Story detailsHeadline, summary, section, and byline.HeadlineSummaryभारत के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक की रिपोर्ट में जीवाजी विश्वविद्यालय के दूरस्थ शिक्षण संस्थान की बड़ी चूक सामने आई है। सत्र 2021 से 2024 के बीच दाखिला लेने वाले विद्यार्थियों की न तो समय पर परीक्षाएं हुईं और न ही उन्हें अध्ययन सामग्री मिल सकी।Categoryदुर्घटनाराजनीतिसमस्या/problemस्थानीयअपराधशिक्षाखेलमनोरंजनव्यापारस्थानीयDistrictNo districtग्वालियरदेशमुरैनाभिंडश्योपुरदतियाशिवपुरीगुनाअशोकनगरAuthorEditorial deskMushtaq Ahmad Khan - Editor In Chiefiuyiuhकृषि डेस्क - कृषि संवाददाताक्राइम डेस्क - अपराध संवाददाताधर्म डेस्क - धर्म संपादकपर्यटन डेस्क - पर्यटन संवाददाताराजनीति डेस्क - राजनीतिक विश्लेषकव्यापार डेस्क - व्यापार संवाददाताशिक्षा डेस्क - शिक्षा संवाददातासंपादकीय डेस्क - वरिष्ठ संपादकसांस्कृतिक डेस्क - सांस्कृतिक संपादकस्पोर्ट्स डेस्क - खेल संवाददाताPublish timeStory URLURL slug/article/gwalior-597-186ee536
StoryWrite in reading order. Add images exactly where they should appear. Text block Image block01Heading Paragraph Heading Subheading Quoteकैग की ऑडिट रिपोर्ट में जीवाजी विवि की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल Add text below Add image below02Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteग्वालियर के प्रतिष्ठित जीवाजी विश्वविद्यालय (जेयू) के दूरस्थ शिक्षण संस्थान में अध्ययनरत छात्र-छात्राओं के भविष्य के साथ गंभीर खिलवाड़ किए जाने का मामला प्रकाश में आया है। हाल ही में सामने आई कैग (भारत के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक) की मार्च 2024 की ऑडिट रिपोर्ट के मुताबिक, इस संस्थान में शैक्षणिक गतिविधियों और परीक्षाओं के संचालन में भारी अनियमितताएं बरती जा रही हैं। Add text below Add image below03Heading Paragraph Heading Subheading Quoteसैकड़ों विद्यार्थियों के अटके इम्तिहान और प्रमोशन Add text below Add image below04Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteसंस्थान की स्थापना वर्ष 1995 में दूरदराज के विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से की गई थी। यहां बीए और बीकॉम जैसे स्नातक पाठ्यक्रमों के साथ-साथ एम.लिब, एमए (ड्राइंग-पेंटिंग, इतिहास, भूगोल) और एमकॉम जैसे स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम संचालित हो रहे हैं। इन कोर्सों में वर्ष 2021 से 2024 के बीच कुल 597 विद्यार्थियों ने प्रवेश लिया था। ऑडिट जांच में यह बात सामने आई कि विश्वविद्यालय प्रशासन ने शुरुआती वर्षों में प्रथम वर्ष की परीक्षाएं तो करा लीं, लेकिन स्नातक द्वितीय वर्ष और स्नातकोत्तर अंतिम वर्ष की परीक्षाएं आयोजित ही नहीं की गईं। Add text below Add image below05Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteस्थिति यह बन गई कि शैक्षणिक सत्र 2023-24 के यूजी और पीजी दोनों ही स्तर के पाठ्यक्रम के पेपर दिसंबर 2024 तक लंबित पड़े रहे। परीक्षा संपन्न न होने के कारण छात्र अगली कक्षाओं में पदोन्नत नहीं हो सके। हैरान करने वाली बात यह है कि विवि प्रबंधन के पास इस बात का कोई जवाब नहीं था कि परीक्षाएं समय पर क्यों नहीं कराई गईं और ऑडिट टीम द्वारा पूछे जाने पर भी कोई संतोषजनक कारण नहीं बताया गया। Add text below Add image below06Heading Paragraph Heading Subheading Quoteमहीनों की देरी से हुईं परीक्षाएं, रिकॉर्ड में नहीं स्पष्ट कारण Add text below Add image below07Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteरिपोर्ट में इस बात का भी खुलासा हुआ है कि जिन परीक्षाओं का आयोजन कराया गया, वे भी निर्धारित समय-सारणी से बहुत पीछे थीं। सत्र 2021-22 की परीक्षाएं तय समय से करीब 14 महीने की देरी के बाद मई और जून 2023 के दौरान ली गईं। इसी प्रकार, वर्ष 2022-23 की परीक्षाएं भी 10 महीने विलंब से जनवरी 2024 में संपन्न कराई गईं। Add text below Add image below08Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteविश्वविद्यालय के आधिकारिक रिकॉर्ड में इस भारी विलंब का कोई भी प्रशासनिक या ठोस कारण दर्ज नहीं किया गया है। जानकारों का मानना है कि ऐसा इसलिए किया गया ताकि इस लचर व्यवस्था के लिए जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों की जवाबदेही तय न हो सके। फिलहाल इस खुलासे के बाद स्थानीय विद्यार्थियों और शैक्षणिक हलकों में विश्वविद्यालय प्रशासन की कार्यशैली को लेकर नाराजगी बनी हुई है। Add text below Add image below