Story detailsHeadline, summary, section, and byline.HeadlineSummaryग्वालियर के अमर शहीद हवलदार सरमन सिंह सेंगर ने कारगिल युद्ध के दौरान टाइगर हिल पर अदम्य साहस का परिचय देते हुए सर्वोच्च बलिदान दिया। शहादत के दिन ही घर पहुंची उनकी चिट्ठी ने पूरे परिवार को झकझोर दिया था।Categoryदुर्घटनाराजनीतिसमस्या/problemस्थानीयअपराधशिक्षाखेलमनोरंजनव्यापारस्थानीयDistrictNo districtग्वालियरदेशमुरैनाभिंडश्योपुरदतियाशिवपुरीगुनाअशोकनगरAuthorEditorial deskMushtaq Ahmad Khan - Editor In Chiefiuyiuhकृषि डेस्क - कृषि संवाददाताक्राइम डेस्क - अपराध संवाददाताधर्म डेस्क - धर्म संपादकपर्यटन डेस्क - पर्यटन संवाददाताराजनीति डेस्क - राजनीतिक विश्लेषकव्यापार डेस्क - व्यापार संवाददाताशिक्षा डेस्क - शिक्षा संवाददातासंपादकीय डेस्क - वरिष्ठ संपादकसांस्कृतिक डेस्क - सांस्कृतिक संपादकस्पोर्ट्स डेस्क - खेल संवाददाताPublish timeStory URLURL slug/article/gwalior-12-ac07d305
StoryWrite in reading order. Add images exactly where they should appear. Text block Image block01Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteदेश की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति देने वाले वीर सपूतों की गाथाएं आज भी हर भारतीय का सीना गर्व से चौड़ा कर देती हैं। ग्वालियर अंचल से ताल्लुक रखने वाले राजपूताना रेजीमेंट के हवलदार सरमन सिंह सेंगर ने कारगिल युद्ध के दौरान ऐसा ही पराक्रम दिखाया था। कम उम्र में ही सेना का दामन थामने वाले सरमन ने विपरीत परिस्थितियों और दुर्गम पहाड़ियों के बीच अजेय साहस का परिचय दिया। Add text below Add image below02Heading Paragraph Heading Subheading Quoteबचपन से था देशसेवा का जज्बा Add text below Add image below03Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteसरमन सिंह का जन्म वर्ष 1963 में उत्तर प्रदेश के जालौन में हुआ था। उनके पिता मध्य प्रदेश पुलिस में अपनी सेवाएं दे रहे थे, जिसके चलते उनका पूरा परिवार ग्वालियर में आकर बस गया। चार बहनों के बाद इकलौते भाई होने के कारण वह पूरे परिवार के बेहद लाड़ले थे और घर में उन्हें स्नेह से 'लल्लू' पुकारा जाता था। महज 17 वर्ष की कच्ची उम्र में बिना किसी को बताए वे मुरार छावनी पहुंच गए और सेना में भर्ती की प्रक्रिया पूरी की। उनके भीतर कूट-कूट कर भरे देशप्रेम को देखकर आखिरकार उनका चयन भारतीय सेना में हो गया। Add text below Add image below04Heading Paragraph Heading Subheading Quoteटाइगर हिल पर लिखी शौर्य की इबारत Add text below Add image below05Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteवर्ष 1999 के कारगिल युद्ध के दौरान भारतीय सेना ने लगभग पंद्रह से बीस हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित दुर्गम चोटियों पर दुश्मन का मुकाबला किया। सरमन सिंह सेंगर की टुकड़ी को तोलोलिंग और टाइगर हिल क्षेत्र से पाकिस्तानी घुसपैठियों को खदेड़ने का बेहद कठिन कार्य सौंपा गया था। तोलोलिंग पर कब्जे के दौरान वे घायल भी हो गए थे, लेकिन राष्ट्र के प्रति कर्तव्य ने उन्हें पीछे हटने नहीं दिया। उन्होंने अपनी चोटों को छिपाकर मेडिकल परीक्षण पास किया और टाइगर हिल की निर्णायक लड़ाई में हिस्सा लिया। Add text below Add image below06Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteसत्ताइस और अट्ठाइस जून 1999 की दरमियानी अवधि में उनकी टुकड़ी टाइगर हिल के शिखर पर पहुंच गई। सेक्शन लीडर के तौर पर मोर्चा संभालते हुए उन्होंने शीर्ष पर भारतीय तिरंगा फहराया। तिरंगा फहराए जाने के बाद गुफाओं में छिपे छिपे हुए दुश्मनों ने अचानक हमला कर दिया। हवलदार सरमन ने अदम्य साहस का परिचय देते हुए कई घुसपैठियों को ढेर कर दिया। इसी भीषण संघर्ष के दौरान एक बम फटने से वे गंभीर रूप से जख्मी हो गए और वीरगति को प्राप्त हुए। बाद में सैन्य चिकित्सा परीक्षण में उनके शरीर से बारह गोलियां निकाली गईं। Add text below Add image below07Heading Paragraph Heading Subheading Quoteशहीद की पार्थिव देह के साथ पहुंची आखिरी चिट्ठी Add text below Add image below08Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteइस अंचल के लिए यह बलिदान जितना गौरवशाली था, उतना ही मर्माहत करने वाला भी रहा। जब शहीद सरमन सिंह का पार्थिव शरीर उनके घर पहुंचा, तो उसी वक्त कारगिल के मोर्चे से उनके द्वारा भेजी गई आखिरी चिट्ठी भी उनकी पत्नी के हाथों में पहुंची। उस खत में उन्होंने अपनी कुशलता का संदेश लिखा था, जिसे पढ़कर पूरा परिवार आज भी सिहर उठता है। Add text below Add image below