Story detailsHeadline, summary, section, and byline.HeadlineSummaryग्वालियर के शीतला माता मंदिर के पास हुए भीषण हादसे के बाद इस बार मेले का पूरा कारोबार ठप हो गया है। नवमी से पहले ही बाहर से आए व्यापारी भारी नुकसान के चलते अपना सामान समेटकर वापस लौटने लगे हैं।Categoryदुर्घटनाराजनीतिसमस्या/problemस्थानीयअपराधशिक्षाखेलमनोरंजनव्यापारस्थानीयDistrictNo districtग्वालियरदेशमुरैनाभिंडश्योपुरदतियाशिवपुरीगुनाअशोकनगरAuthorEditorial deskMushtaq Ahmad Khan - Editor In Chiefiuyiuhकृषि डेस्क - कृषि संवाददाताक्राइम डेस्क - अपराध संवाददाताधर्म डेस्क - धर्म संपादकपर्यटन डेस्क - पर्यटन संवाददाताराजनीति डेस्क - राजनीतिक विश्लेषकव्यापार डेस्क - व्यापार संवाददाताशिक्षा डेस्क - शिक्षा संवाददातासंपादकीय डेस्क - वरिष्ठ संपादकसांस्कृतिक डेस्क - सांस्कृतिक संपादकस्पोर्ट्स डेस्क - खेल संवाददाताPublish timeStory URLURL slug/article/gwalior-50-286a7e9c
StoryWrite in reading order. Add images exactly where they should appear. Text block Image block01Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteग्वालियर के सातऊ गांव स्थित प्रसिद्ध शीतला माता मंदिर परिसर में हर साल अष्टमी और नवमी के अवसर पर भारी संख्या में श्रद्धालु जुटते थे। इस दौरान यहां लगने वाले मेले में खिलौने, प्रसाद, झूले और दैनिक उपयोग के सामान की दुकानों पर अच्छी-खासी ग्राहकी होती थी, लेकिन इस बार वहां पूरी तरह वीरानगी छाई हुई है। Add text below Add image below02Heading Paragraph Heading Subheading Quoteहादसे के साये में फीका पड़ा मेला, 80 प्रतिशत दुकानें बंद Add text below Add image below03Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteस्थानीय व्यापारियों के अनुसार, हाल ही में हुए दर्दनाक ट्रक हादसे के बाद से मेले का करीब 50 लाख रुपए से ज्यादा का कारोबार प्रभावित हुआ है। हालात इस कदर बदतर हो गए हैं कि नवमी के पर्व से पहले ही लगभग 80 फीसदी दुकानें बंद हो चुकी हैं। दूसरे जिलों और अन्य राज्यों से आए दुकानदारों ने मायूस होकर अपना सामान समेटना शुरू कर दिया है। Add text below Add image below04Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteदुर्गा नवमी के दिन जब मेला ग्राउंड का जायजा लिया गया तो वहां सन्नाटा पसरा मिला। जिन रास्तों पर श्रद्धालुओं की लंबी कतारें हुआ करती थीं, वहां अब केवल मायूस व्यापारी नजर आ रहे हैं। कई दुकानदारों के लिए तो अपनी दुकान तक सामान लाने में लगा ढुलाई का खर्च निकालना भी मुश्किल साबित हुआ है। Add text below Add image below05Heading Paragraph Heading Subheading Quoteउम्मीद से बेहद कम पहुंचे श्रद्धालु Add text below Add image below06Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteआम तौर पर अष्टमी और नवमी के मौके पर शीतला माता मंदिर में एक से डेढ़ लाख तक श्रद्धालु पहुंचते हैं। इसी उम्मीद के साथ छोटे और बड़े कारोबारी नौ दिनों के लिए अपनी दुकानें सजाते हैं, लेकिन इस बार हादसे के कारण लोगों ने मेले से दूरी बना ली। भारी वित्तीय नुकसान को देखते हुए दुकानदारों ने आखिरी दिनों तक रुकने के बजाय लौटने में ही भलाई समझी। Add text below Add image below07Quote Paragraph Heading Subheading Quoteकोरोना महामारी के दौरान भी मेले में ऐसे हालात नहीं बने थे, जितने खराब हालात इस बार हादसे के बाद देखने को मिले हैं। Add text below Add image below08Heading Paragraph Heading Subheading Quoteव्यापारियों का छलका दर्द, प्रशासन पर उठाए सवाल Add text below Add image below09Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteछतरपुर से अपनी दुकान लेकर आईं दर्पण ने बताया कि वह पिछले पांच साल से यहां खिलौने बेच रही हैं, लेकिन इस बार ग्राहकी न होने से उन्हें गहरी निराशा हाथ लगी है। वहीं, दतिया से पहली बार आईं दामिनी का कारोबार भी चौपट हो गया। उन्होंने आरोप लगाया कि मंदिर क्षेत्र में बिजली के नाम पर रोजाना 200 रुपए और जगह के नाम पर 500 रुपए वसूले जाते हैं, साथ ही स्थानीय स्तर पर अवैध वसूली और मारपीट का सामना भी करना पड़ता है। Add text below Add image below10Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteग्वालियर की रहने वाली मंजिता देवी ने इस हादसे के लिए प्रशासनिक व्यवस्थाओं को दोषी ठहराया है। उनका सवाल था कि जब मंदिर मार्ग पर सामान्य दिनों में बाइक तक के प्रवेश पर पाबंदी होती है, तो वहां भारी-भरकम ट्रक कैसे पहुंच गया। उनका करीब एक लाख रुपए का सामान बिना बिके ही रह गया, जिसके चलते उन्हें मजबूरी में नवमी की सुबह ही दुकान समेटनी पड़ी। भितरवार की रहने वाली 80 वर्षीय कस्तूरी देवी ने भी कारोबार ठप होने से हुए भारी आर्थिक नुकसान और कर्ज की स्थिति पर दुख जताया है। Add text below Add image below