Story detailsHeadline, summary, section, and byline.HeadlineSummaryकेंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया सोमवार शाम ट्रेन से ग्वालियर पहुंचे, जहां रेलवे स्टेशन पर कार्यकर्ताओं ने उनका भव्य स्वागत किया। इसके बाद उन्होंने गोरखी स्थित देवघर पहुंचकर बाबा मंसूर अली शाह के सालाना उर्स में हिस्सा लिया और पारंपरिक पूजा-अर्चना की।Categoryदुर्घटनाराजनीतिसमस्या/problemस्थानीयअपराधशिक्षाखेलमनोरंजनव्यापारस्थानीयDistrictNo districtग्वालियरदेशमुरैनाभिंडश्योपुरदतियाशिवपुरीगुनाअशोकनगरAuthorEditorial deskMushtaq Ahmad Khan - Editor In Chiefiuyiuhकृषि डेस्क - कृषि संवाददाताक्राइम डेस्क - अपराध संवाददाताधर्म डेस्क - धर्म संपादकपर्यटन डेस्क - पर्यटन संवाददाताराजनीति डेस्क - राजनीतिक विश्लेषकव्यापार डेस्क - व्यापार संवाददाताशिक्षा डेस्क - शिक्षा संवाददातासंपादकीय डेस्क - वरिष्ठ संपादकसांस्कृतिक डेस्क - सांस्कृतिक संपादकस्पोर्ट्स डेस्क - खेल संवाददाताPublish timeStory URLURL slug/article/gwalior-story-9c74a875
StoryWrite in reading order. Add images exactly where they should appear. Text block Image block01Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteकेंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया सोमवार शाम रेल मार्ग के जरिए ग्वालियर पहुंचे। रेलवे स्टेशन पर उनके आगमन पर बड़ी संख्या में मौजूद समर्थकों और पार्टी कार्यकर्ताओं ने उनका गर्मजोशी के साथ स्वागत किया। स्थानीय प्रवास के दौरान उनका यह दौरा धार्मिक और पारंपरिक कार्यक्रमों के चलते चर्चा में रहा। Add text below Add image below02Heading Paragraph Heading Subheading Quoteदेवघर में पारंपरिक उर्स में हुए शामिल Add text below Add image below03Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteग्वालियर पहुंचने के तुरंत बाद केंद्रीय मंत्री सिंधिया गोरखी स्थित देवघर पहुंचे। यहां वे बाबा मंसूर अली शाह के सालाना उर्स में शामिल हुए। सिंधिया परिवार के मुखिया के रूप में उन्होंने पूरी परंपरा और विधि-विधान के साथ बाबा की पूजा-अर्चना की और करीब एक घंटे तक देवघर में समय बिताया। Add text below Add image below04Heading Paragraph Heading Subheading Quoteतीन सदियों पुरानी है यह अनूठी परंपरा Add text below Add image below05Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteसिंधिया परिवार के करीबी बाल खांडे के अनुसार, बाबा मंसूर अली शाह के सालाना उर्स में सिंधिया परिवार के मुखिया के शामिल होने की यह परंपरा लगभग 300 साल पुरानी है। इस आयोजन की विशेषता यह है कि बाबा की पूजा हिंदू और मुस्लिम दोनों पद्धतियों के अनुसार संपन्न की जाती है। बाबा मंसूर अली शाह को सिंधिया परिवार का मार्गदर्शक और कुलगुरु भी माना जाता है, जिसके चलते परिवार के मुखिया हर साल यहां हाजिरी लगाते हैं। Add text below Add image below06Heading Paragraph Heading Subheading Quoteफूलों से तैयार होता है शिवलिंग और पगड़ी की रस्म Add text below Add image below07Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteइस उर्स की खास रस्म के तहत देवघर में बाबा के सम्मान में सबसे पहले चादर बिछाई जाती है। इसके सामने लगभग चार से पांच फीट की ऊंचाई पर फूलों से एक भव्य शिवलिंग तैयार किया जाता है। इसके पश्चात सिंधिया परिवार की ओर से उस शिवलिंग को सम्मान के साथ पगड़ी पहनाई जाती है, जिसके बाद परिवार के मुखिया उनके समक्ष बैठकर ध्यान और आराधना करते हैं। Add text below Add image below08Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteइस पूरी परंपरा में आराधना की अवधि पहले से निश्चित नहीं होती है। यह तब तक जारी रहती है जब तक शिवलिंग से एक पुष्प अपने आप नीचे चादर पर नहीं गिर जाता। इस पुष्प के गिरने को बाबा द्वारा पूजा स्वीकार करने और आशीर्वाद मिलने का प्रतीक माना जाता है। इस बार भी करीब एक घंटे की आराधना के बाद पुष्प चादर पर गिरा, जिसके बाद पूजा संपन्न हुई और केंद्रीय मंत्री वहां से रवाना हुए। Add text below Add image below