Story detailsHeadline, summary, section, and byline.HeadlineSummaryग्वालियर खंडपीठ ने गुमशुदा युवती और युवक की तलाश से जुड़े मामले में पुलिस की कार्यशैली पर गहरी नाराजगी जताई है। कोर्ट ने अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (ASP) सुजावल जग्गा को जांच से हटाकर अब सीनियर पुलिस अधीक्षक (SSP) को व्यक्तिगत निगरानी में जांच करने का आदेश दिया है।Categoryदुर्घटनाराजनीतिसमस्या/problemस्थानीयअपराधशिक्षाखेलमनोरंजनव्यापारस्थानीयDistrictNo districtग्वालियरदेशमुरैनाभिंडश्योपुरदतियाशिवपुरीगुनाअशोकनगरAuthorEditorial deskMushtaq Ahmad Khan - Editor In Chiefiuyiuhकृषि डेस्क - कृषि संवाददाताक्राइम डेस्क - अपराध संवाददाताधर्म डेस्क - धर्म संपादकपर्यटन डेस्क - पर्यटन संवाददाताराजनीति डेस्क - राजनीतिक विश्लेषकव्यापार डेस्क - व्यापार संवाददाताशिक्षा डेस्क - शिक्षा संवाददातासंपादकीय डेस्क - वरिष्ठ संपादकसांस्कृतिक डेस्क - सांस्कृतिक संपादकस्पोर्ट्स डेस्क - खेल संवाददाताPublish timeStory URLURL slug/article/gwalior-asp-ssp-7ec7fd07
StoryWrite in reading order. Add images exactly where they should appear. Text block Image block01Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteग्वालियर खंडपीठ ने एक गुमशुदा युवती और युवक की तलाश के मामले में पुलिस की जांच पर असंतोष व्यक्त करते हुए महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है। न्यायालय ने जांच का नेतृत्व कर रहे विशेष जांच दल (SIT) प्रमुख और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (ASP) सुजावल जग्गा को तत्काल प्रभाव से इस प्रकरण की जांच से हटा दिया है। Add text below Add image below02Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteअब इस पूरे मामले की पड़ताल ग्वालियर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) स्वयं करेंगे और इसकी व्यक्तिगत रूप से निगरानी भी करेंगे। यह आदेश सोमवार को मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने दिया। Add text below Add image below03Heading Paragraph Heading Subheading Quoteपुलिस की कार्यशैली पर हाईकोर्ट की नाराजगी Add text below Add image below04Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteसुनवाई के दौरान, उच्च न्यायालय ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर कड़ी आपत्ति जताई। कोर्ट ने टिप्पणी की कि पुलिस एक ऐसे पिता पर बार-बार अपनी गुमशुदा बेटी का पता बताने का दबाव बना रही है, जिसे खुद अपनी बेटी के ठिकाने की कोई जानकारी नहीं है। न्यायालय ने इसे पुलिस की अनुचित कार्यशैली करार देते हुए कहा कि यह मध्यप्रदेश पुलिस की जांच प्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाता है। कोर्ट ने राज्य के पुलिस महानिदेशक (DGP) को भी पुलिस की कार्यप्रणाली की समीक्षा करने की आवश्यकता पर बल दिया। Add text below Add image below05Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteउच्च न्यायालय ने निर्देश दिया है कि अब इस मामले में प्रस्तुत की जाने वाली प्रत्येक स्थिति रिपोर्ट (स्टेटस रिपोर्ट) वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के शपथ पत्र के साथ ही दाखिल की जाएगी। न्यायालय ने यह उम्मीद भी जताई कि पुलिस केवल तकनीकी संसाधनों पर निर्भर रहने के बजाय जमीनी स्तर पर भी सक्रियता से लापता लोगों की तलाश करेगी। Add text below Add image below06Heading Paragraph Heading Subheading Quoteजांच में देरी और पुलिस की लापरवाही Add text below Add image below07Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteसुनवाई के दौरान, सरकारी वकील ने बताया कि आधार कार्ड की लोकेशन से संबंधित जानकारी के लिए नेशनल हेल्थ अथॉरिटी (NHA) को एक ईमेल भेजा गया था, लेकिन कोई जवाब न मिलने के कारण जांच आगे नहीं बढ़ सकी। इस पर न्यायालय ने आश्चर्य व्यक्त करते हुए कहा कि पुलिस दो महीने तक सिर्फ एक ईमेल के भरोसे बैठी रही और संबंधित कार्यालय जाकर सीधे जानकारी जुटाने का प्रयास तक नहीं किया। Add text below Add image below08Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteकोर्ट ने यह भी कहा कि पुलिस की जांच केवल मोबाइल लोकेशन तक ही सीमित रही। यदि मोबाइल बंद हो जाता है, तो पूरी जांच रुक जाती है। इस प्रकार की जांच पद्धति से गुमशुदा व्यक्तियों का पता लगाना अत्यंत कठिन है। Add text below Add image below09Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteसुनवाई के दौरान, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सुजावल जग्गा ने स्वीकार किया कि उन्हें पूरे मामले को समझने में लगभग दो महीने का समय लग गया। उन्होंने न्यायालय से जांच जारी रखने के लिए एक और अवसर देने का अनुरोध किया, लेकिन उच्च न्यायालय ने इस मांग को अस्वीकार कर दिया। न्यायालय ने कहा कि सरकार बेटियों की सुरक्षा की बात करती है, लेकिन इस मामले में पुलिस की कार्रवाई बेहद धीमी और निराशाजनक रही है। Add text below Add image below10Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteइस मामले की अगली सुनवाई 27 जुलाई 2026 को निर्धारित की गई है। तब तक, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक की व्यक्तिगत निगरानी में जांच आगे बढ़ेगी और उसकी प्रगति रिपोर्ट उच्च न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत की जाएगी। Add text below Add image below