Story detailsHeadline, summary, section, and byline.HeadlineSummaryकेंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय द्वारा जारी स्वच्छ वायु सर्वेक्षण 2025-26 में ग्वालियर को 30वीं रैंक मिली है। शहर को 200 में से 157 अंक प्राप्त हुए हैं और पिछली बार की तुलना में दो पायदान का नुकसान हुआ है।Categoryदुर्घटनाराजनीतिसमस्या/problemस्थानीयअपराधशिक्षाखेलमनोरंजनव्यापारस्थानीयDistrictNo districtग्वालियरदेशमुरैनाभिंडश्योपुरदतियाशिवपुरीगुनाअशोकनगरAuthorEditorial deskMushtaq Ahmad Khan - Editor In Chiefiuyiuhकृषि डेस्क - कृषि संवाददाताक्राइम डेस्क - अपराध संवाददाताधर्म डेस्क - धर्म संपादकपर्यटन डेस्क - पर्यटन संवाददाताराजनीति डेस्क - राजनीतिक विश्लेषकव्यापार डेस्क - व्यापार संवाददाताशिक्षा डेस्क - शिक्षा संवाददातासंपादकीय डेस्क - वरिष्ठ संपादकसांस्कृतिक डेस्क - सांस्कृतिक संपादकस्पोर्ट्स डेस्क - खेल संवाददाताPublish timeStory URLURL slug/article/gwalior-story-1e27a89c
StoryWrite in reading order. Add images exactly where they should appear. Text block Image block01Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteग्वालियर में वायु प्रदूषण पर अंकुश लगाने और आबोहवा दुरुस्त करने के लिए किए जा रहे सरकारी प्रयासों की पोल केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की ताजा रैंकिंग ने खोल दी है। राष्ट्रीय स्वच्छ वायु दिवस के अवसर पर सोमवार को स्वच्छ वायु सर्वेक्षण 2025-26 के परिणाम घोषित किए गए, जिनमें शहर की स्थिति निराशाजनक रही है। Add text below Add image below02Heading Paragraph Heading Subheading Quoteदस लाख से अधिक आबादी वाले शहरों में पिछड़ा ग्वालियर Add text below Add image below03Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteदस लाख से अधिक आबादी वाले देश के 48 प्रमुख शहरों की इस प्रतिस्पर्धा में ग्वालियर को 157 अंकों के साथ 30वां स्थान मिला है। इस सूची में देश के अन्य शहर काफी आगे रहे हैं, जिनमें लखनऊ पहले स्थान पर, इंदौर दूसरे, जबलपुर तीसरे और भोपाल चौथे पायदान पर काबिज रहा है। पिछले सर्वेक्षण में ग्वालियर 28वें स्थान पर था, जो अब दो पायदान लुढ़ककर नीचे आ गया है। हालांकि, नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम के बेस ईयर 2020-21 के मुकाबले औसत पीएम-10 के स्तर में 13.97 प्रतिशत की मामूली कमी दर्ज की गई है, जो 136 से घटकर 117 पर आ पहुंचा है। Add text below Add image below04Heading Paragraph Heading Subheading Quoteइन मोर्चों पर गंवाने पड़े अंक Add text below Add image below05Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteसमीक्षा के दौरान विभागों द्वारा प्रस्तुत स्व-मूल्यांकन में 200 में से 187 अंक दर्शाए गए थे, लेकिन केंद्रीय मूल्यांकन के बाद वास्तविक स्कोर घटकर 157 रह गया। नगर निगम सीमा के दस किलोमीटर के दायरे में संचालित पारंपरिक ईंट-भट्टों को आधुनिक तकनीक पर शिफ्ट न किए जाने के कारण इस श्रेणी में शून्य अंक मिला है। इसके अलावा, इलेक्ट्रिक वाहनों के मुकाबले पर्याप्त सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशन तैयार न होना, प्रति एक लाख आबादी पर छह प्रदूषण जांच केंद्रों के मानक के विरुद्ध कम और सक्रिय पीयूसी सेंटर होना तथा पेट्रोल पंपों की शत-प्रतिशत की बजाय केवल साठ प्रतिशत जांच होना मुख्य वजहें रहीं जिनसे स्कोर प्रभावित हुआ। Add text below Add image below06Heading Paragraph Heading Subheading Quoteकचरा प्रबंधन और धूल नियंत्रण में मिला लाभ Add text below Add image below07Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteभले ही कई मानकों पर शहर पिछड़ गया हो, लेकिन कुछ क्षेत्रों में अच्छा प्रदर्शन भी दर्ज किया गया है। घर-घर कचरा संग्रहण, कचरा प्रोसेसिंग, लीगेसी वेस्ट का निपटान और प्लास्टिक कचरा संग्रहण के मामलों में बेहतर अंक मिले हैं। सड़क की धूल पर नियंत्रण के लिए रोड शोल्डर पेवमेंट, कच्ची सड़कों के डामरीकरण, ग्रीनबेल्ट विकास और मैकेनिकल स्वीपिंग जैसे कार्यों को सराहा गया है। साथ ही, औद्योगिक क्षेत्रों में ऑनलाइन मॉनिटरिंग सिस्टम और उद्योगों को स्वच्छ ईंधन अपनाने की प्रक्रिया में भी प्रगति देखी गई है। Add text below Add image below08Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteप्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि यह परिणाम उनके लिए एक सीख की तरह है और कमियों को दूर करने के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे। परिवहन विभाग ने शहर में पीयूसी सेंटरों की संख्या बढ़ाने की बात कही है, जबकि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और अन्य विभागों के स्तर पर भी व्यवस्थाओं की समीक्षा की जा रही है ताकि आगामी समय में आबोहवा को और बेहतर बनाया जा सके। Add text below Add image below