Story detailsHeadline, summary, section, and byline.HeadlineSummaryग्वालियर के प्रसिद्ध हजारेश्वर महादेव मंदिर में सावन के अंतिम सोमवार को सुबह से ही भक्तों का तांता लगा हुआ है। इस पांच सौ साल से अधिक पुराने शिवलिंग पर जलाभिषेक करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है।Categoryदुर्घटनाराजनीतिसमस्या/problemस्थानीयअपराधशिक्षाखेलमनोरंजनव्यापारस्थानीयDistrictNo districtग्वालियरदेशमुरैनाभिंडश्योपुरदतियाशिवपुरीगुनाअशोकनगरAuthorEditorial deskMushtaq Ahmad Khan - Editor In Chiefiuyiuhकृषि डेस्क - कृषि संवाददाताक्राइम डेस्क - अपराध संवाददाताधर्म डेस्क - धर्म संपादकपर्यटन डेस्क - पर्यटन संवाददाताराजनीति डेस्क - राजनीतिक विश्लेषकव्यापार डेस्क - व्यापार संवाददाताशिक्षा डेस्क - शिक्षा संवाददातासंपादकीय डेस्क - वरिष्ठ संपादकसांस्कृतिक डेस्क - सांस्कृतिक संपादकस्पोर्ट्स डेस्क - खेल संवाददाताPublish timeStory URLURL slug/article/gwalior-story-0fdd778f
StoryWrite in reading order. Add images exactly where they should appear. Text block Image block01Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteसावन मास के अंतिम सोमवार के पावन अवसर पर ग्वालियर के मध्य स्थित ऐतिहासिक हजारेश्वर महादेव मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिल रही है। सुबह से ही मंदिर परिसर हर हर महादेव के जयकारों से गूंज रहा है और दूर-दूर से पहुंचे भक्त कतारों में लगकर भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त कर रहे हैं। Add text below Add image below02Heading Paragraph Heading Subheading Quoteपांच सौ साल से अधिक पुराना है 'मोटे महादेव' का स्वरूप Add text below Add image below03Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteइस प्राचीन मंदिर में स्थापित मुख्य शिवलिंग करीब 500 वर्ष से अधिक पुराना माना जाता है। लगभग साढ़े पांच फीट ऊंचे और तीन फीट चौड़े इस विशाल शिवलिंग को स्थानीय स्तर पर 'मोटे महादेव' के नाम से भी पुकारा जाता है। इस अद्भुत शिवलिंग पर भगवान शिव के 55 मुख और कुल 1108 छोटे-छोटे शिवलिंग उत्कीर्ण हैं। Add text below Add image below04Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteदूर से देखने पर इस शिवलिंग का रंग प्राकृतिक रूप से तांबे यानी पीतांबर जैसा प्रतीत होता है, जो इसकी भव्यता को और अधिक बढ़ा देता है। यही कारण है कि सावन के इस अंतिम सोमवार को यहां भक्तों का सैलाब उमड़ पड़ा है। Add text below Add image below05Heading Paragraph Heading Subheading Quoteएक बार जल चढ़ाने से मिलता है 1164 रुद्राभिषेक का पुण्य Add text below Add image below06Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteमंदिर के पुजारी पंडित विनय भार्गव ने बताया कि सावन के महीने में भोलेनाथ का जलाभिषेक करना अत्यंत फलदायी होता है। चूंकि इस मुख्य शिवलिंग के भीतर एक हजार से ज्यादा छोटे शिवलिंग विराजमान हैं, इसलिए इसे हजारेश्वर महादेव के रूप में पूजा जाता है। Add text below Add image below07Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteधार्मिक मान्यता है कि इस मंदिर में आकर यदि कोई भक्त एक बार भी सच्चे मन से जल अर्पित कर दे, तो उसे 1164 रुद्राभिषेक करने के बराबर पुण्य की प्राप्ति होती है। यही वजह है कि श्रद्धालु दूध, जल और बेलपत्र लेकर अलसुबह से ही मंदिर पहुंच रहे हैं। Add text below Add image below08Heading Paragraph Heading Subheading Quoteनंदी महाराज के कान में मनोकामनाएं कह रहे हैं भक्त Add text below Add image below09Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteमंदिर परिसर में स्थापित करीब 4 फीट ऊंची नंदी महाराज की प्रतिमा भी श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। इस प्रतिमा की बनावट ऐसी प्रतीत होती है मानो नंदी अभी उठने की मुद्रा में हों। Add text below Add image below10Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteश्रद्धालुओं का अटूट विश्वास है कि नंदी जी के कान में अपनी मनोकामना कहने से वह सीधी भगवान शिव तक पहुंच जाती है। इसके अलावा, शिवलिंग के समीप ही माता पार्वती की प्रतिमा भी स्थापित है, जहां पूजा-अर्चना करने से भक्तों के सभी कष्ट दूर होने की मान्यता है। Add text below Add image below