Story detailsHeadline, summary, section, and byline.HeadlineSummaryग्वालियर रेलवे स्टेशन पर अपने पिता से बिछड़े दो छोटे भाई-बहन को जीआरपी पुलिस ने 'ऑपरेशन हमदर्द' के तहत उनके परिवार से मिला दिया है। बच्चे महोबा से शादी समारोह से लौट रहे थे और दिल्ली जाने के लिए दूसरी ट्रेन का इंतजार कर रहे थे, तभी यह घटना हुई।Categoryदुर्घटनाराजनीतिसमस्या/problemस्थानीयअपराधशिक्षाखेलमनोरंजनव्यापारस्थानीयDistrictNo districtग्वालियरदेशमुरैनाभिंडश्योपुरदतियाशिवपुरीगुनाअशोकनगरAuthorEditorial deskMushtaq Ahmad Khan - Editor In Chiefiuyiuhकृषि डेस्क - कृषि संवाददाताक्राइम डेस्क - अपराध संवाददाताधर्म डेस्क - धर्म संपादकपर्यटन डेस्क - पर्यटन संवाददाताराजनीति डेस्क - राजनीतिक विश्लेषकव्यापार डेस्क - व्यापार संवाददाताशिक्षा डेस्क - शिक्षा संवाददातासंपादकीय डेस्क - वरिष्ठ संपादकसांस्कृतिक डेस्क - सांस्कृतिक संपादकस्पोर्ट्स डेस्क - खेल संवाददाताPublish timeStory URLURL slug/article/gwalior-story-487a39c4
StoryWrite in reading order. Add images exactly where they should appear. Text block Image block01Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteग्वालियर रेलवे स्टेशन पर एक हृदय विदारक घटना में अपने पिता से बिछड़ गए दो मासूम बच्चों को राजकीय रेलवे पुलिस (जीआरपी) ने 'ऑपरेशन हमदर्द' अभियान के तहत उनके परिवार से सुरक्षित मिला दिया है। भीड़भाड़ वाले स्टेशन पर अकेले रोते हुए मिले इन भाई-बहनों को जीआरपी की त्वरित कार्रवाई के बाद राहत मिली। Add text below Add image below02Heading Paragraph Heading Subheading Quoteघटनाक्रम: पिता से कैसे बिछड़े बच्चे Add text below Add image below03Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteजीआरपी थाना प्रभारी दीपशिखा तोमर द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, ये बच्चे अपने पिता के साथ उत्तर प्रदेश के महोबा में एक वैवाहिक समारोह से लौट रहे थे। ग्वालियर रेलवे स्टेशन पर पहुंचने के बाद उन्हें दिल्ली के लिए एक अन्य ट्रेन पकड़नी थी। इसी दौरान, बच्चों के पिता अपना मोबाइल चार्जर लेने के लिए स्टेशन से बाहर चले गए। Add text below Add image below04Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteपिता के काफी देर तक वापस न लौटने पर दोनों छोटे बच्चे घबरा गए और स्टेशन परिसर में रोने लगे। उनकी यह स्थिति देखकर स्टेशन पर मौजूद यात्रियों का ध्यान उनकी ओर गया, लेकिन जीआरपी की टीम ने सक्रियता दिखाते हुए बच्चों को अपनी निगरानी में लिया। Add text below Add image below05Heading Paragraph Heading Subheading Quoteजीआरपी की तत्परता और पहचान प्रक्रिया Add text below Add image below06Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteस्टेशन पर नियमित गश्त के दौरान थाना प्रभारी दीपशिखा तोमर की नजर इन बच्चों पर पड़ी। उन्होंने तुरंत बच्चों को अपने संरक्षण में लिया, उन्हें सांत्वना दी और उनके परिवार के बारे में जानकारी जुटाने का प्रयास किया। बच्चों द्वारा दी गई अधूरी जानकारी के आधार पर जीआरपी ने दिल्ली में उनके पड़ोसियों से संपर्क साधा। Add text below Add image below07Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteजीआरपी ने वीडियो कॉल के माध्यम से बच्चों की पहचान उनके पड़ोसियों से कराई, जिन्होंने बच्चों की पुष्टि की और उनके परिवार से संपर्क स्थापित करने में मदद की। सभी आवश्यक जानकारियों का सत्यापन करने के बाद, जीआरपी ने बच्चों के पिता का पता लगा लिया। Add text below Add image below08Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteमंगलवार को सभी औपचारिकताओं को पूरा करने के बाद, जीआरपी ने दोनों बच्चों को उनके पिता को सौंप दिया। इस सफल पुनर्मिलन से बच्चों और उनके पिता, दोनों के चेहरे पर खुशी लौट आई। Add text below Add image below09Heading Paragraph Heading Subheading Quote'ऑपरेशन हमदर्द' की सफलता Add text below Add image below10Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteजीआरपी अधिकारियों ने बताया कि 'ऑपरेशन हमदर्द' का मुख्य उद्देश्य रेलवे स्टेशनों पर बिछड़े हुए, लावारिस या संकटग्रस्त बच्चों और जरूरतमंद व्यक्तियों को उनके परिजनों तक सुरक्षित पहुंचाना है। इस अभियान के तहत अब तक आठ से अधिक बच्चों को उनके परिवारों से मिलाया जा चुका है, और यह घटना भी इस मानवीय पहल की एक महत्वपूर्ण सफलता है। Add text below Add image below