Story detailsHeadline, summary, section, and byline.HeadlineSummaryगुना जिले में अक्टूबर 2021 के डीएपी कालाबाजारी प्रकरण में सत्र न्यायालय ने आरोपी कारोबारी को बरी कर दिया है। अदालत ने माना कि अभियोजन पक्ष पुख्ता सबूत और वीडियो पेश करने में नाकाम रहा।Categoryदुर्घटनाराजनीतिसमस्या/problemस्थानीयअपराधशिक्षाखेलमनोरंजनव्यापारस्थानीयDistrictNo districtग्वालियरदेशमुरैनाभिंडश्योपुरदतियाशिवपुरीगुनाअशोकनगरAuthorEditorial deskMushtaq Ahmad Khan - Editor In Chiefiuyiuhकृषि डेस्क - कृषि संवाददाताक्राइम डेस्क - अपराध संवाददाताधर्म डेस्क - धर्म संपादकपर्यटन डेस्क - पर्यटन संवाददाताराजनीति डेस्क - राजनीतिक विश्लेषकव्यापार डेस्क - व्यापार संवाददाताशिक्षा डेस्क - शिक्षा संवाददातासंपादकीय डेस्क - वरिष्ठ संपादकसांस्कृतिक डेस्क - सांस्कृतिक संपादकस्पोर्ट्स डेस्क - खेल संवाददाताPublish timeStory URLURL slug/article/guna-story-cbebc86f
StoryWrite in reading order. Add images exactly where they should appear. Text block Image block01Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteगुना जिले में अक्टूबर 2021 के दौरान चर्चा में आए डीएपी खाद की कालाबाजारी के एक मामले में सत्र न्यायालय ने आरोपी कारोबारी को दोषमुक्त कर दिया है। इससे पहले निचली अदालत ने आरोपी को दोषी करार देते हुए 6 महीने के कारावास और 1 हजार रुपए जुर्माने की सजा सुनाई थी, जिसके खिलाफ सत्र न्यायालय में अपील की गई थी। Add text below Add image below02Heading Paragraph Heading Subheading Quoteक्या था पूरा मामला और कैसे हुई थी कार्रवाई Add text below Add image below03Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteयह पूरा घटनाक्रम अक्टूबर 2021 का है जब जिले में डीएपी खाद का गंभीर संकट चल रहा था। मारकी महू क्षेत्र में स्थित एक किराना दुकान से संबंधित एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था, जिसमें आरोप लगाया गया था कि 1200 रुपए निर्धारित सरकारी कीमत वाली डीएपी की बोरी को 1400 रुपए में बेचा जा रहा है। इसी वीडियो के आधार पर कृषि और राजस्व विभाग की संयुक्त टीम ने दुकान पर छापा मारा था। Add text below Add image below04Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteछापेमारी के दौरान दुकान के एक कमरे से डीएपी की 42 बोरियां, यूरिया के 12 बैग, कीटनाशक और सरसों के बीज बरामद किए गए थे। इस कार्रवाई के बाद सिरसी थाने में दुकानदार के खिलाफ आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955, उर्वरक नियंत्रण आदेश 1985 और बीज नियंत्रण आदेश 1968 की धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था। वहीं, आरोपी दुकानदार ने अपने बचाव में दलील दी थी कि यह सारा खाद, बीज और कीटनाशक उसने केवल अपने निजी इस्तेमाल के लिए खरीदा था। Add text below Add image below05Heading Paragraph Heading Subheading Quoteसबूतों के अभाव और गवाहों के पलटने से मिला लाभ Add text below Add image below06Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteसत्र न्यायालय ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि अभियोजन पक्ष यह साबित करने में पूरी तरह असमर्थ रहा कि आरोपी द्वारा अधिक कीमत पर खाद बेची गई थी या उसने किसी वैधानिक आदेश का उल्लंघन किया था। कृषि विभाग के अधिकारी यह तक नहीं बता सके कि जब्त की गई खाद किस कंपनी की थी और उसका निर्माण किस महीने तथा वर्ष में हुआ था। Add text below Add image below07Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteजांच के दौरान सबसे बड़ा पेंच उस वायरल वीडियो को लेकर फंसा, जिसके आधार पर पूरी कार्रवाई शुरू की गई थी। वह मूल वीडियो क्लिप न तो पुलिस द्वारा जब्त की गई और न ही विचारण न्यायालय के समक्ष पेश करके विधिवत प्रमाणित की गई। कार्रवाई करने वाले वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी ने अपने बयानों में स्वीकार किया कि वह वीडियो उनके मोबाइल पर आया ही नहीं था और न ही उसे जब्त किया गया था। इसी प्रकार तकनीकी सहायक ने भी कहा कि उसने ऐसा कोई वायरल वीडियो नहीं देखा था। कोर्ट में न तो वह मोबाइल, पेनड्राइव या सीडी पेश की गई और न ही वीडियो बनाने वाले किसी स्वतंत्र गवाह के बयान दर्ज किए गए। Add text below Add image below08Heading Paragraph Heading Subheading Quoteदुकान का मालिकाना हक और पीड़ित पक्ष भी नहीं हुआ साबित Add text below Add image below09Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteअदालत में यह बात भी सामने आई कि शुरुआती दस्तावेजों में दुकान राकेश कुमार अग्रवाल की बताई गई थी, जबकि आरोपी मनोज कुमार अग्रवाल उस दुकान का प्रोपराइटर, लाइसेंसधारी या अधिकृत डीलर था, इसका कोई भी ठोस दस्तावेजी प्रमाण पेश नहीं किया गया जिससे दुकान का मालिकाना हक पुख्ता हो सके। Add text below Add image below10Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteइसके अलावा, पुलिस और प्रशासनिक अमले ने जांच के दौरान एक भी ऐसे खरीदार या किसान का बयान दर्ज नहीं किया जिसने वास्तव में 1400 रुपए देकर खाद खरीदी हो। इन सभी तकनीकी कमियों और साक्ष्यों के अभाव को देखते हुए सत्र न्यायालय ने आरोपी मनोज कुमार अग्रवाल को सभी आरोपों से बरी कर दिया। Add text below Add image below