Story detailsHeadline, summary, section, and byline.HeadlineSummaryपर्वाधिराज पर्युषण के पावन अवसर पर गुना के बड़े जैन मंदिर में 'पाड़ाशाह और पारस पत्थर' नाटक का मंचन किया गया। वीर शासन ग्रुप के सहयोग से हुई इस प्रस्तुति को देखने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु और दर्शक पहुंचे।Categoryदुर्घटनाराजनीतिसमस्या/problemस्थानीयअपराधशिक्षाखेलमनोरंजनव्यापारस्थानीयDistrictNo districtग्वालियरदेशमुरैनाभिंडश्योपुरदतियाशिवपुरीगुनाअशोकनगरAuthorEditorial deskMushtaq Ahmad Khan - Editor In Chiefiuyiuhकृषि डेस्क - कृषि संवाददाताक्राइम डेस्क - अपराध संवाददाताधर्म डेस्क - धर्म संपादकपर्यटन डेस्क - पर्यटन संवाददाताराजनीति डेस्क - राजनीतिक विश्लेषकव्यापार डेस्क - व्यापार संवाददाताशिक्षा डेस्क - शिक्षा संवाददातासंपादकीय डेस्क - वरिष्ठ संपादकसांस्कृतिक डेस्क - सांस्कृतिक संपादकस्पोर्ट्स डेस्क - खेल संवाददाताPublish timeStory URLURL slug/article/guna-story-c5583903
StoryWrite in reading order. Add images exactly where they should appear. Text block Image block01Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteपर्वाधिराज पर्यूषण पर्व के विशेष आयोजन के तहत शहर के पार्श्वनाथ बड़े जैन मंदिर परिसर में एक खास सांस्कृतिक प्रस्तुति दी गई। वीर शासन ग्रुप के तत्वावधान में विनर सोसायटी आर्ट एंड कल्चर की ओर से लोककथा पर आधारित रंगमंचीय नाटक ‘पाड़ाशाह और पारस पत्थर’ का मंचन किया गया। इस धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन को देखने के लिए स्थानीय दर्शकों और जैन समाज के लोगों की भारी भीड़ जुटी। Add text below Add image below02Heading Paragraph Heading Subheading Quoteभक्ति और मानवीय मूल्यों पर आधारित रही प्रस्तुति Add text below Add image below03Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteयह नाटक केवल किसी चमत्कारी पत्थर की कथा तक सीमित नहीं था, बल्कि इसमें भक्ति, करुणा, संयम, त्याग और लोककल्याण जैसे उच्च मानवीय मूल्यों को सजीव किया गया। मंच पर कलाकारों ने अपनी बेहतरीन कला के जरिए इन संदेशों को प्रभावी ढंग से दर्शकों के सामने रखा। Add text below Add image below04Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteनाटक के मुख्य पात्र पाड़ाशाह के किरदार के जरिए मेहनत, ईमानदारी और जीवों के प्रति दया भाव को जीवन का आधार बताया गया। अपने आराध्य के प्रति अटूट श्रद्धा से प्रेरित होकर पाड़ाशाह जैन मंदिर निर्माण का संकल्प लेता है, जो शांति और नैतिकता का संदेश देता है। Add text below Add image below05Heading Paragraph Heading Subheading Quoteसत्ता और आम जन के बीच टकराव का सजीव चित्रण Add text below Add image below06Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteपाड़ाशाह की सेवा भावना और सरल स्वभाव के चलते समाज में उसका सम्मान लगातार बढ़ता जाता है। उसकी बढ़ती लोकप्रियता और लोगों का उसके पास अपनी समस्याएं लेकर पहुंचना सत्ता के लिए चिंता का विषय बन जाता है, यहीं से नाटक में आम जनता और सत्ता के बीच का द्वंद्व उभरकर सामने आता है। Add text below Add image below07Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteरंगमंच पर राजा के दरबार का दृश्य, दरबारियों की साजिशें, पाड़ाशाह और सत्ता पक्ष के बीच संवाद तथा पारस पत्थर से जुड़ी लोकमान्यता को बहुत ही रोचक ढंग से दिखाया गया। कई भावनात्मक दृश्यों के दौरान दर्शक पूरी तल्लीनता से नाटक से जुड़े रहे और सशक्त संवाद अदायगी पर तालियां भी बजाईं। Add text below Add image below08Heading Paragraph Heading Subheading Quoteमनुष्य के भीतर ही है सच्चा पारस Add text below Add image below09Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteइस रंगमंच प्रस्तुति का मुख्य संदेश यह था कि सच्चा पारस पत्थर बाहर तलाशने की वस्तु नहीं है, बल्कि यह हर इंसान के भीतर की वह चेतना है जो लोभ को त्याग, क्रोध को क्षमा, हिंसा को अहिंसा और संग्रह की भावना को सेवा में बदल देती है। Add text below Add image below10Paragraph Paragraph Heading Subheading Quoteइस नाटक के लेखक और निर्देशक मधुर जैन ने मंचन के बाद बताया कि यह कृति किसी साधारण चमत्कार की कहानी नहीं है। यह एक ऐसे साधारण इंसान की गाथा है जो अपनी अटूट भक्ति और सरलता के बल पर पूरे समाज को एक नई सकारात्मक दिशा प्रदान कर सकता है। Add text below Add image below