विश्व युद्ध में भी गांव के डेढ़ दर्जन के करीब लोग शामिल हुए थे, जो युद्ध समाप्ति के बाद सकुशल अपने गांव लौटे थे। Add text below Add image below09Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteस्थानीय निवासी और पूर्व सैनिक हाजी मोहम्मद रफी जैसे दिग्गजों ने 1965 और 1971 की जंगों को अपनी आंखों से देखा है और उनमें सीधे भाग लिया है। आज भी जब वे उन दिनों को याद करते हैं, तो अंचल का मस्तक गर्व से ऊंचा हो जाता है। काजी बसई गांव आज पूरे देश के लिए प्रेरणास्त्रोत बना हुआ है। Add text below Add image below