Story detailsHeadline, summary, section, and byline.HeadlineSummaryप्रदेशभर में हो रही निलंबन की कार्रवाई और नई जिम्मेदारियों के विरोध में ग्वालियर के करीब 300 पटवारी कलेक्टर परिसर के बाहर धरने पर बैठ गए हैं। पटवारियों ने स्वामित्व योजना के तहत उन्हें निष्पादक बनाए जाने को लेकर आपत्ति जताई है।Categoryदुर्घटनाराजनीतिसमस्या/problemस्थानीयअपराधशिक्षाखेलमनोरंजनव्यापारस्थानीयDistrictNo districtग्वालियरदेशमुरैनाभिंडश्योपुरदतियाशिवपुरीगुनाअशोकनगरAuthorEditorial deskMushtaq Ahmad Khan - Editor In Chiefiuyiuhकृषि डेस्क - कृषि संवाददाताक्राइम डेस्क - अपराध संवाददाताधर्म डेस्क - धर्म संपादकपर्यटन डेस्क - पर्यटन संवाददाताराजनीति डेस्क - राजनीतिक विश्लेषकव्यापार डेस्क - व्यापार संवाददाताशिक्षा डेस्क - शिक्षा संवाददातासंपादकीय डेस्क - वरिष्ठ संपादकसांस्कृतिक डेस्क - सांस्कृतिक संपादकस्पोर्ट्स डेस्क - खेल संवाददाताPublish timeStory URLURL slug/article/gwalior-story-8969fb4e
StoryWrite in reading order. Add images exactly where they should appear. Text block Image block01Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteग्वालियर जिले में देवास के एक मामले में सेवा समाप्ति और प्रदेश के अन्य हिस्सों में चल रही निलंबन की दंडात्मक कार्रवाई के खिलाफ पटवारियों ने मोर्चा खोल दिया है। अपनी विभिन्न मांगों को लेकर जिले के लगभग 300 पटवारी कलेक्ट्रेट परिसर स्थित आजीविका दीदी कैफे के बाहर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर बैठ गए हैं। Add text below Add image below02Heading Paragraph Heading Subheading Quoteकलेक्टर द्वारा निलंबन के बाद भड़का आक्रोश Add text below Add image below03Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteहाल ही में जिला कलेक्टर रुचिका चौहान ने कार्य में कथित लापरवाही बरतने के आरोप में 19 पटवारियों को निलंबित करने के आदेश दिए थे। इस प्रशासनिक कार्रवाई के बाद से मैदानी अमले में विरोध के सुर तेज हो गए हैं और पटवारी संघ ने खुलकर असंतोष जताना शुरू कर दिया है। Add text below Add image below04Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteमुख्य विवाद ‘स्वामित्व अधिकार अभिलेख निष्पादन एवं पंजीयन-2026’ के तहत पटवारियों को ‘निष्पादक’ (Executant) बनाए जाने को लेकर है। आंदोलनकारियों का कहना है कि यह नई जिम्मेदारी उनके मूल कार्यक्षेत्र और अधिकारों से बाहर है, जिससे उन पर अनावश्यक दबाव बन रहा है। Add text below Add image below05Heading Paragraph Heading Subheading Quoteस्वामित्व योजना और डिजिटल हस्ताक्षर पर सवाल Add text below Add image below06Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteधरने पर बैठे पटवारी लखन लाल सोनी ने जानकारी दी कि केंद्र सरकार ने वर्ष 2020 में स्वामित्व योजना की शुरुआत की थी। इसके अंतर्गत ग्रामीण आबादी वाले क्षेत्रों का ड्रोन सर्वे कराकर नक्शे और अधिकार अभिलेख तैयार किए गए थे, जो पहले ही जारी हो चुके हैं। इन दस्तावेजों के आधार पर ग्रामीण खसरों के जरिए अपनी संपत्ति का लेनदेन और बैंकों से लोन ले सकते हैं। Add text below Add image below07Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteविरोध का केंद्रबिंदु 17 सितंबर से लागू हुई वह नई व्यवस्था है, जिसके तहत पटवारियों को निष्पादक बनाते हुए उनकी व्यक्तिगत यूजर आईडी का उपयोग किया जा रहा है। Add text below Add image below08Heading Paragraph Heading Subheading Quoteपंजीयन अधिनियम और कानूनी अधिकार का तर्क Add text below Add image below09Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteपटवारियों का स्पष्ट तर्क है कि पंजीयन अधिनियम, 1908 के अनुसार संपत्ति के हस्तांतरण और पंजीयन की कानूनी प्रक्रिया तय होती है। चूंकि पटवारी भूमि के वास्तविक स्वामी नहीं होते, इसलिए उन्हें निष्पादक की भूमिका में खड़ा करना नियम विरुद्ध है। उनका मानना है कि रजिस्ट्री से जुड़े कार्य पंजीयन विभाग के अधिकारियों के अधिकार क्षेत्र में आते हैं। Add text below Add image below10Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteधरना प्रदर्शन में शामिल महिला पटवारियों ने बताया कि उन्होंने किसी प्रकार की लापरवाही नहीं की है और इस संबंध में वे कलेक्टर के सामने भी अपना पक्ष रख चुकी हैं। इस मामले को लेकर प्रांतीय स्तर पर वरिष्ठ अधिकारियों और शासन स्तर के मंत्रियों से भी बातचीत जारी है। Add text below Add image below11Heading Paragraph Heading Subheading Quoteमांगें पूरी होने तक ऑनलाइन कार्यों से दूरी Add text below Add image below12Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteमध्यप्रदेश पटवारी संघ के पत्र क्रमांक 426/पट०संघ०/2026 के आह्वान पर शुरू हुए इस आंदोलन के तहत ग्वालियर के पटवारियों ने दो टूक कह दिया है। जब तक उन्हें निष्पादक की भूमिका से पूरी तरह मुक्त नहीं किया जाता और निलंबित किए गए साथियों के आदेश वापस नहीं लिए जाते, तब तक वे प्रांतीय निर्देशों के तहत ऑनलाइन राजस्व कार्यों से दूर रहकर विरोध दर्ज कराते रहेंगे। Add text below Add image below