Story detailsHeadline, summary, section, and byline.HeadlineSummaryग्वालियर की विशेष अदालत ने 2013 की पुलिस एसआई भर्ती परीक्षा में सॉल्वर बैठाने के मामले में फैसला सुनाया है। अदालत ने असली उम्मीदवार और उसकी जगह परीक्षा दे रहे सॉल्वर को धोखाधड़ी तथा अन्य धाराओं में दोषी करार दिया है।Categoryदुर्घटनाराजनीतिसमस्या/problemस्थानीयअपराधशिक्षाखेलमनोरंजनव्यापारस्थानीयDistrictNo districtग्वालियरदेशमुरैनाभिंडश्योपुरदतियाशिवपुरीगुनाअशोकनगरAuthorEditorial deskMushtaq Ahmad Khan - Editor In Chiefiuyiuhकृषि डेस्क - कृषि संवाददाताक्राइम डेस्क - अपराध संवाददाताधर्म डेस्क - धर्म संपादकपर्यटन डेस्क - पर्यटन संवाददाताराजनीति डेस्क - राजनीतिक विश्लेषकव्यापार डेस्क - व्यापार संवाददाताशिक्षा डेस्क - शिक्षा संवाददातासंपादकीय डेस्क - वरिष्ठ संपादकसांस्कृतिक डेस्क - सांस्कृतिक संपादकस्पोर्ट्स डेस्क - खेल संवाददाताPublish timeStory URLURL slug/article/gwalior-story-80775ef7
StoryWrite in reading order. Add images exactly where they should appear. Text block Image block01Heading Paragraph Heading Subheading Quoteवर्ष 2013 की सब इंस्पेक्टर भर्ती से जुड़ा है मामला Add text below Add image below02Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteमध्य प्रदेश कर्मचारी चयन मंडल यानी व्यापमं द्वारा वर्ष 2013 में आयोजित की गई पुलिस सब इंस्पेक्टर भर्ती परीक्षा में फर्जीवाड़े को लेकर ग्वालियर के सीजेएम की विशेष अदालत ने बुधवार को एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया। इस प्रकरण में अदालत ने असली अभ्यर्थी विपिन कुमार और उसकी जगह परीक्षा में बैठा सॉल्वर अमितेश, दोनों को ही दोषी माना है। Add text below Add image below03Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteन्यायलय ने दोनों आरोपियों को आपराधिक षड्यंत्र रचने, धोखाधड़ी करने, प्रतिरुपण, दस्तावेज में कूट रचना करने और मध्य प्रदेश मान्यता प्राप्त परीक्षा अधिनियम के प्रावधानों के तहत दोषी करार दिया है। हालांकि, अदालत ने उन्हें कुछ गंभीर धाराओं जैसे 467, 468 और 471 से बरी कर दिया है, लेकिन अन्य सुसंगत धाराओं में दोष सिद्ध पाया है। फिलहाल सजा के बिंदु पर फैसला सुरक्षित रखा गया है। Add text below Add image below04Heading Paragraph Heading Subheading Quoteअदालत की सख्त टिप्पणी, योग्य छात्रों का टूटता है मनोबल Add text below Add image below05Quote Paragraph Heading Subheading Quoteअदालत ने अपनी टिप्पणी में कहा कि इस तरह के अपराधों से संपूर्ण चयन प्रक्रिया, युवा वर्ग और समाज पर गंभीर प्रभाव पड़ता है। अनुचित साधनों के इस्तेमाल से पूरी व्यवस्था पर सवालिया निशान लगते हैं और मेहनती व योग्य छात्रों का मनोबल टूटता है। ऐसे मामलों में न्याय व्यवस्था का कड़ा रुख होना जरूरी है। Add text below Add image below06Heading Paragraph Heading Subheading Quoteपरीक्षा केंद्र के गेट पर ही धरा गया था फर्जी परीक्षार्थी Add text below Add image below07Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteइस पूरे मामले की विवेचना डीएसपी मुकुल रावत द्वारा की गई थी। घटना 9 मार्च 2014 की है, जब गुना के शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय में परीक्षा केंद्र बनाया गया था। परीक्षा शुरू होने से पूर्व केंद्र पर तैनात वीक्षकों और केंद्राध्यक्ष डॉ. सुमन श्रीवास्तव को एक परीक्षार्थी की गतिविधि पर संदेह हुआ। Add text below Add image below08Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteछानबीन के दौरान यह स्पष्ट हुआ कि मूल अभ्यर्थी विपिन कुमार के स्थान पर अमितेश परीक्षा में शामिल होने की फिराक में था। जब प्रवेश पत्र की तस्वीर का मिलान चेहरे और वोटर आईडी कार्ड से किया गया, तो भारी अंतर पाया गया। इसके बाद सतर्कता दिखाते हुए सॉल्वर अमितेश को मुख्य द्वार पर ही दबोच लिया गया। Add text below Add image below09Heading Paragraph Heading Subheading Quoteबचाव पक्ष की दलीलें खारिज, षड्यंत्र साबित Add text below Add image below10Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteसुनवाई के दौरान बचाव पक्ष की ओर से यह तर्क रखा गया था कि दोनों आरोपियों के बीच कोई सीधा संपर्क प्रमाणित नहीं हुआ है और सॉल्वर मुख्य परीक्षा हॉल के अंदर भी प्रवेश नहीं कर पाया था। हालांकि, अदालत ने सर्वोच्च न्यायालय के विभिन्न फैसलों का हवाला देते हुए इन तर्कों को सिरे से खारिज कर दिया। Add text below Add image below11Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteन्यायालय ने स्पष्ट किया कि आपराधिक षड्यंत्र का अपराध आपसी सहमति बनते ही पूर्ण हो जाता है। फर्जी प्रवेश पत्र तैयार करवाकर परीक्षा में बैठने का प्रयास करना ही इस साजिश को पूरी तरह से प्रमाणित करने के लिए पर्याप्त है। Add text below Add image below