Story detailsHeadline, summary, section, and byline.HeadlineSummaryमध्य प्रदेश में बांग्लादेशी नागरिकों को फर्जी दस्तावेजों के सहारे भारतीय पासपोर्ट जारी कराने वाले रैकेट का एसटीएफ ने पर्दाफाश किया है। सवा महीने की तफ्तीश के बाद 100 से ज्यादा लोगों को चिह्नित किया गया है, जबकि 70 संदिग्ध पासपोर्ट के जरिए 120 से अधिक विदेश यात्राएं किए जाने का माCategoryदुर्घटनाराजनीतिसमस्या/problemस्थानीयअपराधशिक्षाखेलमनोरंजनव्यापारस्थानीयDistrictNo districtग्वालियरदेशमुरैनाभिंडश्योपुरदतियाशिवपुरीगुनाअशोकनगरAuthorEditorial deskMushtaq Ahmad Khan - Editor In Chiefiuyiuhकृषि डेस्क - कृषि संवाददाताक्राइम डेस्क - अपराध संवाददाताधर्म डेस्क - धर्म संपादकपर्यटन डेस्क - पर्यटन संवाददाताराजनीति डेस्क - राजनीतिक विश्लेषकव्यापार डेस्क - व्यापार संवाददाताशिक्षा डेस्क - शिक्षा संवाददातासंपादकीय डेस्क - वरिष्ठ संपादकसांस्कृतिक डेस्क - सांस्कृतिक संपादकस्पोर्ट्स डेस्क - खेल संवाददाताPublish timeStory URLURL slug/article/gwalior-100-7-a6756021
StoryWrite in reading order. Add images exactly where they should appear. Text block Image block01Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteमध्य प्रदेश में बांग्लादेश के नागरिकों को कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर भारतीय पासपोर्ट उपलब्ध कराने वाले संगठित गिरोह की जांच में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। राज्य के स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) द्वारा की गई कार्रवाई के तहत अब तक एक सौ से अधिक संदिग्धों की पहचान कर ली गई है, हालांकि अभी तक इस मामले में सिर्फ सात आरोपियों को ही गिरफ्तार किया जा सका है। Add text below Add image below02Heading Paragraph Heading Subheading Quoteसवा महीने की जांच और विदेश यात्राओं का खुलासा Add text below Add image below03Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteकरीब सवा महीने तक चली इस जांच के दौरान यह बात भी उजागर हुई है कि मध्य प्रदेश के भीतर तैयार किए गए करीब सवा सौ संदिग्ध पासपोर्ट के माध्यम से 120 से अधिक बार विदेशी यात्राएं की गईं। अब जांच एजेंसी यह पड़ताल करने में जुटी है कि इन पासपोर्ट का उपयोग करके विदेश जाने वाले लोगों में से कितने संदिग्ध अभी तक देश वापस नहीं लौटे हैं। Add text below Add image below04Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteजांच में यह तथ्य भी सामने आया है कि इन पासपोर्ट को बनवाने के लिए फर्जी पते, झूठी पहचान और जाली सत्यापन पत्रों का इस्तेमाल किया गया। खास बात यह है कि इन संदिग्ध पासपोर्ट पर डबरा, भोपाल और बैतूल स्थित बौद्ध मठों व विहारों के पते दर्ज होने की जानकारी मिली है, जिससे इस नेटवर्क की पहुंच का दायरा और बढ़ गया है। Add text below Add image below05Heading Paragraph Heading Subheading Quoteपुलिस और प्रशासनिक अमला भी जांच के घेरे में Add text below Add image below06Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteइस प्रकरण की जांच का दायरा केवल एजेंटों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पुलिस सत्यापन, पासपोर्ट शाखा और दस्तावेज जारी करने वाले संबंधित कर्मचारियों व अधिकारियों तक पहुंच गया है। एसटीएफ द्वारा चिह्नित किए गए एक सौ से ज्यादा लोगों में वे लोग भी शामिल हैं जो थानों में पुलिस सत्यापन या पासपोर्ट शाखा की प्रक्रिया से जुड़े रहे हैं। Add text below Add image below07Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteइसके अतिरिक्त, फर्जी दस्तावेजों में गवाह बनने वाले तथा बांग्लादेशी नागरिकों को मठों में शरण देने या उनके कागजातों का सत्यापन करवाने में संदिग्ध भूमिका निभाने वाले व्यक्तियों की भी सघन पड़ताल की जा रही है। एजेंसी इस बात की कड़ियां जोड़ रही है कि फर्जी कागजात तैयार होने से लेकर पासपोर्ट बनने तक किस स्तर पर किसकी संलिप्तता रही है। Add text below Add image below08Heading Paragraph Heading Subheading Quoteभारतीय पासपोर्ट की वैश्विक पहुंच का उठाया गया फायदा Add text below Add image below09Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteएजेंसी की पूछताछ में इस बात के संकेत मिले हैं कि इस गिरोह ने भारतीय पासपोर्ट की अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा और कई देशों में मिलने वाली आसान प्रवेश सुविधा का लाभ उठाने के लिए यह पूरा षड्यंत्र रचा था। पूछताछ के दौरान रियाल चौधरी के संदर्भ में यह बात सामने आई कि भारतीय पासपोर्ट की मजबूत रैंकिंग के चलते इसकी मांग अधिक थी। Add text below Add image below10Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteफरवरी 2026 के हेनले पासपोर्ट इंडेक्स के अनुसार भारतीय पासपोर्ट को 75वां स्थान प्राप्त है। इसके तहत भारतीय पासपोर्ट धारकों को दुनिया के 56 देशों में बिना पहले से वीजा लिए या 'वीजा ऑन अराइवल' जैसी सहूलियतें मिलती हैं, हालांकि इन सुविधाओं के नियम संबंधित देशों की नीतियों के आधार पर तय होते हैं। Add text below Add image below