Story detailsHeadline, summary, section, and byline.HeadlineSummaryग्वालियर शहर में पिछले आठ महीनों के दौरान आवारा कुत्तों के काटने से आठ हजार से ज्यादा नागरिक घायल हो चुके हैं। इस अवधि में रेबीज के संक्रमण से सात लोगों की जान भी जा चुकी है, जिससे नगर निगम के एंटी-रेबीज और नसबंदी अभियानों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।Categoryदुर्घटनाराजनीतिसमस्या/problemस्थानीयअपराधशिक्षाखेलमनोरंजनव्यापारस्थानीयDistrictNo districtग्वालियरदेशमुरैनाभिंडश्योपुरदतियाशिवपुरीगुनाअशोकनगरAuthorEditorial deskMushtaq Ahmad Khan - Editor In Chiefiuyiuhकृषि डेस्क - कृषि संवाददाताक्राइम डेस्क - अपराध संवाददाताधर्म डेस्क - धर्म संपादकपर्यटन डेस्क - पर्यटन संवाददाताराजनीति डेस्क - राजनीतिक विश्लेषकव्यापार डेस्क - व्यापार संवाददाताशिक्षा डेस्क - शिक्षा संवाददातासंपादकीय डेस्क - वरिष्ठ संपादकसांस्कृतिक डेस्क - सांस्कृतिक संपादकस्पोर्ट्स डेस्क - खेल संवाददाताPublish timeStory URLURL slug/article/gwalior-story-c5aafc0a
StoryWrite in reading order. Add images exactly where they should appear. Text block Image block01Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteग्वालियर में मानसून के मौसम के आगमन के साथ ही सड़कों पर आवारा कुत्तों का आक्रामक रवैया तेजी से बढ़ गया है। स्थिति यह है कि गली-मोहल्लों से लेकर मुख्य मार्गों तक नागरिकों का पैदल चलना मुश्किल हो गया है। प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, इस साल की शुरुआत यानी एक जनवरी से 31 अगस्त के बीच शहर में आठ हजार से अधिक लोग कुत्तों के हमले का शिकार होकर घायल हो चुके हैं। Add text below Add image below02Heading Paragraph Heading Subheading Quoteअस्पतालों में उमड़ रही मरीजों की भारी भीड़ Add text below Add image below03Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteडॉग बाइट के बढ़ते इन मामलों का सीधा असर शहर के प्रमुख स्वास्थ्य केंद्रों पर देखने को मिल रहा है। जयारोग्य अस्पताल के एक हजार बिस्तर वाले अस्पताल परिसर में गंभीर रूप से घायल मरीज पहुंच रहे हैं। इसके अलावा मुरार जिला अस्पताल और हजीरा सिविल अस्पताल में प्रतिदिन 70 से 80 लोग एंटी-रेबीज इंजेक्शन लगवाने पहुंच रहे हैं। बिरला नगर और थाटीपुर के चिकित्सालयों में तो बारिश का दौर शुरू होने के बाद से ऐसे मामलों में तीस प्रतिशत तक की वृद्धि दर्ज की गई है। Add text below Add image below04Heading Paragraph Heading Subheading Quoteरेबीज संक्रमण से सात मरीजों की मौत Add text below Add image below05Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteस्थिति की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि इस वर्ष जनवरी से जुलाई के बीच रेबीज की चपेट में आने से कुल सात लोगों की मौत हो चुकी है। इनमें से तीन मृतक ग्वालियर शहर के ही रहने वाले थे, जबकि चार अन्य मरीज आसपास के दूसरे जिलों से संबंधित थे। इन मौतों ने स्वास्थ्य विभाग और स्थानीय प्रशासन दोनों की चिंताएं बढ़ा दी हैं। Add text below Add image below06Heading Paragraph Heading Subheading Quoteनगर निगम के अभियानों पर उठ रहे सवाल Add text below Add image below07Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteबढ़ते हादसों के बाद नगर निगम के एनिमल बर्थ कंट्रोल यानी एबीसी प्रोग्राम और श्वान पकड़ने के अभियानों पर बड़े सवालिया निशान लग गए हैं। लाखों रुपये खर्च होने के बावजूद जमीन पर नसबंदी अभियान प्रभावी रूप से संचालित नहीं हो रहा है। जलभराव वाले क्षेत्रों, कचरे के ढेरों और संकरी गलियों में कुत्तों के झुंड खुलेआम घूम रहे हैं, लेकिन निगम का डॉग कैचर अमला सक्रिय नजर नहीं आ रहा है। Add text below Add image below08Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteस्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि हल्के घाव या खरोंच पर एंटी-रेबीज वैक्सीन दी जाती है, जबकि गहरे जख्म या चेहरे और गर्दन पर काटने के मामलों को श्रेणी तीन में रखा जाता है। ऐसे गंभीर मामलों में डॉक्टर की सलाह पर इम्यूनोग्लोबुलिन का इस्तेमाल किया जाता है। विशेषज्ञों की सलाह है कि कुत्ते के काटने पर तुरंत घाव को कम से कम पंद्रह मिनट तक साफ पानी और साबुन से धोना चाहिए। Add text below Add image below