Story detailsHeadline, summary, section, and byline.HeadlineSummaryग्वालियर शहर में मानसून की शुरुआत के साथ ही जलभराव की समस्या एक बार फिर गहरा गई है, जिससे कई इलाकों में जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। नगर निगम जहां नालों की सफाई के दावे कर रहा है, वहीं हकीकत में अतिक्रमण और गंदगी के कारण जल निकासी बाधित है, जिस पर हाईकोर्ट और पार्षदों ने भी चिंतCategoryदुर्घटनाराजनीतिसमस्या/problemस्थानीयअपराधशिक्षाखेलमनोरंजनव्यापारस्थानीयDistrictNo districtग्वालियरदेशमुरैनाभिंडश्योपुरदतियाशिवपुरीगुनाअशोकनगरAuthorEditorial deskMushtaq Ahmad Khan - Editor In Chiefiuyiuhकृषि डेस्क - कृषि संवाददाताक्राइम डेस्क - अपराध संवाददाताधर्म डेस्क - धर्म संपादकपर्यटन डेस्क - पर्यटन संवाददाताराजनीति डेस्क - राजनीतिक विश्लेषकव्यापार डेस्क - व्यापार संवाददाताशिक्षा डेस्क - शिक्षा संवाददातासंपादकीय डेस्क - वरिष्ठ संपादकसांस्कृतिक डेस्क - सांस्कृतिक संपादकस्पोर्ट्स डेस्क - खेल संवाददाताPublish timeStory URLURL slug/article/gwalior-story-12be4670
StoryWrite in reading order. Add images exactly where they should appear. Text block Image block01Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteग्वालियर में मानसून की पहली बारिश ने ही शहर की जल निकासी व्यवस्था की पोल खोल दी है। शहर के कई हिस्से पानी में डूब गए हैं, जिससे आम जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। नगर निगम भले ही नालों की सफाई के बड़े-बड़े दावे कर रहा हो, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। Add text below Add image below02Heading Paragraph Heading Subheading Quoteनालों पर अतिक्रमण: जलभराव की मुख्य वजह Add text below Add image below03Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteशहर में जलभराव की सबसे बड़ी वजह नालों पर बढ़ता अतिक्रमण और उनमें जमा गंदगी है। आंकड़ों के मुताबिक, ग्वालियर में कुल 439 छोटे-बड़े नाले हैं। इनमें से अधिकांश नालों पर लंबे समय से अवैध कब्जे हैं, जिसके कारण बारिश का पानी शहर से बाहर नहीं निकल पाता। इसी का नतीजा है कि हर साल लगभग 200 स्थानों पर जलभराव की स्थिति बन जाती है। इस बार भी शुरुआती बारिश में कई सड़कें और आवासीय कॉलोनियां पानी में डूब गईं। Add text below Add image below04Heading Paragraph Heading Subheading Quoteनिगम के दावे और जनता की शिकायतें Add text below Add image below05Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteनगर निगम के डिप्टी कमिश्नर प्रतीक राव ने जानकारी दी है कि 439 में से 419 नालों की सफाई का काम पूरा कर लिया गया है। उन्होंने यह भी बताया कि नालों पर हुए अतिक्रमण को चिन्हित कर लिया गया है और जल्द ही उन्हें हटाने की कार्रवाई शुरू की जाएगी। Add text below Add image below06Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteहालांकि, स्थानीय निवासियों का कहना है कि निगम के ये दावे सिर्फ कागजों तक ही सीमित हैं। उनका आरोप है कि कई नालों में अब भी गाद और कचरा भरा हुआ है, जबकि अतिक्रमण के कारण पानी का बहाव पूरी तरह रुका हुआ है। यही वजह है कि थोड़ी सी बारिश में ही सड़कें तालाब का रूप ले लेती हैं और लोगों को आवागमन में भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। Add text below Add image below07Heading Paragraph Heading Subheading Quoteराजनीतिक और न्यायिक दबाव Add text below Add image below08Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteइस गंभीर समस्या को लेकर नगर निगम परिषद में कांग्रेस पार्षदों ने भी अपना विरोध दर्ज कराया है। वहीं, इस मामले से जुड़ी एक जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान उच्च न्यायालय ने भी नगर निगम की तैयारियों पर कड़ी नाराजगी व्यक्त की थी। Add text below Add image below09Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteजनता की लगातार बढ़ती शिकायतों और चारों ओर से पड़ रहे दबाव के बीच, नगर निगम सभापति ने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं। उन्होंने 15 दिनों के भीतर सभी नालों की सफाई और अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई पूरी करने को कहा है। अब शहरवासी बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं कि निगम के ये दावे कब तक हकीकत में बदलते हैं और उन्हें जलभराव की समस्या से निजात मिलती है। Add text below Add image below