Story detailsHeadline, summary, section, and byline.HeadlineSummaryहाईकोर्ट के आदेश के बावजूद सेवानिवृत्त कर्मचारी को बकाए का भुगतान न करने पर अदालत ने कड़ा रुख अपनाया है। जल संसाधन विभाग के प्रमुख सचिव और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों की पेशी न होने पर जमानती वारंट जारी किए गए हैं।Categoryदुर्घटनाराजनीतिसमस्या/problemस्थानीयअपराधशिक्षाखेलमनोरंजनव्यापारस्थानीयDistrictNo districtग्वालियरदेशमुरैनाभिंडश्योपुरदतियाशिवपुरीगुनाअशोकनगरAuthorEditorial deskMushtaq Ahmad Khan - Editor In Chiefiuyiuhकृषि डेस्क - कृषि संवाददाताक्राइम डेस्क - अपराध संवाददाताधर्म डेस्क - धर्म संपादकपर्यटन डेस्क - पर्यटन संवाददाताराजनीति डेस्क - राजनीतिक विश्लेषकव्यापार डेस्क - व्यापार संवाददाताशिक्षा डेस्क - शिक्षा संवाददातासंपादकीय डेस्क - वरिष्ठ संपादकसांस्कृतिक डेस्क - सांस्कृतिक संपादकस्पोर्ट्स डेस्क - खेल संवाददाताPublish timeStory URLURL slug/article/gwalior-story-3578cc02
StoryWrite in reading order. Add images exactly where they should appear. Text block Image block01Heading Paragraph Heading Subheading Quoteअदालत की चेतावनी के बाद भी नहीं पहुंचे अफसर Add text below Add image below02Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteग्वालियर में एक सेवानिवृत्त कर्मचारी को समय पर उसका वित्तीय भुगतान न मिलना जल संसाधन विभाग के बड़े अधिकारियों को भारी पड़ गया है। मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की चेतावनी के बावजूद विभाग के तीन प्रमुख अधिकारी अदालत में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित नहीं हुए। Add text below Add image below03Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteखास बात यह रही कि सुनवाई के दौरान इन अधिकारियों की तरफ से ना तो अदालत में पेशी से छूट का कोई आवेदन दिया गया और ना ही उपस्थिति के लिए अतिरिक्त समय की मांग की गई। इस ढिलाई को गंभीरता से लेते हुए अदालत ने अब तीनों अफसरों के खिलाफ जमानती वारंट जारी किए हैं। Add text below Add image below04Heading Paragraph Heading Subheading Quoteजस्टिस अमित सेठ की अदालत में हुई सुनवाई Add text below Add image below05Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteयह पूरा मामला जस्टिस अमित सेठ की अदालत में चल रही सेवानिवृत्त टाइमकीपर कामता सिंह गुर्जर की अवमानना याचिका से जुड़ा हुआ है। शुक्रवार को हुई इस सुनवाई में याचिकाकर्ता की तरफ से अधिवक्ता अरुण कटारे ने पक्ष रखा, जबकि अधिकारियों की पैरवी के लिए अधिवक्ता विशन कुशवाह कोर्ट में मौजूद रहे। Add text below Add image below06Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteमामले के तथ्यों के अनुसार, उच्च न्यायालय ने नवंबर 2023 में ही कामता सिंह गुर्जर को समान वेतनमान और उसके सभी एरियर का भुगतान दो महीने के भीतर करने के सख्त निर्देश दिए थे। Add text below Add image below07Heading Paragraph Heading Subheading Quoteअगस्त में दिया था चार हफ्ते का भरोसा Add text below Add image below08Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteलंबी प्रक्रिया के बाद अगस्त 2026 में विभाग की ओर से अदालत को भरोसा दिलाया गया था कि चार सप्ताह के भीतर याचिकाकर्ता का पूरा भुगतान कर दिया जाएगा। इस कड़ी में बीते 16 सितंबर को भुगतान की प्रशासनिक स्वीकृति भी जारी हो चुकी थी। Add text below Add image below09Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteइसके बावजूद याचिकाकर्ता के खाते में तयशुदा रकम नहीं पहुंची, जिसके बाद अदालत ने इस अवमानना मामले में अधिकारियों की उपस्थिति सुनिश्चित करने के यह कड़े निर्देश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई अब 27 अक्टूबर को निर्धारित की गई है। Add text below Add image below