Story detailsHeadline, summary, section, and byline.HeadlineSummaryवर्ष 1930 में गांधीजी के चरखा आंदोलन से शुरू हुआ ग्वालियर का मध्यभारत खादी संघ अब राष्ट्रीय ध्वज का प्रमुख केंद्र बन चुका है। यहां तैयार होने वाले तिरंगे लाल किले से लेकर देश के कई राज्यों के सरकारी भवनों पर शान से फहराए जा रहे हैं।Categoryदुर्घटनाराजनीतिसमस्या/problemस्थानीयअपराधशिक्षाखेलमनोरंजनव्यापारस्थानीयDistrictNo districtग्वालियरदेशमुरैनाभिंडश्योपुरदतियाशिवपुरीगुनाअशोकनगरAuthorEditorial deskMushtaq Ahmad Khan - Editor In Chiefiuyiuhकृषि डेस्क - कृषि संवाददाताक्राइम डेस्क - अपराध संवाददाताधर्म डेस्क - धर्म संपादकपर्यटन डेस्क - पर्यटन संवाददाताराजनीति डेस्क - राजनीतिक विश्लेषकव्यापार डेस्क - व्यापार संवाददाताशिक्षा डेस्क - शिक्षा संवाददातासंपादकीय डेस्क - वरिष्ठ संपादकसांस्कृतिक डेस्क - सांस्कृतिक संपादकस्पोर्ट्स डेस्क - खेल संवाददाताPublish timeStory URLURL slug/article/gwalior-18-a458b396
StoryWrite in reading order. Add images exactly where they should appear. Text block Image block01Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteमहात्मा गांधी के स्वदेशी और चरखा आंदोलन से प्रेरित होकर सन 1930 में ग्वालियर में स्थापित मध्यभारत खादी संघ ने एक लंबा सफर तय किया है। आज इस ऐतिहासिक संस्था में तैयार होने वाला राष्ट्रीय ध्वज न केवल स्थानीय स्तर पर, बल्कि देश के विभिन्न हिस्सों में अपनी पहचान बना चुका है। Add text below Add image below02Heading Paragraph Heading Subheading Quoteवर्ष 2016 में मिली औपचारिक मान्यता और लाल किले तक पहुंच Add text below Add image below03Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteसंस्था के अध्यक्ष वासुदेव शर्मा के अनुसार, मानकों के अनुसार राष्ट्रीय ध्वज तैयार करने के लिए लंबे समय से प्रयास चल रहे थे, जिन्हें वर्ष 2016 में सफलता मिली। मंजूरी मिलने के बाद संस्था द्वारा तैयार किया गया पहला मानकयुक्त तिरंगा सीधे दिल्ली स्थित लाल किले की प्राचीर पर फहराया गया। इसके अलावा, ग्वालियर में बने ये झंडे देश के कई उच्च न्यायालयों और सचिवालयों की इमारतों की भी शान बढ़ा चुके हैं। Add text below Add image below04Heading Paragraph Heading Subheading Quoteराष्ट्रीय पर्वों पर एक करोड़ से अधिक का कारोबार Add text below Add image below05Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteजैसे-जैसे राष्ट्रीय ध्वज की मांग में इजाफा हुआ है, वैसे-वैसे संस्था के कामकाज और कारोबार में भी बड़ा विस्तार देखने को मिला है। एक समय था जब यह कारोबार 15 से 20 लाख रुपए के आसपास सिमटा हुआ था, लेकिन अब स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस जैसे राष्ट्रीय पर्वों के दौरान यह आंकड़ा एक करोड़ रुपए को पार कर जाता है। वर्तमान सीजन में भी अब तक लगभग 60 लाख रुपए मूल्य के तिरंगे बेचे जा चुके हैं। Add text below Add image below06Heading Paragraph Heading Subheading Quoteदेश के 18 राज्यों तक हो रही है तिरंगों की आपूर्ति Add text below Add image below07Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteवर्तमान में ग्वालियर की इस संस्था में निर्मित तिरंगे मध्य प्रदेश की सीमाओं को लांघकर देश के करीब 18 अलग-अलग राज्यों में भेजे जा रहे हैं। आगामी स्वतंत्रता दिवस के मद्देनजर संस्था को 70 से 80 बड़े ऑर्डर प्राप्त हुए हैं। 'हर घर तिरंगा' जैसे अभियानों के कारण नागरिकों में राष्ट्रीय ध्वज के प्रति उत्साह काफी बढ़ा है, जिससे कारीगरों पर तय समयसीमा में काम पूरा करने का दबाव भी है। Add text below Add image below08Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteइस प्रतिष्ठित संस्थान की स्थापना में मध्यभारत के पहले मुख्यमंत्री रहे बाबू तख्तमल जैन जैसे स्वतंत्रता सेनानियों और दिग्गजों का अहम योगदान रहा है। शुरुआती दौर से ही इस संस्था ने स्वदेशी और आत्मनिर्भरता के संकल्प को जीवित रखा है, और आज ग्वालियर में तैयार होने वाला तिरंगा इस शहर की ऐतिहासिक विरासत को राष्ट्रीय स्तर पर गौरवान्वित कर रहा है। Add text below Add image below