Story detailsHeadline, summary, section, and byline.HeadlineSummaryशहर के प्रतिष्ठित चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) अशोक विजयवर्गीय से 21 करोड़ 6 लाख रुपये की साइबर ठगी का मामला सामने आया है। प्रारंभिक जांच में पता चला है कि ठगों ने इस रकम को देश भर में फैले 20 हजार से अधिक बैंक खातों में ट्रांसफर किया है।Categoryदुर्घटनाराजनीतिसमस्या/problemस्थानीयअपराधशिक्षाखेलमनोरंजनव्यापारस्थानीयDistrictNo districtग्वालियरदेशमुरैनाभिंडश्योपुरदतियाशिवपुरीगुनाअशोकनगरAuthorEditorial deskMushtaq Ahmad Khan - Editor In Chiefiuyiuhकृषि डेस्क - कृषि संवाददाताक्राइम डेस्क - अपराध संवाददाताधर्म डेस्क - धर्म संपादकपर्यटन डेस्क - पर्यटन संवाददाताराजनीति डेस्क - राजनीतिक विश्लेषकव्यापार डेस्क - व्यापार संवाददाताशिक्षा डेस्क - शिक्षा संवाददातासंपादकीय डेस्क - वरिष्ठ संपादकसांस्कृतिक डेस्क - सांस्कृतिक संपादकस्पोर्ट्स डेस्क - खेल संवाददाताPublish timeStory URLURL slug/article/gwalior-21-20-acfad99e
StoryWrite in reading order. Add images exactly where they should appear. Text block Image block01Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteग्वालियर के जाने-माने चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) और मध्य प्रदेश चेंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज के मुख्य निर्वाचन अधिकारी, 70 वर्षीय अशोक विजयवर्गीय, एक बड़े साइबर धोखाधड़ी का शिकार हुए हैं। उनसे 21 करोड़ 6 लाख रुपये की ठगी की गई है, जिसने राष्ट्रीय स्तर पर जांच एजेंसियों को भी हैरान कर दिया है। Add text below Add image below02Heading Paragraph Heading Subheading Quoteअंतरराष्ट्रीय ठगों का जाल Add text below Add image below03Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteराज्य साइबर सेल, ग्वालियर द्वारा की गई शुरुआती तकनीकी जांच में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगों ने इस पूरी रकम को चार अलग-अलग स्तरों (लेयर्स) में बांट दिया। इस पैसे को 20 हजार से भी ज्यादा बैंक खातों में ट्रांसफर किया गया, जिनका फैलाव कन्याकुमारी से लेकर कश्मीर तक था। Add text below Add image below04Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteजांच दल ने 99 प्रथम-स्तरीय बैंक खातों की पहचान की है जो अब साइबर टीम की निगरानी में हैं। हालांकि, पुलिस की त्वरित कार्रवाई से अब तक करीब 2 करोड़ रुपये की राशि को फ्रीज (रोक) करने में सफलता मिली है। Add text below Add image below05Heading Paragraph Heading Subheading Quoteदेशव्यापी ट्रांजेक्शन नेटवर्क Add text below Add image below06Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteसाइबर जांच से पता चला है कि ठगों ने पैसों को किसी एक या दो शहरों तक सीमित नहीं रखा। रकम को कन्याकुमारी, कश्मीर, गुजरात और कोलकाता जैसे देश के विभिन्न हिस्सों में फैले हजारों बैंक खातों में भेजा गया। इसके बाद, पैसे को छोटी-छोटी राशियों में विभाजित कर आगे बढ़ाया गया, जिससे जांच एजेंसियों के लिए पैसों के प्रवाह का पता लगाना अत्यंत कठिन हो गया। Add text below Add image below07Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteसाइबर विशेषज्ञों के अनुसार, ठगों ने इस 21 करोड़ रुपये की राशि को ठिकाने लगाने के लिए पूरे देश के बैंकों का इस्तेमाल किया। चेन्नई से कश्मीर और गुजरात से कोलकाता तक, हजारों बैंक खातों में लाखों ट्रांजेक्शन किए गए। Add text below Add image below08Heading Paragraph Heading Subheading Quoteठगों का 'फोर-लेयर' चक्रव्यूह Add text below Add image below09Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteजांच अधिकारियों का मानना है कि ठगों ने पुलिस की पकड़ से बचने के लिए एक अत्यंत जटिल 'फोर-लेयर' (चार-स्तरीय) बैंकिंग प्रणाली का उपयोग किया। इस प्रणाली के तहत, पैसे को कई चरणों में अलग-अलग खातों में ट्रांसफर किया गया। Add text below Add image below10Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteशिकायत के अनुसार, ठगी के लिए भारतीय मोबाइल नंबरों के अलावा एक विदेशी नंबर (+1 (516) 713-7291) का भी इस्तेमाल किया गया, जो संभवतः किसी अमेरिकी या कनाडाई वर्चुअल नंबर प्लेटफॉर्म से संचालित हो रहा था। ठगों ने फेडरल बैंक, आईसीआईसीआई, केनरा बैंक और यस बैंक जैसी प्रमुख वित्तीय संस्थाओं के कॉर्पोरेट और चालू खातों का उपयोग इस लेयरिंग प्रक्रिया के लिए किया। Add text below Add image below11Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteइस मामले में सीए से जुड़े 35 से अधिक परिचितों द्वारा ट्रेडिंग में रकम लगाने की बात भी सामने आई है, जो जांच का एक महत्वपूर्ण पहलू है। Add text below Add image below