Story detailsHeadline, summary, section, and byline.HeadlineSummaryसिंधिया महाराजा के विशेष आदेश पर ग्वालियर के फोटोग्राफर केएच मावल 1916 में शिरडी पहुंचे थे। साईं बाबा की प्रसिद्ध तस्वीर को कैमरे में कैद करने के लिए उन्हें दो महीने लंबा इंतजार करना पड़ा था।Categoryदुर्घटनाराजनीतिसमस्या/problemस्थानीयअपराधशिक्षाखेलमनोरंजनव्यापारस्थानीयDistrictNo districtग्वालियरदेशमुरैनाभिंडश्योपुरदतियाशिवपुरीगुनाअशोकनगरAuthorEditorial deskMushtaq Ahmad Khan - Editor In Chiefiuyiuhकृषि डेस्क - कृषि संवाददाताक्राइम डेस्क - अपराध संवाददाताधर्म डेस्क - धर्म संपादकपर्यटन डेस्क - पर्यटन संवाददाताराजनीति डेस्क - राजनीतिक विश्लेषकव्यापार डेस्क - व्यापार संवाददाताशिक्षा डेस्क - शिक्षा संवाददातासंपादकीय डेस्क - वरिष्ठ संपादकसांस्कृतिक डेस्क - सांस्कृतिक संपादकस्पोर्ट्स डेस्क - खेल संवाददाताPublish timeStory URLURL slug/article/gwalior-story-fadb2312
StoryWrite in reading order. Add images exactly where they should appear. Text block Image block01Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteदुनियाभर में शिरडी वाले साईं बाबा के अनगिनत भक्तों के घरों और मंदिरों में उनकी एक खास तस्वीर बेहद लोकप्रिय है। इस तस्वीर में बाबा दीवार से पीठ टिकाकर खड़े नजर आते हैं, उनके चेहरे पर एक हल्की सी मुस्कान है और उन्होंने एक हाथ से अपना कुर्ता पकड़ा हुआ है। बहुत कम लोगों को यह जानकारी है कि साईं बाबा की इस अति दुर्लभ और प्रसिद्ध तस्वीर का सीधा संबंध मध्य प्रदेश के ग्वालियर से जुड़ा हुआ है। Add text below Add image below02Heading Paragraph Heading Subheading Quoteसिंधिया स्टेट के फोटोग्राफर थे केएच मावल Add text below Add image below03Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteयह ऐतिहासिक तस्वीर ग्वालियर के ही एक प्रतिभावान फोटोग्राफर ने खींची थी। केएच मावल उस समय सिंधिया स्टेट के आधिकारिक राजसी फोटोग्राफर के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे थे। उन्होंने ग्वालियर में ही फोटोग्राफी के क्षेत्र में कदम रखा था और बाद में 'केएच मावल एंड संस' के नाम से अपनी फोटोग्राफी फर्म स्थापित की थी, जिसने उस दौर में काफी नाम कमाया। Add text below Add image below04Heading Paragraph Heading Subheading Quoteमहाराजा माधवराव सिंधिया प्रथम का मिला था आदेश Add text below Add image below05Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteअगस्त 1916 के दौरान ग्वालियर रियासत के तत्कालीन महाराजा माधवराव सिंधिया प्रथम ने केएच मावल को अपने राजमहल में तलब किया। महाराजा ने उन्हें शिरडी जाने और वहां साईं बाबा की तस्वीर खींचकर लाने का विशेष निर्देश दिया। शासक का आदेश मिलते ही मावल अपना भारी-भरकम कैमरा और फोटोग्राफी का पूरा साजो-सामान लेकर शिरडी के लिए रवाना हो गए। Add text below Add image below06Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteहालांकि, शिरडी पहुंचने के बाद मावल के लिए साईं बाबा की तस्वीर लेना बिल्कुल भी आसान नहीं साबित हुआ। उन दिनों साईं बाबा का स्वास्थ्य ठीक नहीं चल रहा था और वे बहुत ही कम अपने कक्ष से बाहर आते थे। इस कठिन परिस्थिति के चलते ग्वालियर के इस फोटोग्राफर को बाबा की एक झलक पाने और उनकी तस्वीर लेने के वास्ते शिरडी में पूरे दो महीने तक का लंबा इंतजार करना पड़ गया। Add text below Add image below07Heading Paragraph Heading Subheading Quoteसेवकों की मदद से बनी बात और मिला मौका Add text below Add image below08Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteलंबे इंतजार के बाद भी जब कोई सीधा रास्ता नहीं सूझा, तो मावल ने साईं बाबा के निजी सेवकों से संपर्क किया। उन्होंने बाबा के करीबियों से बातचीत कर तस्वीर लेने में सहयोग मांगा। सेवकों ने मावल को आश्वस्त किया कि जब भी बाबा बाहर आएंगे, वे फोटोग्राफर को उस तय रास्ते की जानकारी दे देंगे ताकि वे अपनी कला का प्रदर्शन कर सकें। Add text below Add image below09Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteकेएच मावल के पौत्र लारेब द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, एक रोज मावल को सूचना मिली कि साईं बाबा एक निश्चित मार्ग से गुजरने वाले हैं। यह बात सुनते ही उन्होंने बिना वक्त गंवाए अपना कैमरा बिल्कुल तैयार रखा। जब बाबा उस मार्ग से निकले तो बीमारी और कमजोरी के कारण वे थोड़ी देर के लिए एक दीवार से टिककर खड़े हो गए। ठीक उसी ऐतिहासिक पल में केएच मावल ने वह दुर्लभ तस्वीर अपने कैमरे में सदा के लिए कैद कर ली। Add text below Add image below