Story detailsHeadline, summary, section, and byline.HeadlineSummaryग्वालियर में सरकारी जमीन के रिकॉर्ड में हेराफेरी के मामले में जिला प्रशासन ने दूसरी बड़ी कार्रवाई की है। पटवारी के निलंबन के बाद अब रिकॉर्ड रूम के दो कर्मचारियों और एक वादी के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है।Categoryदुर्घटनाराजनीतिसमस्या/problemस्थानीयअपराधशिक्षाखेलमनोरंजनव्यापारस्थानीयDistrictNo districtग्वालियरदेशमुरैनाभिंडश्योपुरदतियाशिवपुरीगुनाअशोकनगरAuthorEditorial deskMushtaq Ahmad Khan - Editor In Chiefiuyiuhकृषि डेस्क - कृषि संवाददाताक्राइम डेस्क - अपराध संवाददाताधर्म डेस्क - धर्म संपादकपर्यटन डेस्क - पर्यटन संवाददाताराजनीति डेस्क - राजनीतिक विश्लेषकव्यापार डेस्क - व्यापार संवाददाताशिक्षा डेस्क - शिक्षा संवाददातासंपादकीय डेस्क - वरिष्ठ संपादकसांस्कृतिक डेस्क - सांस्कृतिक संपादकस्पोर्ट्स डेस्क - खेल संवाददाताPublish timeStory URLURL slug/article/gwalior-fir-25eb8eef
StoryWrite in reading order. Add images exactly where they should appear. Text block Image block01Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteग्वालियर में सरकारी जमीन से जुड़े अभिलेखों में कथित हेराफेरी और न्यायालय में विचाराधीन प्रकरण को प्रभावित करने के मामले में जिला प्रशासन ने एक और महत्वपूर्ण कार्रवाई की है। इस प्रकरण में पहले पटवारी को निलंबित किया गया था, जिसके बाद अब रिकॉर्ड रूम के दो कर्मचारियों और एक वादी के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। Add text below Add image below02Heading Paragraph Heading Subheading Quoteरिकॉर्ड रूम के कर्मचारियों पर FIR Add text below Add image below03Paragraph Paragraph Heading Subheading Quote11 जुलाई को पटवारी कुलदीप चाहर के निलंबन के बाद हुई विस्तृत जांच में रिकॉर्ड रूम में पदस्थ सहायक वर्ग-3 सतपाल कुशवाह और भृत्य वीरेन्द्र कुशवाह की संलिप्तता सामने आई। इसके परिणामस्वरूप, विश्वविद्यालय थाना में इन दोनों कर्मचारियों के साथ-साथ मामले के आरोपी वादी धर्मवीर के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं के तहत प्राथमिकी (FIR) दर्ज की गई है। Add text below Add image below04Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteआरोप है कि सतपाल कुशवाह और वीरेन्द्र कुशवाह ने वादी धर्मवीर के साथ मिलकर राजस्व अभिलेखों में गड़बड़ी की। उन्होंने महत्वपूर्ण खसरा पंजी और अन्य सरकारी रिकॉर्ड के कुछ पन्ने फाड़कर नष्ट कर दिए, जिसका उद्देश्य न्यायालय में चल रहे प्रकरण में वादी पक्ष को अनुचित लाभ पहुंचाना था। Add text below Add image below05Heading Paragraph Heading Subheading Quoteपटवारी का निलंबन और प्रारंभिक जांच Add text below Add image below06Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteइस मामले की शुरुआत तब हुई जब जिला प्रशासन की प्रारंभिक जांच में ग्राम महू की विवादित सरकारी जमीन से जुड़े एक प्रकरण में पटवारी कुलदीप चाहर की लापरवाही उजागर हुई। न्यायालय में शासन की ओर से साक्षी बने पटवारी चाहर ने मूल राजस्व अभिलेखों का सत्यापन किए बिना ही वादी धर्मवीर द्वारा प्रस्तुत दस्तावेजों को सही मान लिया था। Add text below Add image below07Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteसाथ ही, उन्होंने उपलब्ध शासकीय रिकॉर्ड को भी न्यायालय के समक्ष प्रभावी ढंग से प्रस्तुत नहीं किया। इसे गंभीर लापरवाही और शासन के हितों के विपरीत मानते हुए, कलेक्टर रुचिका चौहान ने 11 जुलाई 2026 को कुलदीप चाहर को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया था। पटवारी के निलंबन के बाद ही जिला प्रशासन ने मामले की विस्तृत जांच का आदेश दिया, जिसमें रिकॉर्ड रूम के कर्मचारियों की भूमिका सामने आई। Add text below Add image below08Heading Paragraph Heading Subheading Quoteपुलिस जांच और प्रशासन का रुख Add text below Add image below09Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteअब विश्वविद्यालय थाना पुलिस इस पूरे षड्यंत्र की गहनता से जांच कर रही है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि इस कथित साजिश में और कौन-कौन लोग शामिल थे और सरकारी रिकॉर्ड से छेड़छाड़ कब और किस तरीके से की गई। Add text below Add image below10Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteअपर कलेक्टर कुमार सत्यम ने इस संबंध में कहा कि सरकारी अभिलेखों से छेड़छाड़ एक गंभीर अपराध है। उन्होंने स्पष्ट किया कि शासन के हितों के खिलाफ किसी भी प्रकार की अनियमितता या दस्तावेजों में हेराफेरी करने वाले व्यक्तियों के विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। Add text below Add image below