Story detailsHeadline, summary, section, and byline.HeadlineSummaryमध्य प्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने खराब सड़कों के मामले में सख्त रुख अपनाते हुए एनएचएआई के 26 करोड़ से अधिक के भुगतान पर रोक लगा दी है। अदालत ने स्पष्ट किया कि केवल कागजी रिपोर्टों के आधार पर आम जनता को बदहाल मार्गों के हवाले नहीं किया जा सकता।Categoryदुर्घटनाराजनीतिसमस्या/problemस्थानीयअपराधशिक्षाखेलमनोरंजनव्यापारस्थानीयDistrictNo districtग्वालियरदेशमुरैनाभिंडश्योपुरदतियाशिवपुरीगुनाअशोकनगरAuthorEditorial deskMushtaq Ahmad Khan - Editor In Chiefiuyiuhकृषि डेस्क - कृषि संवाददाताक्राइम डेस्क - अपराध संवाददाताधर्म डेस्क - धर्म संपादकपर्यटन डेस्क - पर्यटन संवाददाताराजनीति डेस्क - राजनीतिक विश्लेषकव्यापार डेस्क - व्यापार संवाददाताशिक्षा डेस्क - शिक्षा संवाददातासंपादकीय डेस्क - वरिष्ठ संपादकसांस्कृतिक डेस्क - सांस्कृतिक संपादकस्पोर्ट्स डेस्क - खेल संवाददाताPublish timeStory URLURL slug/article/gwalior-story-ac10e15b
StoryWrite in reading order. Add images exactly where they should appear. Text block Image block01Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteग्वालियर अंचल में बदहाल और टूटी-फूट सड़कों की समस्या को लेकर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने मंगलवार को कड़ा रुख अख्तियार किया। अदालत ने नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया यानी एनएचएआई की कार्यशैली पर गहरी नाराजगी जताई और सड़क निर्माण की गुणवत्ता को लेकर तीखे सवाल खड़े किए। Add text below Add image below02Heading Paragraph Heading Subheading Quoteसड़क निर्माण की गुणवत्ता पर उठे गंभीर सवाल Add text below Add image below03Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteसुनवाई के दौरान अदालत ने कंसेशनायर को किए जाने वाले 26 करोड़ 53 लाख रुपए के एन्युइटी भुगतान पर रोक लगाने के निर्देश दिए। कोर्ट ने यह भी आदेशित किया कि इस रोकी गई राशि को बैंक में सावधि जमा यानी एफडीआर के रूप में सुरक्षित रखा जाए। अदालत के समक्ष पेश की गई एनएचएआई की अपनी नेटवर्क सर्वे व्हीकल रिपोर्ट में ही सड़कों की स्थिति तय मानकों के विपरीत पाई गई थी। Add text below Add image below04Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteइस स्थिति पर कड़ा असंतोष व्यक्त करते हुए खंडपीठ ने टिप्पणी की कि केवल कागजी रिपोर्टों के भरोसे क्षेत्र की जनता को खराब एवं खतरनाक सड़कों के सहारे नहीं छोड़ा जा सकता। Add text below Add image below05Heading Paragraph Heading Subheading Quoteनगर निगम के पैचवर्क और शराब दुकानों पर भी नजर Add text below Add image below06Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteन्यायालय ने इस मामले में दो अन्य प्रमुख बिंदुओं पर भी कड़े निर्देश जारी किए हैं। अदालत ने कहा कि नगर निगम द्वारा शहर में करोड़ों रुपए खर्च करके जो पैचवर्क कराए गए हैं, उनकी भी स्वतंत्र जांच कराई जाएगी ताकि यह स्पष्ट हो सके कि कार्य निर्धारित मापदंडों के अनुसार हुआ है या नहीं। Add text below Add image below07Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteइसके अतिरिक्त, हाईकोर्ट ने राष्ट्रीय राजमार्गों के किनारे संचालित हो रही शराब की दुकानों की दूरी को लेकर भी राज्य सरकार से जवाब तलब किया है। अदालत ने पूछा है कि आखिर शहरी और ग्रामीण इलाकों के लिए शराब दुकानों की दूरी तय करने को लेकर अलग-अलग प्रावधान क्यों रखे गए हैं। Add text below Add image below08Heading Paragraph Heading Subheading Quoteअब आगामी 16 अक्टूबर को होगी अगली सुनवाई Add text below Add image below09Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteराज्य शासन को शराब दुकानों के नियमों से जुड़े तमाम पहलुओं पर एक सप्ताह के भीतर अपना जवाब अदालत में पेश करने के निर्देश दिए गए हैं। इस बहुचर्चित मामले की अगली सुनवाई आगामी 16 अक्टूबर को निर्धारित की गई है, जिस पर स्थानीय नागरिकों और प्रशासन की निगाहें टिकी हुई हैं। Add text below Add image below