Story detailsHeadline, summary, section, and byline.HeadlineSummaryग्वालियर जिला उपभोक्ता आयोग ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में कहा है कि पैर में फ्रैक्चर के इलाज का बीमा दावा केवल मधुमेह होने के आधार पर खारिज नहीं किया जा सकता। आयोग ने रिलायंस जनरल इंश्योरेंस कंपनी को फटकार लगाते हुए बीमाधारक को इलाज का पूरा खर्च, मानसिक प्रताड़ना और वाद व्यय का भुगCategoryदुर्घटनाराजनीतिसमस्या/problemस्थानीयअपराधशिक्षाखेलमनोरंजनव्यापारस्थानीयDistrictNo districtग्वालियरदेशमुरैनाभिंडश्योपुरदतियाशिवपुरीगुनाअशोकनगरAuthorEditorial deskMushtaq Ahmad Khan - Editor In Chiefiuyiuhकृषि डेस्क - कृषि संवाददाताक्राइम डेस्क - अपराध संवाददाताधर्म डेस्क - धर्म संपादकपर्यटन डेस्क - पर्यटन संवाददाताराजनीति डेस्क - राजनीतिक विश्लेषकव्यापार डेस्क - व्यापार संवाददाताशिक्षा डेस्क - शिक्षा संवाददातासंपादकीय डेस्क - वरिष्ठ संपादकसांस्कृतिक डेस्क - सांस्कृतिक संपादकस्पोर्ट्स डेस्क - खेल संवाददाताPublish timeStory URLURL slug/article/gwalior-story-6d811621
StoryWrite in reading order. Add images exactly where they should appear. Text block Image block01Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteग्वालियर जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोषण आयोग ने एक अहम फैसले में यह स्पष्ट किया है कि किसी व्यक्ति के पैर में फ्रैक्चर के इलाज के लिए स्वास्थ्य बीमा दावा सिर्फ इस वजह से अस्वीकार नहीं किया जा सकता कि वह मधुमेह से पीड़ित है। आयोग ने इस तरह के दावे को रोकना अनुचित बताया है, क्योंकि वर्तमान जीवनशैली में मधुमेह एक सामान्य स्वास्थ्य समस्या बन गई है। Add text below Add image below02Heading Paragraph Heading Subheading Quoteबीमा कंपनी को फटकार और भुगतान का आदेश Add text below Add image below03Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteजिला उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद शर्मा और सदस्य रेवती रमण मिश्रा की पीठ ने रिलायंस जनरल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड के खिलाफ फैसला सुनाते हुए बीमाधारक के पक्ष में निर्णय दिया। आयोग ने टिप्पणी की कि ठोस चिकित्सीय प्रमाण के अभाव में केवल तकनीकी आधार पर बीमा दावे को अस्वीकार करना उपभोक्ता के प्रति अन्याय और सेवा में गंभीर त्रुटि मानी गई है। Add text below Add image below04Heading Paragraph Heading Subheading Quoteक्या था पूरा मामला? Add text below Add image below05Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteग्वालियर निवासी सुनील गुप्ता ने रिलायंस जनरल इंश्योरेंस से एक हेल्थ पॉलिसी ली थी। 16 सितंबर 2024 को एक दुर्घटना में गिरने से उनके टखने के ऊपर गंभीर फ्रैक्चर हो गया। उन्हें सर्वोदय हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया, जहां ऑपरेशन के जरिए उनके पैर में प्लेट डाली गई। इलाज पूरा होने के बाद, उन्होंने अस्पताल के खर्चों के लिए बीमा कंपनी के पास दावा प्रस्तुत किया। Add text below Add image below06Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteहालांकि, बीमा कंपनी ने यह कहते हुए दावा खारिज कर दिया कि सुनील गुप्ता को पॉलिसी लेने से पहले से ही मधुमेह था, जिसकी जानकारी उन्होंने नहीं दी थी। इसे पॉलिसी की शर्तों का उल्लंघन मानते हुए कंपनी ने भुगतान से मना कर दिया। Add text below Add image below07Heading Paragraph Heading Subheading Quoteआयोग ने पूछा - फ्रैक्चर का शुगर से क्या संबंध? Add text below Add image below08Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteमामले की सुनवाई के दौरान, आयोग ने बीमा कंपनी से पूछा कि आखिर पैर के फ्रैक्चर का मधुमेह से क्या सीधा संबंध है। आयोग ने पाया कि बीमा कंपनी कोई ऐसा चिकित्सीय रिकॉर्ड या विशेषज्ञ राय प्रस्तुत नहीं कर पाई, जो यह सिद्ध कर सके कि मधुमेह के कारण यह इलाज प्रभावित हुआ या दावा अमान्य हो गया। आयोग ने स्पष्ट किया कि हल्के स्तर का मधुमेह होना सामान्य है और केवल इसी आधार पर दुर्घटना से हुए फ्रैक्चर का बीमा दावा रोकना पूरी तरह से अनुचित है। Add text below Add image below09Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteआयोग ने रिलायंस जनरल इंश्योरेंस कंपनी को आदेश दिया है कि वह 45 दिनों के भीतर परिवादी सुनील गुप्ता को इलाज का खर्च 1 लाख 27 हजार 812 रुपये, मानसिक प्रताड़ना के लिए 5 हजार रुपये और वाद व्यय के रूप में 2 हजार रुपये का भुगतान करे। Add text below Add image below10Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteयह निर्णय उन लाखों बीमाधारकों के लिए एक महत्वपूर्ण मिसाल माना जा रहा है, जिनके दावे अक्सर तकनीकी कारणों या सामान्य पूर्व-मौजूदा बीमारियों का हवाला देकर खारिज कर दिए जाते हैं। आयोग ने स्पष्ट संदेश दिया है कि बीमा कंपनियां ठोस चिकित्सीय आधार के बिना मनमाने ढंग से दावे खारिज नहीं कर सकतीं। Add text below Add image below