Story detailsHeadline, summary, section, and byline.HeadlineSummaryग्वालियर के प्रसिद्ध अचलेश्वर महादेव मंदिर में स्थानीय व्यापारियों की गहरी आस्था जुड़ी हुई है। यहां कारोबारी अपनी दुकान और तिजोरी की चाबी को भगवान की पिंडी से स्पर्श कराकर दिन की शुरुआत करते हैं।Categoryदुर्घटनाराजनीतिसमस्या/problemस्थानीयअपराधशिक्षाखेलमनोरंजनव्यापारस्थानीयDistrictNo districtग्वालियरदेशमुरैनाभिंडश्योपुरदतियाशिवपुरीगुनाअशोकनगरAuthorEditorial deskMushtaq Ahmad Khan - Editor In Chiefiuyiuhकृषि डेस्क - कृषि संवाददाताक्राइम डेस्क - अपराध संवाददाताधर्म डेस्क - धर्म संपादकपर्यटन डेस्क - पर्यटन संवाददाताराजनीति डेस्क - राजनीतिक विश्लेषकव्यापार डेस्क - व्यापार संवाददाताशिक्षा डेस्क - शिक्षा संवाददातासंपादकीय डेस्क - वरिष्ठ संपादकसांस्कृतिक डेस्क - सांस्कृतिक संपादकस्पोर्ट्स डेस्क - खेल संवाददाताPublish timeStory URLURL slug/article/gwalior-story-73fa047c
StoryWrite in reading order. Add images exactly where they should appear. Text block Image block01Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteग्वालियर के लश्कर क्षेत्र में स्थित अचलेश्वर महादेव मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल तक सीमित नहीं है, बल्कि यह स्थानीय व्यापारिक समुदाय के लिए अटूट विश्वास का केंद्र भी बना हुआ है। शहर के बाजारों के खुलने से पहले ही सुबह सवेरे यहां व्यापारियों की आवाजाही शुरू हो जाती है। Add text below Add image below02Heading Paragraph Heading Subheading Quoteसाल के 365 दिन निभाई जाती है यह परंपरा Add text below Add image below03Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteसुबह करीब साढ़े छह बजे जब बाजार पूरी तरह जागते भी नहीं हैं, तब कई कारोबारी पूजा की थाली के साथ अपने शोरूम, दफ्तर या तिजोरी की चाबी लेकर मंदिर पहुंचते हैं। वे भगवान का जलाभिषेक करते हैं, बेलपत्र अर्पित करते हैं और इसके बाद चाबी को शिवलिंग से स्पर्श कराते हैं। Add text below Add image below04Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteशिवलिंग से चाबी छूने के बाद व्यापारी उसे माथे से लगाते हैं और फिर अपने व्यावसायिक प्रतिष्ठानों की ओर रवाना होते हैं। सराफा बाजार, टोपी बाजार और महाराज बाड़े के कई व्यापारी इस नियम को साल के 365 दिन बिना नागा निभाते आ रहे हैं। Add text below Add image below05Heading Paragraph Heading Subheading Quoteकारोबार में बरकत की है मान्यता Add text below Add image below06Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteस्थानीय दुकानदारों का मानना है कि बाबा अचलेश्वर के चरणों से स्पर्श कराई गई चाबी से दुकान या तिजोरी खोलने पर कारोबार में बरकत बनी रहती है। गहना ज्वेलर्स के संचालक राकेश मंगल का कहना है कि उनके क्षेत्र में यह पुरानी परंपरा लगातार चली आ रही है और व्यापारी दुकान खोलने से पहले मंदिर जरूर आते हैं। Add text below Add image below07Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteसराफा कारोबारी विनय सिंगल भी इसी मान्यता का पालन करते हैं। उनका कहना है कि वे नियमित रूप से दुकान के संचालन से पहले भगवान के दर्शन करते हैं और चाबी उनके चरणों में रखते हैं। ग्वालियर के कारोबारियों के बीच यह लोक आस्था पीढ़ियों से चली आ रही है। Add text below Add image below08Heading Paragraph Heading Subheading Quoteअचलेश्वर नाम के पीछे का दिलचस्प इतिहास Add text below Add image below09Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteइस मंदिर और इसके नाम के पीछे भी एक पुराना इतिहास जुड़ा हुआ है। सिंधिया काल के दौरान लश्कर इलाके में सड़क निर्माण का कार्य चल रहा था, तब यह शिवलिंग रास्ते के बीच आ गया था। जब इसे हटाने का प्रयास किया गया तो पिंडी अपनी जगह से टस से मस नहीं हुई। Add text below Add image below10Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteकहा जाता है कि पिंडी को हटाने के लिए पहले मजदूरों और फिर हाथियों की मदद ली गई थी। इसे जंजीरों से बांधकर खींचने की कोशिश भी असफल रही और खुदाई करने पर भी इसका छोर नहीं मिला। इसके बाद खुदाई रोककर शिवलिंग को यथावत छोड़ दिया गया। Add text below Add image below11Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteचूंकि यह शिवलिंग अपनी जगह से अचल रहा, इसलिए इसका नाम अचलेश्वर पड़ गया। व्यापारी इसी 'अचल' स्वरूप से अपनी कमाई और कारोबार की स्थिरता की कामना जोड़ते हैं और रोजाना अपनी दुकान की जिम्मेदारी भगवान को सौंपने भाव के साथ मंदिर पहुंचते हैं। Add text below Add image below